*शत् (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ कलिकाल में विशिष्ट याज्ञिक प्रयोग – यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज*

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –

कठुआ – विश्वव्यापी आतंकवाद के दमन, हिंदूराष्ट्र निर्माण एवं विश्वशांति हेतु परम पूज्य अनंतश्रीविभूषित स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज के सानिध्य में ब्रह्मतीर्थ पुष्कर, राजस्थान में 2000 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 43 दिनों में 200 कुण्डीय विराट के साथ शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ कलिकाल में विशिष्ट याज्ञिक प्रयोग के रूप में किया जा रहा है। चैत्रकृष्णपक्ष पंचमी, रविवार से वैशाख शुक्लपक्ष द्वितीया, रविवार तदनुसार दिनांक 08 मार्च 2026 से यज्ञ का आरम्भ एवं पूर्णाहुति 19 अप्रैल 2026 को होना सुनिश्चित है।

इस अवसर पर प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए जम्मू कश्मीर प्रान्त के गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख तथा श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने विस्तार से बताया कि आदि चतुर्युगी के प्रथम सतयुग में इस यज्ञ को महर्षि विश्वामित्र ने गायत्रीशक्तिपीठ, मणिवेदिकापीठ पुष्कर में उस समय की समस्याओं के समाधान हेतु किया था इसी महाप्रयोग को महाराजश्री द्वारा वैश्विक समकालिक समस्याओं के समाधान हेतु यह इस याज्ञिक प्रयोग को किया जा रहा है। आज समस्त विश्व में अनेक प्रकार के उपद्रवों से भयावह स्थिति, अशान्ति एवं आतंकवाद का वातावरण सर्वत्र व्याप्त है। वर्तमान स्थिति से आप सभी भली-भाँति अवगत हैं कि भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में विविध प्रकार के सनातन धर्म को कुठाराघात पहुंचाने का कुत्सित प्रयत्न किया जा रहा है, उससे समस्त सनातन धर्मी व्यथित हैं। इसके साथ ही कब-कहाँ-क्या हो जाए? इस बात को लेकर हर समय सशंकित रहते हैं, उदाहरण स्वरूप बांग्लादेश का घटनाक्रम को आप लोग जानते हैं कि वहां सनातन धर्मियों को किस स्तर से प्रताड़ित किया गया और यह क्रम अभी भी जारी है। भारत में भी ऐसे घटनाक्रम यदा-कदा दिखाई दे रहे हैं।

इस विकट परिस्थितियों से कैसे समस्त विश्व को शान्ति प्रदान किया जाए ऐसा विचार अभी तक किसी महापुरुष के मन में नहीं आया। भगवती के परम उपासक राष्ट्रवादी महापुरुष, यज्ञसम्राट परम पूज्य स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज द्वारा विश्व की विजय परस्थिति को देखते हुए महाकुंभ के पावन पवित्र अवसर पर यह अकल्पनीय संकल्प लिया गया जिसके परिणाम स्वरूप यज्ञ को आप देख रहे हैं।

इस विषय पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी की शिष्या माता चिदानंदमयी ने बताया कि विश्व कल्याण हेतु जब भी विश्व में कहीं कोई विपदा आई है, तब महाराज जी अग्रणी भूमिका में आकर यज्ञ-यागादि विविध अनुष्ठानों व शुभ कर्मों को सम्पन्न कराकर उससे सृजित शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा से भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व को समय-समय पर अनेकों संकटों से उबारा है। उदाहरण के रूप में देखे तो जब वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19) से सम्पूर्ण विश्व भयाक्रान्त था, वैक्सीन व बूस्टर डोज भी मृत्यु दर को नहीं रोक पा रही थी, तब भगवती दुर्गा जी के आदेश से महामारी शमन हेतु पूज्य महाराजश्री के सानिध्य में काशी के शंकुलधारा पोखरा में 500 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 51 दिवसीय विराट श्रीलक्षचण्डी महायज्ञ का आयोजन दिनांक 18 जनवरी 2021 को आरम्भ किया गया। दिनांक 09 मार्च 2021 को महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ही विश्वस्तर पर वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों द्वारा यह घोषित किया गया कि अब आगे कोरोना महामारी का दुष्प्रभाव नहीं रहेगा, जिसका सुखद परिणाम हम सभी के सम्मुख है।

