*आज का पञ्चांग*
*दिनांक:-26/07/2025, शनिवार*
*द्वितीया, शुक्ल पक्ष,*
*श्रावण*
(समाप्ति काल)
तिथि————- द्वितीया 22:41:16 तक
पक्ष————————— शुक्ल
नक्षत्र————- आश्लेषा 15:51:04
योग————– व्यतिपत 28:04:41
करण————— बालव 10:56:50
करण—————कौलव 22:41:16
वार————————- शनिवार
माह————————- श्रावण
चन्द्र राशि———- कर्क 15:51:04
चन्द्र राशि——————– सिंह
सूर्य राशि———————- कर्क
रितु—————————- वर्षा
आयन——————- दक्षिणायण
संवत्सर——————– विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर)————– सिद्धार्थी
विक्रम संवत—————— 2082
गुजराती संवत—————– 2081
शक संवत——————— 1947
कलि संवत——————– 5126
सूर्योदय——————- 05:40:33
सूर्यास्त——————– 19:10:39
दिन काल—————— 13:30:06
रात्री काल—————– 10:30:25
चंद्रोदय——————- 06:55:25
चंद्रास्त——————– 20:30:35
लग्न—- कर्क 9°5′ , 99°5′
सूर्य नक्षत्र——————— पुष्य
चन्द्र नक्षत्र——————आश्लेषा
नक्षत्र पाया——————– रजत
*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*
डे—- आश्लेषा 09:49:39
डो—- आश्लेषा 15:51:04
मा—- मघा 21:54:59
मी—- मघा 28:01:25
*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
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सूर्य= कर्क 09°49 , पुष्य. 2 हे
चन्द्र= कर्क 26 °30 , आश्लेषा 3 डे
बुध = कर्क 18°52 ‘ आश्लेषा 1 डे
शु क्र= वृषभ 29°05, मृगशिरा , 2 वो
मंगल= सिंह 28°30 ‘ उ o फ़ा o 1 टे
गुरु=मिथुन 10°30 आर्द्रा , 3 ड
शनि=मीन 07°48 ‘ उ o भा o , 2 थ
राहू=(व) कुम्भ 26°25 पू o भा o, 2 सो
केतु= (व) सिंह 26°25 पूoफा o 4 टू
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*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*
राहू काल 09:03 -10:44 अशुभ
यम घंटा 14:07 -15:48 अशुभ
गुली काल 05:41 -07:22 अशुभ
अभिजित 11:59 -12:53 शुभ
दूर मुहूर्त 07:29 – 08:23 अशुभ
वर्ज्यम 28:01-29:40 अशुभ
प्रदोष 19:11-21:18. शुभ
🚩गंड मूल अहोरात्र अशुभ
💮चोघडिया, दिन
काल 05:41-07:22 अशुभ
शुभ 07:22-09:03 शुभ
रोग 09:03 – 10:44 अशुभ
उद्वेग 10:44- 12:26 अशुभ
चर 12:26 -14:07 शुभ
लाभ 14:07- 15:48 शुभ
अमृत 15:48- 17:29 शुभ
काल 17:29 19:11 अशुभ
🚩चोघडिया, रात
लाभ 19:11-20:29 शुभ
उद्वेग 20:29 – 21:48 अशुभ
शुभ 21:48-23:07 शुभ
अमृत 23:07-24:26 शुभ
चर 24:26-25:45 शुभ
रोग 25:45 – 27:03 अशुभ
काल 27:03 – 28:22 अशुभ
लाभ 28:22-29:41 शुभ
💮होरा, दिन
शनि 05:41- 06:48
बृहस्पति 06:48 -07:56
मंगल 07:56 -09:03
सूर्य 09:03-10:11
शुक्र 10:11 -11:18
बुध 11:18- 12:26
चन्द्र 12:26 -13:33
शनि 13:33 -14:41
बृहस्पति 14:41 -15:48
मंगल 15:48- 16:56
सूर्य 16:56- 18:03
शुक्र 18:03 -19:11
🚩होरा, रात
बुध 19:11- 20:03
चन्द्र 20:03- 20:56
शनि 20:56- 21:48
बृहस्पति 21:48- 22:41
मंगल 22:41 -23:33
सूर्य 23:33 – 24:26
शुक्र 24:26-25:18
बुध 25:18-26:11
चन्द्र 26:11-27:03
शनि 27:03-27:56
बृहस्पति 27:56-28:49
मंगल 28:49-29:41
*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*
कर्क > 04:56 से 07:16 तक
सिंह > 07:16 से 09:38 तक
कन्या > 09:38 से 11:52 तक
तुला > 11:52 से 14:12 तक
वृश्चिक > 14:12 से 16:32 तक
धनु > 16:32 से 18:46 तक
मकर > 18:46 से 20:24 तक
कुम्भ > 20:24 से 21:44 तक
मीन > 21:44 से 23:04 तक
मेष > 23:04 से 01:00 तक
वृषभ > 01:00 से 02:50 तक
मिथुन > 02:50 से 05:56 तक
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*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लोंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
2 + 2 + 1 = 5 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
सूर्य ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष
गौरी सान्निधौ = शुभ कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
*धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज जयंती*
*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*
धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्यैकोऽपि न विद्यते ।
जन्मजन्मनि मर्त्येष मरणं तस्य केवलम् ।।
।।चाo नीo।।
जो व्यक्ति निम्नलिखित बाते अर्जित नहीं करता वह बार बार जनम लेकर मरता है.
१. धर्म
२. अर्थ
३. काम
४. मोक्ष
*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*
गीता -: मोक्षसंन्यासयोग:- अo-18
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्।
केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः॥
हे राजन! भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के इस रहस्ययुक्त, कल्याणकारक और अद्भुत संवाद को पुनः-पुनः स्मरण करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ
॥76॥
*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष
पुराने संगी-साथी व रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। नए मित्र बनेंगे। अच्छी खबर मिलेगी। प्रसन्नता रहेगी। कार्यों में गति आएगी। विवेक का प्रयोग करें। लाभ में वृद्धि होगी। मित्रों के सहयोग से किसी बड़ी समस्या का हल मिलेगा। व्यापार ठीक चलेगा। घर-बाहर सुख-शांति रहेगी।
🐂वृष
मेहनत सफल रहेगी। बिगड़े काम बनेंगे। कार्यसिद्धि से प्रसन्नता रहेगी। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने के अवसर मिलेंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। धनार्जन होगा।
👫मिथुन
लेन-देन में सावधानी रखें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें। शोक संदेश मिल सकता है। विवाद को बढ़ावा न दें। किसी के उकसाने में न आएं। व्यस्तता रहेगी। थकान व कमजोरी रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। आय में निश्चितता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा।
🦀कर्क
मेहनत का फल पूरा नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य खराब हो सकता है। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन मिल सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। पारिवारिक मांगलिक कार्य हो सकता है। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे।
🐅सिंह
संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। प्रॉपर्टी ब्रोकर्स के लिए सुनहरा मौका साबित हो सकता है। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। रोजगार में वृद्धि के योग हैं। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आय में वृद्धि होगी। व्यस्तता रहेगी। मित्रों की सहायता कर पाएंगे।
🙍♀️कन्या
शत्रुओं का पराभव होगा। राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। वैवाहिक प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है। कारोबार से लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। कोई बड़ा कार्य करने की योजना बन सकती है। कार्यसिद्धि होगी। सुख के साधनों पर व्यय होगा। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें।
⚖️तुला
वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग से हानि की आशंका है, सावधानी रखें। दूसरों के झगड़ों में हस्तक्षेप न करें। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलने से क्षोभ होगा। फालतू की बातों पर ध्यान न दें। व्यापार ठीक चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य बिलकुल न करें।
🦂वृश्चिक
तीर्थदर्शन हो सकता है। सत्संग का लाभ मिलेगा। राजकीय सहयोग से कार्य पूर्ण व लाभदायक रहेंगे। कारोबार मनोनुकूल रहेगा। शेयर मार्केट में जोखिम न लें। नौकरी में चैन रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। ध्यान रखें।
🏹धनु
आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा कार्य कर पाएंगे। व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। कार्य पूर्ण होंगे। प्रसन्नता रहेगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जोखिम न लें। भाइयों का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।
