उत्तराखंड

*सेम मुखेम में जंगली जानवरों का आतंकः सुअर और बंदरों ने तबाह की फसलें, किसानों का खेती से मोहभंग*

देवभूमि जे के, न्यूज़ पवनेश भट्ट बंदरों का उत्पातः- इसके अलावा, क्षेत्र के किसान बंदरों के उत्पात से भी परेशान हैं। बंदर न केवल धान, बल्कि सब्जियों और…

देवभूमि जे के, न्यूज़ पवनेश भट्ट

बंदरों का उत्पातः-

इसके अलावा, क्षेत्र के किसान बंदरों के उत्पात से भी परेशान हैं। बंदर न केवल धान, बल्कि सब्जियों और अन्य फसलों को भी नष्ट कर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से बंदरों और सुअरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

– किसानों की मांग:

क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि वह जंगली जानवरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए। किसान चाहते हैं कि उनकी फसलों को बचाने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएं, ताकि उनका खेती में विश्वास बना रहे और वे पलायन को मजबूर न हों। सेम मुखेम के युवा अब खेती बचाने के लिए पहरा देने को मजबूर हैं।

इस समस्या के तत्काल समाधान की जरूरत है, नहीं तो क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट होने का खतरा है।

सेम मुखेम। क्षेत्र के किसान इन दिनों जंगली जानवरों, खासकर सुअरों और बंदरों के आतंक से परेशान हैं। इन जानवरों ने धान समेत अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और उनका खेती से मोहभंग होने लगा है।

– सुअरों ने मचाई तबाही:

सेम मुखेम पंचायत के पोखरी और आस-पास के गांवों में जंगली सुअरों ने धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया है। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए उन्हें रातभर चौकीदारी करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद सुअरों ने बड़ी मात्रा में फसल नष्ट कर दी। एक तरफ जहां मौसम की मार झेलनी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों का आतंक किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।

-किसानों पर आर्थिक संकट:

खेती चौपट होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। सरकार द्वारा किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के दावों के उलट, किसान अब खेती से दूर होते जा रहे हैं। इस स्थिति ने पलायन को बढ़ावा दिया है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उन्हें ठीक से नहीं मिल पा रही हैं, ऊपर से जंगली जानवरों ने उनकी कमर तोड़ दी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस इलाके में लगभग 20 प्रतिशत खेत बंजर होने की कगार पर हैं।

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