*आज आपका राशिफल एवं प्रेरक प्रसंग- जीवन की धारा में सहजता*
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कलियुगाब्द…………………….5127
विक्रम संवत्……………………2082
शक संवत्………………………1947
मास……………………………..बैशाख
पक्ष………………………………..कृष्ण
तिथी………………………….त्रयोदशी
प्रातः 08.26 पर्यंत पश्चात चतुर्दशी
रवि…………………………..उत्तरायण
सूर्योदय ………….प्रातः 05.58.45 पर
सूर्यास्त………..संध्या 06.52.03 पर
सूर्य राशि………………………….मेष
चन्द्र राशि…………………………मीन
गुरु राशी…………………………वृषभ
नक्षत्र…………………..उत्तराभाद्रपद
प्रातः 05.34 पर्यंत पश्चात अश्विनी
योग………………………………वैधृति
प्रातः 08.32 पर्यंत पश्चात प्रीती
करण……………………………वणिज
प्रातः 08.26 पर्यंत पश्चात विष्टि
ऋतु…………………..(माधव) वसंत
दिन……………………………शनिवार
🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-*
26 अप्रैल सन 2025 ईस्वी ।
☸ शुभ अंक…………………….8
🔯 शुभ रंग…………………….नीला
⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-*
दोप 11.28 से 12.30 तक ।
👁🗨 *राहुकाल :-*
प्रात: 08.50 से 10.27 तक ।
🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -*
*मेष*
05:21:53 07:03:09
*वृषभ*
07:03:09 09:01:49
*मिथुन*
09:01:49 11:15:32
*कर्क*
11:15:32 13:31:42
*सिंह*
13:31:42 15:43:30
*कन्या*
15:43:30 17:54:10
*तुला*
17:54:10 20:08:48
*वृश्चिक*
20:08:48 22:24:58
*धनु*
22:24:58 24:30:34
*मकर*
24:30:34 26:17:40
*कुम्भ*
26:17:40 27:51:12
*मीन*
27:51:12 29:21:53
🚦 *दिशाशूल :-*
पूर्व दिशा – यदि आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें ।
✡ *चौघडिया :-*
प्रात: 07.12 से 08.49 तक शुभ
दोप. 12.03 से 01.40 तक चर
दोप. 01.40 से 03.17 तक लाभ
दोप. 03.17 से 04.54 तक अमृत
संध्या 06.31 से 07.54 तक लाभ
रात्रि 09.17 से 10.40 तक शुभ ।
💮 *आज का मंत्र :-*
।। ॐ आंजनेय नम: ।।
📢 *संस्कृत सुभाषितानि -*
*श्रीमद्भगवतगीता (एकादशोऽध्यायः – विश्वरूपदर्शनयोग:) -*
अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे ।
तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥११- ४५॥
अर्थात :
मैं पहले न देखे हुए आपके इस आश्चर्यमय रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूँ और मेरा मन भय से अति व्याकुल भी हो रहा है, इसलिए आप उस अपने चतुर्भुज विष्णु रूप को ही मुझे दिखलाइए। हे देवेश! हे जगन्निवास! प्रसन्न होइए॥45॥
🍃 *आरोग्यं सलाह :-*
*सफेद बालों के लिए नुस्खे :-*
– कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं । बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
– नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।
– तिल खाएं। इसका तेल भी बालों को काला करने में कारगर है।
– आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
– प्रतिदिन घी से सिर की मालिश करके भी बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
⚜ *आज का राशिफल :-*
🐏 *राशि फलादेश मेष :-*
*(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)*
नौकरी में कार्यभार रहेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। आय में निश्चितता रहेगी। एकाएक स्वास्थ्य खराब हो सकता है, लापरवाही न करें। दूर से दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। व्यर्थ दौड़धूप होगी। विवाद से स्वाभिमान को चोट पहूंच सकती है। काम में मन नहीं लगेगा। जोखिम न लें।
🐂 *राशि फलादेश वृष :-*
*(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
भाग्य का साथ मिलेगा। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। लाभ देगा। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि में जल्दबाजी न करें। लाभ होगा।
👫 *राशि फलादेश मिथुन :-*
*(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)*
फिजूलखर्ची ज्यादा होगी। शत्रु भय रहेगा। शारीरिक कष्ट से बाधा उत्पन्न होगी। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नए काम करने का मन बनेगा। दूर यात्रा की योजना बनेगी। व्यापार से लाभ होगा। नौकरी में चैन रहेगा। जोखिम न लें।
🦀 *राशि फलादेश कर्क :-*
