*आज आपका राशिफल एवं प्रेरक प्रसंग- गुरुपूर्णिमा महोत्सव*


*आज का पञ्चांग*

*दिनांक :-10/07/2025,गुरुवार*
*पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष,*
*आषाढ*
(समाप्ति काल)

तिथि———– पूर्णिमा 26:05:45 तक
पक्ष————————– शुक्ल
नक्षत्र——— पूर्वाषाढा 29:55:10
योग————— ऐन्द्र 21:36:22
करण———विष्टि भद्र 13:54:38
करण————— बव 26:05:45
वार———————— गुरूवार
माह———————— आषाढ
चन्द्र राशि——————– धनु
सूर्य राशि—————— मिथुन
रितु—————————-वर्षा
आयन—————— दक्षिणायण
संवत्सर——————- विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर)————– सिद्धार्थी
विक्रम संवत—————- 2082
गुजराती संवत————– 2081
शक संवत—————— 1947
कलि संवत—————— 5126
सूर्योदय—————- 05:32:28
सूर्यास्त————–‐– 19:16:37
दिन काल————– 13:44:08
रात्री काल————– 10:16:18
चंद्रास्त—————– 05:51:40
चंद्रोदय—————–19:14:33
लग्न—- मिथुन 23°48′ , 83°48′
सूर्य नक्षत्र——————- पुनर्वसु
चन्द्र नक्षत्र—————- पूर्वाषाढा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*

भू—- पूर्वाषाढा 11:08:01

धा—- पूर्वाषाढा 17:25:26

फा—- पूर्वाषाढा 23:41:08

*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मिथुन 22°49, पुनर्वसु 2 को
चन्द्र= धनु 13 °30 , पूoषाo 1 भू
बुध = कर्क 18°52 ‘ आश्लेषा 1 डी
शु क्र= वृषभ 11°05, रोहिणी , 1 ओ
मंगल= सिंह 18°30 ‘ पू o फ़ा o 2 टा
गुरु=मिथुन 12°30 आर्द्रा , 2 घ
शनि=मीन 07°48 ‘ उ o भा o , 2 थ
राहू=(व) कुम्भ 27°15 पू o भा o, 3 दा
केतु= (व) सिंह 27°15 उ oफा o 1 टे
============================

*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*

राहू काल 14:08 – 15:51 अशुभ
यम घंटा 05:32 – 07:15 अशुभ
गुली काल 08:59 – 10:42 अशुभ
अभिजित 11:57 – 12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 10:07 – 11:02 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:37 – 16:32 अशुभ
वर्ज्यम 14:55 – 16:35 अशुभ
प्रदोष 19:17 – 21:21. शुभ

💮चोघडिया, दिन
शुभ 05:32 – 07:15 शुभ
रोग 07:15 – 08:59 अशुभ
उद्वेग 08:59 – 10:42 अशुभ
चर 10:42 – 12:25 शुभ
लाभ 12:25 – 14:08 शुभ
अमृत 14:08 – 15:51 शुभ
काल 15:51 – 17:34 अशुभ
शुभ 17:34 – 19:17 शुभ

🚩चोघडिया, रात
अमृत 19:17 – 20:34 शुभ
चर 20:34 – 21:51 शुभ
रोग 21:51 – 23:08 अशुभ
काल 23:08 – 24:25* अशुभ
लाभ 24:25* – 25:42* शुभ
उद्वेग 25:42* – 26:59* अशुभ
शुभ 26:59* – 28:16* शुभ
अमृत 28:16* – 29:33* शुभ

💮होरा, दिन
बृहस्पति 05:32 – 06:41
मंगल 06:41 – 07:50
सूर्य 07:50 – 08:59
शुक्र 08:59 – 10:07
बुध 10:07 – 11:16
चन्द्र 11:16 – 12:25
शनि 12:25 – 13:33
बृहस्पति 13:33 – 14:42
मंगल 14:42 – 15:51
सूर्य 15:51 – 16:59
शुक्र 16:59 – 18:08
बुध 18:08 – 19:17

🚩होरा, रात
चन्द्र 19:17 – 20:08
शनि 20:08 – 20:59
बृहस्पति 20:59 – 21:51
मंगल 21:51 – 22:42
सूर्य 22:42 – 23:33
शुक्र 23:33 – 24:25
बुध 24:25* – 25:16
चन्द्र 25:16* – 26:08
शनि 26:08* – 26:59
बृहस्पति 26:59* – 27:50
मंगल 27:50* – 28:42
सूर्य 28:42* – 29:33

*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*

मिथुन > 03:46 से 05:56 तक
कर्क > 05:56 से 08:16 तक
सिंह > 08:16 से 10:36 तक
कन्या > 10:36 से 12:50 तक
तुला > 12:50 से 15:10 तक
वृश्चिक > 15:10 से 17:30 तक
धनु > 17:30 से 19:44 तक
मकर > 19:44 से 21:22 तक
कुम्भ > 21:22 से 22:42 तक
मीन > 22:42 से 00:04 तक
मेष > 00:04 से 01:58 तक
वृषभ > 01:58 से 03:48 तक
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*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*💮दिशा शूल ज्ञान————- दक्षिण*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा बेसन के लड्डू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

15 + 5 + 1 = 21 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

चंद्र ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

15 + 15 + 5 = 35 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

दोपहर 13:51 तक समाप्त

पाताल लोक = धनलाभ कारक

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

*सत्य पूर्णिमा*

*गुरु पूर्णिमा महापर्व (व्यास पूजन)*

*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*

दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे ।।
।।चाo नीo।।

एक दुर्जन और एक सर्प मे यह अंतर है की साप तभी डंख मरेगा जब उसकी जान को खतरा हो लेकिन दुर्जन पग पग पर हानि पहुचने की कोशिश करेगा .

*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*

गीता -: मोक्षसंन्यासयोग:- अo-18

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽजुर्न तिष्ठति।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारुढानि मायया॥

हे अर्जुन! शरीर रूप यंत्र में आरूढ़ हुए संपूर्ण प्राणियों को अन्तर्यामी परमेश्वर अपनी माया से उनके कर्मों के अनुसार भ्रमण कराता हुआ सब प्राणियों के हृदय में स्थित है
॥61॥

*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
शारीरिक कष्ट से बाधा संभव है। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। हल्की हंसी-मजाक न करें। किसी अपरिचित व्यक्ति पर भरोसा न करें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी।

🐂वृष
सुख के साधनों पर व्यय होगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। निवेश शुभ रहेगा। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। नौकरी में प्रमोशन‍ मिल सकता है। चोट व रोग से बचें। यश बढ़ेगा। बेचैनी रहेगी। जल्दबाजी न करें।

👫मिथुन
स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। घर में अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। नौकरी में अधिकार मिल सकते हैं। शेयर मार्केट से लाभ होगा। बाहर जाने का मन बनेगा। बड़ा काम करने की योजना बनेगी। लाभ होगा।

🦀कर्क
कानूनी अड़चन सामने आएगी। अज्ञात भय सताएगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। प्रयास सफल रहेंगे। पराक्रम बढ़ेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी में उच्च‍ाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। शेयर मार्केट मनोनुकूल लाभ देंगे।

🐅सिंह
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। पुराना रोग उभर सकता है। दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। विवाद से क्लेश संभव है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। किसी अपरिचित व्यक्ति पर अतिविश्वास न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी।

🙍‍♀️कन्या
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में संतोष रहेगा। पार्टी व पि‍कनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। शारीरिक कष्ट संभव है।

⚖️तुला
व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। भूमि व भवन संबंधी कार्य लाभदायक रहेंगे। ऐश्वर्य के साधनों पर व्यय होगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में निवेश लाभदायक रहेगा।

🦂वृश्चिक
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में सफलता मिलेगी। स्थायी संपत्ति की दलाली बड़ा लाभ दे सकती है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। सभी ओर से खुश खबरें प्राप्त होंगी। पारिवारिक चिंता रहेगी। अज्ञात भय सताएगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

🏹धनु
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। धनागम होगा। प्रतिद्वंद्वी अपना रास्ता छोड़ देंगे। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। किसी भी प्रकार के झगड़ों में न पड़ें। वाणी पर नियंत्रण रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।

🐊मकर
धार्मिक कार्य में मन लगेगा। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में उन्नति होगी। निवेशादि करने का मन बनेगा। विवेक से कार्य करें, लाभ होगा। शत्रु सक्रिय रहेंगे। परिवार की चिंता बनी रहेगी।

🍯कुंभ
शारीरिक कष्ट संभव है। पारिवारिक समस्या से चिंता बढ़ सकती है। नई आर्थिक नीति बन सकती है। कार्यस्थल पर सुधार व परिवर्तन से भविष्य में लाभ होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पार्टनरों का सहयोग कार्य में गति प्रदान करेगा। शत्रु सक्रिय रहेंगे। पुराना रोग उभर सकता है।

🐟मीन
लेनदारी वसूल करने के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। भाग्य का साथ रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। समय पर कर्ज चुका पाएंगे। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। शेयर मार्केट, म्युचुअल फंड इत्यादि से लाभ होगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी न करें।

*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*

*गुरुपूर्णिमा महोत्सव*

(गोस्वामी आनंद वल्लभ महाराज- विनायक फीचर्स)

गुरु पूर्णिमा का दिन भक्तगण बहुत श्रद्धा से मनाते हैं। इस दिन हर एक व्यक्ति गुरु स्थान पर उनका आशीर्वाद लेने जाते हैं। सतगुरु अर्थात परमपिता परमात्मा कहते हैं-
*गुरु बिन ज्ञान नहीं गुरु बिन घोर अँधियारा, गुरु बिना सद्गति नहीं* ’ इसलिए गुरु को बहुत महान माना जाता है। सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्मा तथा उनके साथ विष्णु और शंकर को भी गुरु रूप में याद किया जाता है। कहा गया है,

*गुरुर्ब्रहमा, गुरुर्विष्णु , गुरुर्देवो महेश्वर*
*गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः*

इस तरह ब्रह्मा,विष्णु ,और महेश के साथ-साथ परब्रह्म में रहने वाले परमपिता परमेश्वर को भी सतगुरु के रूप में विशेष याद करके उन्हें नमन किया जाता है। हमें उनका पूर्ण परिचय न होने के कारण हम अन्य गुरुओं के पास जाते हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि हम सच्चे सतगुरु परमपिता को जानें, जो एक ही हैं। श्री राम, श्रीकृष्ण, और भगवान शंकर आदि सभी देवताओं ने भी गुरु का ध्यान किया है। वे इस सृष्टि के निवासी नहीं हैं, सृष्टि के पाँच तत्वों से भी पार ब्रह्मतत्व, परलोक, परमधाम है, वहाँ के रहने वाले हैं। हम सबके लिए सतगुरु के साथ-साथ माता, पिता, सखा, बंधु आदि सर्व सम्बन्धी हैं। वे गुरु या सतगुरु के रूप में हमें जीवन में मदद करते आए हैं, शिक्षा देते आए हैं और दुख-दर्दों से मुक्त करते आये हैं।
जब किसी भी व्यक्ति की पूर्णता को, विशेषता को पूर्ण रूप से दिखाना होता है तो कहा जाता है वह चंद्रमा की तरह 16 कला पूर्ण है। गुरु भी सर्व गुणों के सागर, सर्वज्ञ, सर्व शक्तियों से पूर्ण, सर्व दुखों, विकारों से मुक्त करने वाले, सभी आत्माओं को सुख शांति देने वाले होने चाहिए।
ऐसे सतगुरु तो एक ही परमपिता परमात्मा हैं जिनके स्मरण से ही सारे गुरुओं को गुरु पद मिलता है। जो भी गुरु हैं वे परमात्मा की मदद के बिना किसी का दुख दूर नहीं कर सकते, इच्छाओं को पूर्ण नहीं कर सकते क्योंकि वे खुद जीवन-मृत्यु और जन्म-पुनर्जन्म के बंधन में बंधे हुए हैं। याद रहे, केवल एक ही निराकार सतगुरु परमपिता हैं जो सर्व बंधनों से मुक्त हैं, कालों के काल सद्गति दाता हैं। इसलिए गुरुपूर्णिमा उन्हीं सतगुरु की याद में मनानी है। भले ही हम इन गुरुओं पर श्रद्धा रखें, आदर करें परंतु याद रखें कि इन गुरुओं की महानता भी केवल सतगुरु के कारण ही है। इसलिए हमें सतगुरु को जानने का प्रयत्न करना है। उस सतगुरु परमपिता परमात्मा को हम अपने विकारों की भेंट दें ताकि फिर कभी उन विकारों के वश न हों। *(विनायक फीचर्स)*

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 2 Static 3 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4

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