🐊मकर
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लंबी यात्रा हो सकती है। लाभ होगा। नए अनुबंध हो सकते हैं। रोजगार में वृद्धि होगी। रुके कार्य पूर्ण होंगे। प्रसन्नता रहेगी। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। प्रशंसा मिलेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। प्रमाद न करें।
🍯कुंभ
व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। किसी व्यक्ति के उकसावे में न आएं। विवाद से बचें। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। व्यापार ठीक चलेगा। आय होगी। विवेक का प्रयोग करें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।
🐟मीन
रोजगार में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। कोई बड़ा कार्य हो जाने से प्रसन्नता रहेगी। निवेश लाभदायक रहेगा। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। विवाद से बचें। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है।
*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*
*🛕जय श्री राम*
*लालच दुःख का कारण बन जाता हैँ*
*एक बार श्रीचन्द नामक पंडित जी कई वर्षो से काशी में शास्त्रों और वेदों का अध्ययन कर रहे थे। उन्हें सभी वेदों का ज्ञान हो गया था। श्रीचन्द जी को लगा कि अब वह अपने गाँव के सबसे ज्ञानी व्यक्ति कहलायेगे। उनके अन्दर घमण्ड आ गया था।*
अगले दिन श्रीचन्द जी अपने गाँव जाने लगे। गाँव में आते ही एक किसान ने उनसे पूछा, क्या आप हमें बता सकते है, कि हमारे समाज में लोग दुखी क्यों है? श्रीचन्द जी ने कहा, लोगो के पास जीने के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। अपनी जरुरत पूरी करने के लिए धन नहीं है, इसलिए लोग दुखी है। किसान ने कहा,परन्तु श्रीचन्द जी जिन लोगो के पास धन दौलत है,वह लोग भी दुखी है। मेरे पास धन संपत्ति है फिर भी मै दुखी हूँ क्यों ?
श्रीचन्द जी को कुछ समझ नहीं आया कि वह किसान को क्या उत्तर दे। किसान ने कहा कि,वह आपको अपनी सारी संपत्ति दान कर देगा अगर आप उस के दुःख का कारण पता करके उसे बता दे तो। श्रीचन्द जी ने उसकी संपत्ति के लालच में कहा, ठीक है मैं कुछ दिनों में ही आपके दुःख का कारण ढूंढ लाऊंगा।
यह कहकर श्रीचन्द जी पुनः काशी चले गए। उन्होंने शास्त्रों और वेदों का फिर से अध्ययन किया, परन्तु उन्हें किसान के सवाल का जवाव नहीं मिला। श्रीचन्द जी बहुत परेशान थे। वह सोच रहे थे कि अगर मैं किसान के सवाल का उत्तर नहीं दे पाया तो, लाखो की संपत्ति हाथ से चली जाएगी। अचानक उनकी मुलाकात एक औरत से हुई, जो रोड पर भीख माँग कर अपना गुजारा करती थी। उसने श्रीचन्द जी से उनके दुःख का कारण पूछा।
श्रीचन्द जी ने उसे सबकुछ बता दिया। उस औरत ने कहा कि वह उनको उनके सवाल का उत्तर देगी परन्तु उसके लिए उन्हें उसके साथ कुछ दिन रहना पड़ेगा। श्रीचन्द जी कुछ देर चुप रहे वह सोच रहे थे कि, वह इसके साथ कैसे रह सकते है। अगर वह इसके साथ रहे तो उनको धर्म नष्ट हो जायेगा। श्रीचन्द जी ने फिर सोचा कुछ दिनों की बात है उन्हें किसान के सवाल का उत्तर जब मिल जायेगा वह चले जायेगे और किसान की संपत्ति के मालिक बन जायेगे।
श्रीचन्द जी उसके साथ रहने के लिए तैयार हो गए। कुछ दिन तक वह उसके साथ रहे पर सवाल का उत्तर उस औरत ने नहीं दिया। श्रीचन्द जी ने उससे कहा, मेरे सवाल का उत्तर कब मिलेगा। औरत बोली, आपको मेरे हाथ का खाना खाना होगा। श्रीचन्द जी मान गए। जो किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे, वह उस गन्दी औरत के हाथ का बना खाना खा रहे थे ।
उनके सवाल का उत्तर अब भी नहीं मिला। अब औरत ने बोला उन्हें भी उनके साथ सड़क पर खड़े होकर भीख मांगनी पड़ेगी।श्रीचन्द जी को किसान के सवाल का उत्तर पता करना था, इसलिए वह उसके साथ भीख मांगने के लिए भी तैयार हो गए। उसके साथ भीख मांगने पर भी उसे अभी तक सवाल का उत्तर नहीं मिला था।
एक दिन औरत ने श्रीचन्द जी से कहा कि उन्हें आज उसका झूठा भोजन खाना है। यह सुनकर श्रीचन्द जी को गुस्सा आया, और वह उसपे चिल्लाये और बोले तुम मुझे मेरे सवाल का उत्तर दे सकती हो तो बताओ।
वह औरत मुस्कुराई और बोली, श्रीचन्द जी यह तो आपके सवाल का उत्तर है। यहाँ आने से पहले आप किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे। मेरे जैसी औरतो को तो आप देखना भी पसंद नहीं करते थे,परन्तु किसान की संपत्ति के लालच में आप मेरे साथ रहने के लिए भी तैयार हो गए।
श्रीचन्द जी, असल में इंसान का लालच और उसकी बढ़ती हुई इच्छाए ही उसके दुःख का कारण है। जो उसे वह सबकुछ करने पर मजबूर कर देती है, जो उसने कभी करने के लिए सोचा भी नहीं होता। हमे इतनी भी लालच नही करना चाहिये की हम हमारा आत्म सम्मान खो बैठे । धन , सुख ,संपत्ति आनी जानी हैं पर आपका सम्मान आपके जाने के बाद भी तटस्थ रहेगा।
धन की लालच ना करे ।
वैसे तो जीवन मै हमारे पास अनेको कारण दुःख के होते हैं । हमे ये नही मिल पाया ,हमारे बच्चों को ये नही मिल पाया, हमे बडा घर का सुख नही मिला, हमे बड़ी गाडी का सुख नही मिला । हमारी लालच हमेशा बढ़ती ही जाती हैं । हमें जो मिलता हैं हम उसमे ख़ुशी की तलाश नही करते पर जो नही मिल पाता उसका हम जिंदगी भर गम पालते हैं । हमारी हालत वैसे ही हैं यदि एक दांत टूट जाए तो हमारी जुबान उसी खाली दांत की तरफ ही जायगी। हम जो 31 दांत बचे उसका आनन्द नही उठाते।
जिंदगी मै लालच हमे अन्धकार की और ले जाता हैं। यही हमारे घमण्ड का कारक भी बनता हैं।लालच हमे ऊंचाई से नीचे भी गिरा देता हैं। किसी वस्तु को पाने की मेहनत करना सफलता हो सकती हैं।पर किसी वस्तु की लालच कर उसको गलत तरीके से पाना हमे अपने आपको भटका सकता हैं।ज्यादा लालच हमारे दुःख का कारण भी बनता हैं।हम कल के लिये और और इकट्ठा करने के लालच मै आज की जिंदगी भी नही जी पाते..!!
“हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻
1. *लालच इंसान को अंधा बना देता है:*
श्रीचन्द जी एक विद्वान और सम्मानित व्यक्ति थे, लेकिन संपत्ति के लालच में उन्होंने अपने सिद्धांतों को ताक पर रख दिया। इससे यह सिख मिलती है कि जब हम अत्यधिक लालच में फंसते हैं, तो हम अपने आत्म-सम्मान और मूल्य खो बैठते हैं।
2. *इच्छाओं की सीमा नहीं होती:*
जब हम अपनी जरूरतों की बजाय इच्छाओं के पीछे भागते हैं, तो हम कभी संतुष्ट नहीं हो सकते। श्रीचन्द जी के जैसे हमें भी वह नहीं मिल पाता जो हमारे पास है, क्योंकि हम सिर्फ और ज्यादा पाने के पीछे भागते रहते हैं।
3. *सच्चा ज्ञान अनुभव से आता है, न कि सिर्फ पढ़ाई से:*
श्रीचन्द जी ने वेद-शास्त्र पढ़े थे, लेकिन उन्हें सच्चा उत्तर तब मिला जब उन्होंने जीवन के वास्तविक अनुभवों से सीखा। इससे यह सिख मिलती है कि केवल ज्ञान नहीं, जीवन की सच्चाईयों को समझना भी जरूरी है।
4. *सम्मान सबसे बड़ी संपत्ति है:*
श्रीचन्द जी ने अंत में यह महसूस किया कि थोड़े लाभ के लिए जब आत्मसम्मान से समझौता किया जाए, तो वह प्राप्ति भी व्यर्थ हो जाती है। हमें कभी भी किसी भी कीमत पर अपनी गरिमा को नहीं खोना चाहिए।
5. *संतोष और सरलता में ही सुख है:*
कहानी में बताया गया है कि आधी और रूखी रोटी भी अच्छी है अगर वह आपकी मेहनत से मिली हो। लालच से मिली भरी-पूरी चीजें अंततः दुख का कारण बनती हैं। इसलिए, संतोष ही सच्चा सुख है।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।।
