*गौ, विप्र, विद्वान और सन्त सनातन जनमानस की आत्मा है – स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज*
देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –
प्रयागराज – पावन पवित्र तीर्थराज प्रयागराज माघ मेला में राष्ट्र के प्रति सन्तों का योगदान इस समसामयिक विषय पर सन्त सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस विषय पर विद्वान सन्तों ने अपने पुरुषार्थ को स्मरण करते हुए अपने अपने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज ने कहा कि आज सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा में विश्वास रखने वाले समाज में असंतोष की स्थिति बनी हुई है और इस स्थिति से बाहर निकलने हेतु मार्गदर्शन करना सन्तों एवं विद्वानों का कार्य है क्योंकि सन्त निरंतर समाज के लिए राष्ट्रहित में तत्पर होकर उनके उन्नयन हेतु कार्य करते रहे हैं और आज उस परम्परा में ह्रास हो रहा है जो बहुत ही चिंतनीय एवं विचारणीय है।
इसी क्रम में अपने विषय को पुष्ट करते हुए श्रीकाशीविद्वत्धर्मपरिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने बताया कि सन्त एवं विद्वान सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा की धूरी है। सनातन संस्कृति के आधार सवर्ण समाज पर आजकल लोकतांत्रिक संविधान के बहाने से कुठाराघात हो रहा है जो बहुत ही ज्वलंत विषय है। आज समाज में सदा से मार्गपरस्त करने वाली सनातन संस्कृति की प्राणभूत आत्मा मनुस्मृति को जलाया और अपमानित किया जा रहा है जो समाज के लिए हानिकारक है। यदि इस विषय पर सन्त एवं विद्वान एकमत होकर समाज को इसके सम्मान हेतु जनजागरण और शासन को अवगत नहीं कराया गया तो बहुत बड़ा नुकसना हो जाएगा हमारी स्मृतियों की समृद्ध परम्परा का। खासकर यह सन्तों के लिए और अधिक जिम्मेदारी का विषय बन गया है।
वक्ताओं के क्रम में अपनी बात रखते हुए रामानुजाचार्य जगतगुरु स्वामी श्रीधनश्यामाचार्य जी महाराज ने कहा कि धर्म ने हमें धारण किया है और उसके साथ चलना हमारा परम कर्तव्य है। इस क्रम में अनेक संतों ने अपने अपने वक्तव्य वक्त किया जो निश्चित रूप से समाज को दिशा देने में सक्षम होगा।
इस अवसर पर डॉ. विजय शर्मा, डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय, युवराज स्वामी श्री गोपालाचार्य, विष्णु विक्रमाचार्य, जयरामदास, स्वामी अच्छुत प्रपन्नाचार्य जी,मानस केशरी रामलखनदास जी, श्री राघवेन्द्र जी आदि सन्त विद्वान सम्मेलन में उपस्थित रहे।
