उत्तराखंड

*श्रद्धा सेवा और भक्ति से पितरों को मिलता है मोक्ष: डॉ. दुर्गेश आचार्यमहाराज*

देवभूमि जे के न्यूज़, टिहरी_से_पवनेश_भट्ट_कि_रीपोर्ट

**उत्तराखंड, 07 अक्टूबर, 2025 शहीद स्मारक, बौराड़ी में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा अमृत महोत्सव के सातवें दिन कथा का मंच मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रसंगों से सजा। राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने देवी भागवत पुराण से सुकन्या और महर्षि च्यवन की प्रेरणादायी कथा सुनाते हुए भक्ति और पतिव्रता धर्म की अद्भुत शक्ति का वर्णन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि **श्रद्धा, सेवा और भक्ति** के माध्यम से ही पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

#सुकन्या_की_सेवा_और_प्रायश्चित_का_प्रसंग

कार्यक्रम में डॉ. आचार्य महाराज ने बताया कि कैसे राजा शर्यात की पुत्री सुकन्या ने अनजाने में महर्षि च्यवन की तपस्या भंग कर दी, जिससे राज्य पर संकट आ गया। अपनी गलती का प्रायश्चित करते हुए सुकन्या ने महर्षि की सेवा और भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। सुकन्या की अटूट सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि च्यवन ने उसे अपनी पत्नी बनाया। उनके समर्पण से प्रभावित देव वैद्य अश्विनी कुमारों ने महर्षि को फिर से युवा बना दिया। इसके प्रतिफल में च्यवन ऋषि ने अश्विनी कुमारों को सोमरस पान का अधिकार दिलवाया, जो पहले केवल प्रमुख देवताओं के लिए था।

डॉ. आचार्य महाराज ने कहा कि सुकन्या का जीवन स्त्री की निष्ठा, भक्ति और सेवा का आदर्श उदाहरण है, जो सिखाता है कि सच्चे मन से किया गया प्रायश्चित सबसे बड़े दोष को भी मिटा सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति मोक्ष प्राप्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जिसमें श्रवण, कीर्तन, स्मरण और सेवा जैसे अनेक प्रकार शामिल हैं ।

#त्रिशंकु_की_कथा_और_अधूरी_इच्छाओं_का_प्रतीक

कथा वाचन में उन्होंने राजा सत्यव्रत (त्रिशंकु) की कथा भी सुनाई — कैसे पिता के शापवश चांडाल बने सत्यव्रत को ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ से सशरीर स्वर्ग भेजने का प्रयास किया गया, पर इंद्र ने अस्वीकार कर दिया। अंततः विश्वामित्र ने त्रिशंकु स्वर्ग रचा, जहाँ त्रिशंकु उल्टे लटके रह गए। यह कथा अधूरी इच्छाओं और तपस्या की शक्ति का प्रतीक है। इस प्रसंग के माध्यम से कथा वाचक ने बताया कि सांसारिक मोह में न पड़कर ईश्वर भक्ति में मन लगाना चाहिए ।

#गौ_सेवा_के_लिए_आह्वान_और_सामूहिक_प्रार्थना

सातवें दिन की कथा में गंगा विश्व सद्भावना सेवा समिति के अध्यक्ष **राकेश राणा** ने भक्तों से गौमाता की रक्षा और सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाय केवल धर्म ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, कृषि और जीवन का आधार है। उन्होंने गायों की देखभाल, गौशालाओं की सहायता और पशु क्रूरता रोकने के लिए जनजागरण फैलाने का आग्रह किया।

कथा के समापन पर शहीदों और प्राकृतिक आपदाओं में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए विशेष प्रार्थना और यज्ञ का आयोजन किया गया। डॉ. आचार्य महाराज ने कहा कि समाज में व्याप्त विकृतियों और अंधकार को दूर करने का सबसे शक्तिशाली मार्ग यज्ञ और सामूहिक प्रार्थना है, जो न केवल आत्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और एकता का संचार भी करता है।

#मोक्ष_प्राप्ति_के_मार्ग

हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के अनेक मार्ग बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार मोक्ष तक पहुँचने के प्रमुख मार्ग इस प्रकार हैं:

* **भक्ति योग:** ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति और प्रेम का मार्ग ।
* **ज्ञान योग:** आत्मज्ञान और साक्षीभाव द्वारा विशुद्ध आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना ।
* **कर्म योग:** निष्काम कर्म और श्रेष्ठ आचरण का पालन करना, जैसा कि गीता में बताया गया है ।
* **ध्यान योग:** ध्यान के माध्यम से मन और शरीर की तंद्रा को तोड़कर साक्षीभाव में स्थित होना ।

इस अवसर पर गंगा विश्व सद्भावना समिति के अध्यक्ष राकेश राणा, संयोजक गोविंद सिंह पुंडीर, कोषाध्यक्ष महावीर उनियाल, बिशन सिंह रागढ़, नीलकंठ डिमरी, लक्ष्मण सिंह रावत, वीरेंद्र गुनसोला, ब्लॉक प्रमुख विजय गुनसोला, कुलदीप सिंह पवार, महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष आशा रावत, भाजपा नेत्री सुषमा उनियाल, ममता उनियाल, अनीता थपलियाल, दिनेश रमोला, जगदंबा प्रसाद पांडे, प्रताप पुंडी, राजेंद्र सिंह पुंडीर, राजेंद्र भट्ट, गणेश भट्ट, रोशन थपलियाल, कृष्णा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में जनमानस श्रोता उपस्थित रहे।

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देवभूमि jknews

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