इस अवसर पर अपने सद संकल्प पर विस्तार से जानकारी देते हुए महाराजश्री ने बताया कि मां भगवती वेद माता गायत्री की प्रेरणा से भारत सहित सम्पूर्ण विश्व को आतंकवाद, अशान्ति व विविध उपद्रवों से मुक्त कराने तथा सनातन धर्म की पुनर्स्थापना हेतु शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का विराट आयोजन 2000 त्रिकाल सन्ध्यावन्दन तत्पर कर्मनिष्ठ ब्राह्मणों द्वारा गायत्री शक्तिपीठ, ब्रह्मतीर्थ पुष्कर में सम्पन्न हो रहा है। इसकी इसके विषय में विस्तार से चर्चा करे तो एक पुरश्चरण में 24 लाख गायत्री मन्त्रों का जप होता है, अतः 100 पुरश्चरण में 24 करोड़ गायत्री मन्त्रों का जप होगा, जिसके दशांश हवन होगा। इस प्रकार इस महायज्ञ में कुल 27 करोड़ गायत्री मन्त्रों का प्रयोग होगा। हवन हेतु यज्ञशाला में 200 यज्ञकुण्ड होंगे जिसमें 200 भाग्यशाली ब्राह्मण यजमान भाग लेंगे। पूर्वकाल में भी महामुनि विश्वामित्र जी ने शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ, पुष्करतीर्थ में किया था, जिसके फलस्वरूप सृष्टि में एक विशिष्ट परिवर्तन किस प्रकार से हुआ ऐसा वर्णन पद्मपुराण एवं अन्य पुराणों में भी विशेष रूप से प्राप्त होता है।

इस अवसर पर डॉ. सज्जन त्रिपाठी ने बताया कि इस शत 100 गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ से जो शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा (ब्राह्मी शक्ति) सृजित होगी, उससे भारत सहित सम्पूर्ण विश्व के धर्मविरुद्ध आचरण करने वालों का मन अवश्य परिवर्तित होगा, परिणाम स्वरूप वह स्वतः ही सनातनी बन जाएंगे।
इस महान अवसर काशी के मूर्धन्य विद्वान सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व मीमांसा विभाग के निवर्तमान अध्यक्ष श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने बताया कि विप्रजनों (ब्राह्मणों) का जीवन का मुख्य धन तो गायत्री ही हैं, अतः महामुनि विश्वामित्र के पश्चात पुनः पुष्करतीर्थ में अनुष्ठित होने वाले इस महायज्ञ के अंग, समस्त विप्रजन अवश्य बनें, दर्शनार्थ यहां अवश्य पधारें तथा यथा सामर्थ्य तन, मन एवं धन की सेवा के साथ अपनी उपस्थिति अवश्य सुनिश्चित करें।
इस विषय पर चर्चा करते हुए तंत्र आगम के उत्कृष्ट विद्वान डॉ. रामप्रिय पाण्डेय ने बताया कि यद्यपि यह विराट महायज्ञ ब्राह्मणों द्वारा तथा ब्राह्मण मात्र के सहयोग से अनुष्ठित हो रहा है परन्तु इसके फल से सम्पूर्ण विश्व के प्राणी मात्र का कल्याण होगा।
इस महायज्ञ में अग्निहोत्री ब्राह्मणों में काशी के व्याकरण शास्त्र के विद्वान एवं सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के व्याकरण विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा महायज्ञ में सभी यजमानों के प्रतिनिधि मुख्य यजमान की भूमिका में अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं और डॉ. सुनील दीक्षित जी मुख्य यज्ञाचार्य के रूप में यज्ञ कर समस्त कार्य को विधि पूर्वक करवाए रहे है। इस अवसर पर मुख्य से रूप से महाराज जी के परिकर सहित देश के विशिष्ट महानुभावों में शिष्यगण एवं विशेष रूप से पुष्कर के तीर्थपुरोहित विशेष रूप से सहयोग कर रहे है। इस यज्ञ में प्रतिदिन प्रातःकाल 6 से दोपहर 2 बजे तक 2000 ब्राह्मणों द्वारा भगवती गायत्री का जप एवं सायं 5 बजे से सूर्यास्त तक हवन के साथ महाआरती का कार्यक्रम विशेष रूप से हो रहा है। यह महायज्ञ एक अलौकिक दिव्य भव्य दर्शन के साथ ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं व्यावहारिक रूप से दर्शनीय है। इस महान अवसर पर प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी जी द्वारा आज के कथावाचकों के विषय में लिखी गई पुस्तक प्रवचन अधिकार विमर्श का विमोचन किया गया जो बहुत ही निर्णयात्मक एवं सामान्य जनमानस के लिए ग्राह्य है। इस विषय पर सभी से अपने विचार व्यक्त किए।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 2 Static 3 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *