उत्तराखंड

“*आयुर्वेद में आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि रोग-निवारण की प्रथम औषधि है।*”

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) - ऋषिकेश : एस जी आर आर विश्वविद्यालय देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र में की नोट स्पीकर…


देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) – ऋषिकेश : एस जी आर आर विश्वविद्यालय देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र में की नोट स्पीकर के रूप में ऋषिकेश के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ डी के श्रीवास्तव गोल्ड मेडलिस्ट एवं अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ ने “Ayurvedic Food & Nutrition for Lifestyle Diseases” विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग तथा मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे जीवनशैली रोगों के मूल में असंतुलित आहार, तनाव और प्रकृति-विरोधी जीवनशैली है। आयुर्वेद इन रोगों को केवल औषधि से नहीं, बल्कि आहार, विहार और मानसिक संतुलन के माध्यम से जड़ से नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।

डॉ. श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक पोषण प्रणाली त्रिदोष सिद्धांत पर आधारित है, जो व्यक्ति विशेष की प्रकृति के अनुसार आहार निर्धारण करती है। उन्होंने आधुनिक पोषण विज्ञान और आयुर्वेद के समन्वय पर भी विशेष बल दिया।मुख्य वक्ता डॉ श्रीवास्तवा ने अपने भाषण में बताया कि आज के समय में जीवनशैली से जुड़े रोग—जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा मोटापा—धूमधड़ाके से बढ़ रहे हैं, जिनके मूल में असंतुलित आहार, तनावपूर्ण जीवनशैली और आधुनिक खान-पान हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ दवा नहीं, बल्कि एक समग्र जीवनशैली विज्ञान है, जो संतुलित आहार, सही पोषण, तथा सन्तुलित दिनचर्या के माध्यम से इन रोगों को न केवल रोक सकता है बल्कि नियंत्रित भी कर सकता है। 

वक्ता ने संदेश देते हुए कहा कि
➡️ आयुर्वेद में आहार को अंतःकरण स्वास्थ्य का मूल आधार माना गया है,
➡️ सही पोषण शरीर के दोष (वात–पित्त–कफ) को संतुलित करने में मदद करता है,
➡️ आधुनिक जीवनशैली रोगों की जड़ तक पहुंचने के लिए आवश्यक है आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के साथ विहार (व्यायाम, प्राणायाम), निद्रा और मानसिक संतुलन का समन्वय। 

सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने भी जोर देकर कहा कि आयुर्वेद का वैश्विक स्तर पर प्रचार आज अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह समग्र स्वास्थ्य, पोषण और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को नयी दिशा दे सकता है। सम्मेलन में भारत सहित जर्मनी , दुबई , अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिन्होंने आयुर्वेद के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर आपसी संवाद स्थापित किया।
सम्मेलन में देश–विदेश से आए विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं चिकित्सकों ने व्याख्यान की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर जीवनशैली रोग नियंत्रण का प्रभावी मॉडल बताया। कार्यक्रम में प्रो जर्मनी से लिया गार्डल ,ओमनारायण तिवारी , संस्कृत विश्वविद्यालय वाईस चांसलर प्रोफ़ डॉ रमाकांत पांडे, रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद श्रीमती नर्वदा गोसाई , डॉ रमेश लाल बिजलानी एक्स प्रोफ़ फिजियोलॉजी एम्स दिल्ली डॉ कंचन जोशी विभागाध्यक्ष डॉ अनिल थपलियाल सहित डॉ श्रीवास्तव ने डीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया इस कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड स्टेट कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (UCOST) ने किया यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार दो दिन तक चलेगा ।

“आज की जीवनशैली बीमारियों का समाधान आधुनिक दवाओं से अधिक, जीवनशैली सुधार में निहित है—और आयुर्वेद इसका वैज्ञानिक मार्ग दिखाता है।”

“*यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुसार आहार ले, तो मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियाँ स्वतः नियंत्रित हो सकती हैं।*”

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