*(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में अधिकार बढ़ने के योग हैं। कोई बड़ी समस्या का अंत हो सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। लेन-देन में सावधानी रखें।
🦁 *राशि फलादेश सिंह :-*
*(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
कोई बड़ा खर्च एकाएक सामने आएगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। कुसंगति से बचें। किसी व्यक्ति के काम की जवाबदारी न लें। स्वयं के काम पर ध्यान दें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार ठीक चलेगा। कार्यकुशलता कम होगी।
👩🦰 *राशि फलादेश कन्या :-*
*(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
घर के छोटे सदस्यों संबंधी चिंता रहेगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यापार मनोनुकूल रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। जल्दबाजी न करें।
⚖ *राशि फलादेश तुला :-*
नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। सुख के साधन जुटेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। धनहानि हो सकती है। सावधानी आवश्यक है। थकान महसूस होगी।
🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-*
*(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय सताएगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। किसी जानकार व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे।
🏹 *राशि फलादेश धनु :-*
*(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)*
स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद से क्लेश हो सकता है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। पार्टनरों से कहासुनी हो सकती है। भागदौड़ होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। लाभ के लिए प्रयास करें।
🐊 *राशि फलादेश मकर :-*
*(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)*
कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि अपमान हो। व्यापार-व्यवसाय अनुकूल रहेगा। निवेश सोच-समझकर करें। नौकरी में चैन रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा।
🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-*
*(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
नौकरी में अधिकार मिल सकते हैं। सुख के साधन जुटेंगे। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। स्वास्थ्य संबंधी चिंता बनी रहेगी। आशंका व कुशंका रहेगी। कार्य में बाधा संभव है। उत्साह बना रहेगा।
🐟 *राशि फलादेश मीन :-*
*(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
विवेक का प्रयोग करें। समस्याएं कम होंगी। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे।
☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।*
।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।।
🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩
*🪁जीवन की धारा में सहजता*
*समाज में कुछ ऐसे प्राणी है जिन्हें हर बात का श्रेय लेने की आदत है । ये लोग स्वयंभू कहलाते है अक्सर चेहरे पर एक नक़ली मुखौटा लगाये बड़ी अकड़ से चलते हुए ये साबित करने का प्रयास कि इस समाज को वो ही चल रहे है । वे जिस क्षेत्र में होते है उसके स्वयंभू बनने का प्रयास और एक नक़ली जीवन जीते हुए इस डर से जीवन व्यतीत करते है कि उनकी ये पदवी छिन न जाये।*
*गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था। पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे। एक पत्ता आड़ा गिरा और एक सीधा। जो आड़ा गिरा वह अड़ गया, कहने लगा – आज चाहे जो हो जाए मैं इस नदी को रोक कर ही रहूँगा।चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए मैं इसे आगे नहीं बढ़ने दूंगा।*
*वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा– रुक जा गंगा !! अब तू और आगे नहीं बढ़ सकती।मैं तुझे यहीं रोक दूंगा!पर नदी तो बढ़ती ही जा रही थी।उसे तो पता भी नहीं था कि कोई पत्ता उसे रोकने की कोशिश कर रहा है। पर पत्ते की तो जान पर बन आई थी।वो लगातार संघर्ष कर रहा था।नहीं जानता था कि बिना लड़े भी वहीँ पहुंचेगा, जहां लड़कर.. थककर.. हारकर पहुंचेगा !*
