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*अजब-गजब -यहां कोनहारा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन दुनिया का लगता है सबसे बड़ा भूतों का मेला*

डेस्क -देश और दुनिया में साइंस ने हर क्षेत्र में तरक्की कर ली हो लेकिन आज भी शिक्षा और जागरुकता के अभाव में देश कई इलाकों में अंधविश्वास…

डेस्क -देश और दुनिया में साइंस ने हर क्षेत्र में तरक्की कर ली हो लेकिन आज भी शिक्षा और जागरुकता के अभाव में देश कई इलाकों में अंधविश्वास और आस्था, साइंस पर भारी पड़ता साफ़ नजर आ ही जाता है। इसका जीता जगता उदहारण आप वैशाली के हाजीपुर में देख सकते हैं। यहां कोनहारा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन दुनिया का सबसे बड़ा भूतों का मेला लगता है। इस दौरान तांत्रिक अपने अनुष्ठान के द्वारा भूत बाधा ने निजात दिलाने का दावा भी करते हैं।

जानकारी मिल रही है कि यह भूत खेली कार्तिक पूर्णिमा से एक रात पूर्व ही शुरू हो जाती है। तांत्रिक रात भर चलने वाले इस अनुष्ठान के द्वारा भूत बाधा से परेशान लोगों को निजात दिलाते हैं। भूतों को पकड़ने और भगाने का दावा करने वाले ओझा भी इस मेले में बड़ी संख्या में आकर अपनी मंडली लगाते हैं। जगह-जगह ओझाओं की मंडली सजी होती है, जो अलग-अलग अनुष्ठान कर रहे होते हैं।

इस मेले में अंधविश्वास के कई अनुष्ठान की अनोखी तस्वीर देखने को मिलती है. यहां अजीबोगरीब दृश्य दिखता है। कहीं तो भूत भगाने के लिए महिलाओं को बालों से खींचा जाता है, तो कहीं छड़ी यानि स्थानीय भाषा में जिसे सन्टी कहते हैं, उनसे पिटाई की जाती है। भूतों के इस अजूबे मेले में आए ओझाओं के दावे भी आपको अजूबे लगेंगे। सबसे मजेदार बात ये होती है कि भूतों की भाषा सिर्फ ओझा और भगत समझते हैं।

ज्ञात हो कि हाजीपुर के कोनहारा घाट ऐतिहासिक घाट है। इस घाट पर स्वयं भगवान विष्णु ने अवतार लिया था। इस घाट पर गज और ग्राह की लड़ाई हुई थी। जिसमें ग्राहक गज को पानी में खींच कर डुबो रहा था, तब गज भगवान विष्णु को याद किया और प्रार्थना किया तो भगवान विष्णु गज की रक्षा करने के लिए हाजीपुर के घाट पर अवतार लिए और गज और ग्राह की लड़ाई को खत्म कर और गज की भगवान विष्णु ने जान बचाई थी ।

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