अंतर्राष्ट्रीय

*मनुस्मृति सनातन धर्म का मूल संविधान है – स्वामी राघवाचार्य जी महाराज *

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) - कठुआ/जम्मू - तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के पावन पवित्र अवसर पर सभी सन्त विद्वान एवं जगतगुरु मनुस्मृति के ज्वलंत विषय…

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –

कठुआ/जम्मू – तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के पावन पवित्र अवसर पर सभी सन्त विद्वान एवं जगतगुरु मनुस्मृति के ज्वलंत विषय पर एक मंच आए। कुछ दिन पहले कुछ भटके हुए लोगों द्वारा मनुस्मृति को जलाने एवं अपमान करने जैसे निंदनीय कृत्य पर काशी में श्रीकाशी विद्वद्धर्मपरिषद् (संस्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट- न्यास) ने बैठक करके सभी धर्माचार्यों से इस गम्भीर मुद्दे पर चर्चा करने हेतु निवेदन किया था उसी क्रम में एकजुट होकर उपस्थित धर्माचार्यों ने अपने अपने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविख्यात कथावाचक रामानुजाचार्य जगतगुरु स्वामी श्रीराघवाचार्य जी महाराज ने बताया कि मनुस्मृति सनातन धर्म का मूल संविधान है और अनादिकाल से सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा में विश्वास रखने वाले समाज का संचालन इसी के माध्यम से विधिवत चला आया है। आजकल कुछ वर्ग विशेष के अबोध लोगों द्वारा बिना पढ़े इस धर्मशास्त्र के प्राणरूपी ग्रन्थ का अपमान करने का दुस्साहस करना निंदनीय है। इस विषय पर सरकार को तत्काल कठोर कार्यवाही करनी होगी नहीं तो यह समाज अब रुकने वाला नहीं है।
इसी विषय पर चर्चा करते हुए डॉ. श्याम सुन्दर पाराशर जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म के संचालन में मनुस्मृति का विशेष महत्व है और उसके अध्ययन एवं भावार्थ समझे बिना विरोध करना यह सनातन संविधान एवं संस्कृति का विरोध है। यदि किसी व्यक्ति को उसमें लिखे किसी भी विषय पर चर्चा करना है तो काशी के विद्वानों अथवा धर्माचार्यों के पास आकर समझे ऐसे अपमान करना ठीक नहीं है। यदि इस विषय पर तत्काल कार्यवाही नहीं हुई तो हमें अपने कथा प्रवचन के माध्यम से समाज को जागृत करके इसे बुद्धिजीवी लोगों को अधिक से अधिक विस्तारपूर्वक समझाना चाहिए।

इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी जी बताया कि देश में हमारे धर्मशास्त्र के प्रति ऐसे जघन्य अपराध किए जा रहे हैं और सन्त, महात्मा और विद्वान लोग मौन साधकर समाधिस्थ हो गए है। यदि ऐसे मुद्दों पर शास्त्र को पढ़ने और उसी के ज्ञान से जीने वाले विद्वान नहीं बोलेंगे तो ऐसे कृत्य आए दिन होते हुए देखे जाएंगे। यदि प्रयागराज माघ मेला में आए हुए सभी धर्माचार्य एवं विद्वान लोग एकमत होकर प्रतिकार नहीं किए तो ऐसे उपद्रवियों का मन बढ़ जाएगा और समाज के अग्रणी होने के नाते हम सब का दायित्व भी बढ़ जाता है कि ऐसे विषय पर तत्काल कार्यवाही हेतु शासन को भी अवगत करवाना चाहिए। इस मुद्दे पर कुछ विद्वान जो परिषद् के नाम की दुकान सजाए बैठे है उनका मुख भी अनर्गल धन के भोग से आच्छादित होकर मलिन जैसा हो गया है क्योंकि अभी तक किसी ने इस विषय पर तत्काल कार्यवाही एवं विचार व्यक्त नहीं किया। देशभर में सच को सच कहने का साहस केवल श्रीकाशीविद्वद्धर्म परिषद् में ही दिख रहा है और आगे भी इसे मुद्दों पर पुरजोर विरोध एवं कार्यवाही का प्रयास रहेगा।

इसी क्रम श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी व गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख जम्मू कश्मीर प्रान्त डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने बताया कि भारतीय संविधान से देश चलता है लेकिन आज भी गम्भीर चिन्तन दृष्टि से विचार किया जाए तो सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा में विश्वास रखने वाला समाज हमारी स्मृतियों में प्रोक्त नियमों के आधार पर चलते हैं। आजकल बिना पढ़े लिखे एवं विसंगतियों के साथ प्रकाशित ग्रन्थों को आधार बनाकर कुछ वर्ग विशेष के लोग ऐसे कृत्य कर रहे हैं हम उनको बताना चाहते हैं कि यदि उन्हें ठीक से मूल मनुस्मृति का पता चल जाए तो वे ऐसा कभी भी नहीं करेंगे। हमारा संविधान दस से अधिक देशों के संविधान के आधार पर अपने सांस्कृतिक और मानव मूल्यों को सम्माहित करते हुए बना है। यदि हम इस विषय की गहनता से बात करें तो इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस, जापान, जर्मनी, अफ्रीका और फ्रांस का जो संविधान है उसके निर्माताओं ने पहले हमारे वेद, पुराण एवं मनुस्मृति जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों का अध्ययन करके अपना संविधान बनाया और वे कहे भी है की मनुस्मृति दुनिया की सबसे व्यवस्थित संविधान की आधार ग्रन्थ है क्योंकि उसमें समाज संचालन की उन सम्पूर्ण जानकारी को अलग अलग अध्याय में क्रमवार विस्तारित किया गया है। आज कल जिसे जो मन में आए वही करे ऐसे कही भी छूट नहीं है तो फिर सनातन संस्कृति के धर्मग्रंथों पर आए दिन हो रहे कुठाराघात से हम लोग क्यों मौन साधकर बैठे हैं। आज सनातन की एकजुटता अति आवश्यक है और उचित समय भी है। ऐसे अत्याचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करते हुए केन्द्र एवं राज्य सरकार को समाज को न्याय दिलाने का प्रयास करना चाहिए नहीं तो ऐसे जहर फैलाने वाले समाज को बरगलाने का कार्य करेंगे और ऐसे कृत्य पर समस्त विश्व उपहास उड़ाएगा।

इस अवसर पर रसिकपीठाधीश्वर जन्मेजयशरणदास जी महाराज, भक्तमाल पीठाधीश्वर श्री अवधेश दास जी महाराज, श्रीरसिककृष्ण, श्रीदिलीप तिवारी, श्रीमनोज मिश्र सहित अन्य गणमान्य विद्वान उपस्थित रहे।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1
Discussion

0 Comments

Join the conversation

Share your view on this story. Your email address will not be published.