उत्तराखंड

*ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य के परम साधक एवं नामजप के अथाह सागर थे मौनी जी महाराज – प्रो. सुधाकर मिश्र*


देव भूमि जे के न्यूज –

जम्मू /कठुआ- श्री श्री 1008 साकेतवासी श्री मौनी जी महाराज की 40 वीं पुण्यतिथि को देशभर में गुरुपूजन, हवन एवं भंडारा करवाकर मनाया गया। इस अवसर पर एक ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य मौनी जी महाराज के सन्दर्भ में इस विषय पर अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी अंतर्जाल के माध्यम से आयोजित की गई जिसमें गणमान्य लोगों ने अपने अपने विचार रखा। कार्यक्रम का आरम्भ वैदिक मंगलाचरण वेद विद्या मंदिर अम्बफला जम्मू के आचार्य दीपेन्द्र जी ने बटुकों के साथ किया, अनमोल उपाध्याय वृंदावन से शुक्ल यजुर्वेद का मंत्र पाठ किया,पौराणिक मंगलाचरण गोरखनाथ संस्कृत महाविद्यालय के दर्शन विभागाध्यक्ष न्यासी डॉ. प्रांगेश मिश्र ने किया।
कार्यक्रम की सम्पूर्ण योजना को बताते हुए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी व मंदिर एवं गुरुकुल योजना सेवा प्रमुख जम्मू कश्मीर प्रान्त डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने बताया कि आज देशभर में विभिन्न स्थानों पर श्री श्री 1008 साकेतवासी श्री मौनी जी महाराज की 40 वीं पुण्यतिथि को मनाया गया। आषाढ़ शुक्ल अष्टमी गुप्त नवरात्रि के महाष्टमी तिथि सन 1986 को महाराज जी साकेतवासी हो गया, तभी से वर्तमान समय में भी उनके शिष्यों, परिवारजनों एवं भक्तों द्वारा उनके पुण्यतिथि को विधिवत ढंग से मनाया जाता है। श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास द्वारा विगत कुछ वर्षों से एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित की जाती है जिसमें विश्व प्रसिद्ध विद्वानों एवं संतों का मार्गदर्शन मिलता है। न्यास द्वारा इस वर्ष अक्षय तृतीया के महापर्व पर काशी में श्री मौनी बाबा वेद विद्या अनुसन्धान गुरुकुलम् की स्थापना हेतु भूमि पूजन का कार्य भी सम्पन्न किया गया है जो कुछ दिन में समाज के विशेष सहयोग से बनना शुरू हो जायेगा। पुण्यतिथि को प्रातःकाल से ही गुरुपूजन, भगवत अर्चन, हवन एवं भंडारों के साथ जम्मू के वेद विद्यालयों में, सिवान मंदिरों, घरों में, लखनऊ के वेद विद्यालय में, काशी के महामृत्युंजय मंदिर में एवं महाराज जी की जन्मभूमि रत्तिछपरा बलिया में भी विधि विधान से मनाया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के दर्शन संकायाध्यक एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुधाकर मिश्र जी ने बताया कि ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य के परम साधक सन्त थे मौनी जी महाराज। उनका जीवन एक सद्गृहस्थ होते हुए भी सिद्ध सन्तों की कोटि में पहुंच गया था। उनके पावन पवित्र पुण्यतिथि के अवसर पर उनका स्मरण समाज को नित्य प्रेरणा स्त्रोत बनेगा।

कार्यक्रम में अपने अनुभव कथन को बताते हुए श्री श्री 108 श्री राघवदास जी महाराज ने कहा कि महाराज जी के साथ बीता हुआ एक एक पल हमारे जीवन को भगवान की भक्ति में जोड़ दिया उनकी कृपा से आज हम कुछ भक्ति भजन कर पा रहे हैं।
इस अवसर पर अपना अनुभव साझा करते हुए डॉ. शिव जी पाण्डेय ने बताया कि महाराज जी ने बिहार प्रान्त को जिस भक्ति भजन एवं श्रीसीताराम नाम जप का मार्ग दिया है वहीं मानव जीवन का आधार है और उसी सहारे भवपार भी होगा। उन्होंने महाराज जी के जीवनी पर आधारित एक कविता भी सुनाया जिससे सभी भावुक हो गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वामी डॉ. जगदीश्वरानन्द जी महाराज ने कहा कि सदा से समाज सुधार में सन्तों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सभी मठ मन्दिरों के केन्द्र में गुरुकुल रहा है और आज अधिक से अधिक संख्या में गुरुकुलों को संचालित करने की आवश्यकता है जिससे हमारा समाज संस्कारवान बना रहे।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से देश के विभिन्न प्रान्तों से श्रद्धालु भक्तगण गूगल मीट ऐप के माध्यम से जुए हुए थे उसमें बलिया से महाराज जी पूरा परिवार, पंडित अवध कुमार उपाध्याय, नीलम देवी, पंडित अंजनी उपाध्याय, श्यामा जी, नेहा, अजय तिवारी, जम्मू कश्मीर से अंजू रत्ता, रक्षित जी, अंजू बाला, महेन्द्र पॉल, सुनीति जी, दिल्ली से डॉ. राजेश्वरचार्य जी, डॉ. प्रशांत उपाध्याय, आशीष पाण्डेय, सौरभ उपाध्याय, मुकेश सिंह, काशी से सुनील मिश्र, मधुलता, सुधा, श्वेता, गणपति देव मिश्र, अनुग्रह उपाध्याय, मथुरा से अनमोल, गोरखपुर से डॉ. प्रांगेश मिश्र, नीरज उपाध्याय, प्रयागराज से सोनम, बिहार से सन्त राघव दास जी, शिव जी पाण्डेय, कुन्दन पाण्डेय, सूर्यदेव पाण्डेय, मनीष, उज्ज्वल, अनिल जी, पल्लवी जी सहित देश बाहर से आशा जी, मौतानी जी, मनु खजुरिया जी, श्रेया जी, महिमा जी के साथ अधिक संख्या में लोग जुड़े रहे।

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