*पर अब और तब के बीच का समय उसकी पीड़ा का,उसके संताप का काल बन जाएगा।*
*वहीँ दूसरा पत्ता जो सीधा गिरा था,वह तो नदी के प्रवाह के साथ ही बड़े मजे से बहता चला जा रहा था। यह कहता हुआ कि – चल गंगा !! आज मैं तुझे तेरे गंतव्य तक पहुंचा के ही दम लूँगा।चाहे जो हो जाए मैं तेरे मार्ग में कोई अवरोध नहीं आने दूंगा।तुझे सागर तक पहुंचा ही दूंगा।*
*नदी को इस पत्ते का भी कुछ पता नहीं वह तो अपनी ही धुन में सागर की ओर बढ़ती जा रही थी। पर पत्ता तो आनंदित है,वह तो यही समझ रहा है ,कि वही नदी को अपने साथ बहाए ले जा रहा है।*
*आड़े पत्ते की तरह सीधा पत्ता भी नहीं जानता था कि चाहे वो नदी का साथ दे या नहीं,नदी तो वहीं पहुंचेगी जहाँ उसे पहुंचना है! पर अब और तब के बीच का समय उसके सुख का,उसके आनंद का काल बन जाएगा।जो पत्ता नदी से लड़ रहा है,उसे रोक रहा है,उसकी जीत का कोई उपाय संभव नहीं है।और जो पत्ता नदी को बहाए जा रहा है उसकी हार का कोई उपाय संभव नहीं है।*
*हमारा जीवन भी उस नदी के सामान है जिसमें सुख और दुःख की तेज़ धारायें बहती रहती हैं और जो कोई जीवन की इस धारा को आड़े पत्ते की तरह रोकने का प्रयास भी करता है,तो वह मूर्ख है*
*क्योंकि ना तो कभी जीवन किसी के लिये रुका है और ना ही रुक सकता है।*
*वह अज्ञान में है जो आड़े पत्ते की तरह जीवन की इस बहती नदी में सुख की धारा को ठहराने या दुःख की धारा को जल्दी बहाने की मूर्खता पूर्ण कोशिश करता है।*
*क्योंकि सुख की धारा जितने दिन बहनी है उतने दिन तक ही बहेगी। आप उसे बढ़ा नहीं सकते, और अगर आपके जीवन में दुःख का बहाव जितने समय तक के लिए आना है वो आ कर ही रहेगा, फिर क्यों आड़े पत्ते की तरह इसे रोकने की फ़िज़ूल मेहनत करना।*
*बल्कि जीवन में आने वाली हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में खुश हो कर जीवन की बहती धारा के साथ उस सीधे पत्ते की तरह ऐसे चलते जाओ,जैसे जीवन आपको नहीं बल्कि आप जीवन को चला रहे हो।सीधे पत्ते की तरह सुख और दुःख में समता और आनन्दित होकर जीवन की धारा में मौज से बहते जाएँ और जब जीवन में ऐसी सहजता से चलना सीख गए तो फिर सुख क्या ? और दुःख क्या ?*
*बनावटी जीवन से बचे ये बहुत ही दुख देता है आपको असली ज़िंदगी का आनंद नहीं लेने देता है ।जीवन के बहाव में ऐसे ना बहें कि थक कर हार भी जाएं और अंत तक जीवन आपके लिए एक पहेली बन जाये। बल्कि जीवन के बहाव में हँस कर ऐसे बहते जाएं की अंत तक आप जीवन के लिए पहेली बन जायें।सुख हमारी खुद की सम्पत्ति है।इसे बाहर नहीं अपने भीतर ही तलाशें। इससे आप सदैव खुश रहोगे..!!*
*इस कहानी से ओर भी कई बातें सीखने को मिलती है।…* 🙏🏻👇🏻
*इस कहानी से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:*
1. *जीवन के प्रवाह को स्वीकार करना*: *सुख और दुख जीवन के अभिन्न हिस्से हैं। इन्हें रोकने की कोशिश करना व्यर्थ है। जीवन की धारा को रोकने के बजाय उसके साथ सहजता से बहना चाहिए।*
2. *समता और धैर्य का महत्व*: *जो व्यक्ति जीवन की परिस्थितियों को सहजता और धैर्य के साथ स्वीकार करता है, वह आनंदित रहता है। संघर्ष करने से केवल पीड़ा और संताप ही मिलता है।*
3. *सच्चा सुख भीतर है*: *बाहरी दुनिया में सुख की तलाश करना व्यर्थ है। वास्तविक सुख हमारे भीतर ही है, इसे पहचानकर ही हम सच्चे आनंद का अनुभव कर सकते हैं।*
4. *स्वयंभू बनने से बचें*: *नकली मुखौटा लगाकर, दूसरों को प्रभावित करने का प्रयास करना केवल तनाव और पीड़ा लाता है। असली आनंद तभी मिलता है जब हम अपने सच्चे स्वभाव के साथ जीते हैं।*
5. *सुख-दुख का स्वभाव अस्थायी है*: *सुख और दुख, दोनों ही समय के साथ गुजर जाते हैं। इन्हें पकड़कर रखने या जल्दी भगाने की कोशिश में हम केवल अपनी शांति खो देते हैं।*
6. *जीवन को सरलता से लें*: *जीवन की धारा के साथ बहते हुए उसे पूरी तरह से जीना और अनुभव करना चाहिए। जब हम जीवन को सहजता से स्वीकार करते हैं, तब हम हर परिस्थिति में आनंदित रह सकते हैं।*
*इस कहानी का मुख्य संदेश है कि बनावटी जीवन से बचें, परिस्थितियों को स्वीकार करें और जीवन की धारा में सहजता और आनंद के साथ बहते जाएं।*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
