*कलिकाल का दिव्य याज्ञिक महाप्रयोग शत 100 गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ – स्वामी राघवाचार्य जी महाराज।*

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –

जम्मू/कठुआ – सनातन वैदिकधर्म की परम्परा में यथा समय भारतभूमि में ऋषियों द्वारा चराचर जगत के कल्याण हेतु बहुत से याज्ञिक महाप्रयोग होते रहे हैं। उसीक्रम में तीर्थगुरुपुष्कर राजस्थान में इस कलयुग का प्रथम शत 100 गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ हो रहा है जिसके प्रेरणा स्त्रोत परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज हैं। इस अवसर पर यज्ञ की वृहत् योजना पर प्रकाश डालते हुए जम्मू कश्मीर प्रान्त के गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख एवं श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. अभिषेक उपाध्याय ने बताया कि समस्त विश्व में शांति एवं वैश्विकस्तर पर आतंकवाद प्रवृत्ति के सर्वनाश के साथ ही सनातन वैदिकधर्म की स्थापना हो ऐसे कई समसामयिक महत्वपूर्ण विषयों को लेकर यज्ञ का शंखनाद हुआ उसके उपरान्त यह महायज्ञ दिनांक 08 मार्च 2026 को आरंभ होकर 19 अप्रैल 2026 पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होगा। मानव इतिहास में समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहे हैं जो केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सभ्यता के आत्मबोध, सामूहिक चेतना और वैश्विक दिशा को प्रभावित करने वाले होते हैं। प्रस्तुत “शत (100) गायत्रीपुरश्चरणमहायज्ञ” उसी श्रेणी का एक अद्वितीय, विराट और दिव्य आयोजन है, जो सनातन वैदिक परम्परा की गहन साधना, अनुशासन और सामूहिक ऊर्जा का वैश्विक समकालिक संकल्प के साथ शास्त्रीय विधि से होने वाला कलिकाल का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
इसी अवसर पर श्रीरामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट श्री अयोध्या धाम के अध्यक्ष जगतगुरु स्वामी श्रीराघवाचार्य जी महाराज ने बताया कि यह आयोजन केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक संगठित आध्यात्मिक प्रयोग है, जहाँ मंत्र, यज्ञ, साधना और संकल्प के माध्यम से मानवता के कल्याण, मानसिकशांति, नैतिकजागरण और वैश्विक समरसता की स्थापना को स्थापित करने का एक विहंगम प्रयास किया जा रहा है। सतयुग में इस पुष्करतीर्थ में महर्षि विश्वामित्र जी ने सृष्टि में आमूल चूल परिवर्तन हेतु शत 100 गायत्री पुरश्चरण जप किया था उन्हीं सभी महत्वपूर्ण शास्त्रीय तथ्यों को वेद एवं पद्मपुराण जैसे और भी प्रमाणिक ग्रन्थों में प्रमाण के रूप में ग्रहण करके काशी के विशिष्ट विद्वानों के साथ विचार विमर्श करके परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज द्वारा महाकुम्भ तीर्थराज प्रयागराज में इस अलौकिक दिव्य संकल्प को विश्वभर में चल रही विभीषिका से मुक्ति दिलाने हेतु एवं विश्वकल्याणार्थ इस महायज्ञ का याज्ञिक महाप्रयोग शास्त्रीय विधिविधान द्वारा करवाया जा रहा है। इस महायज्ञ की संरचना अत्यंत सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक और शास्त्रसम्मत है।
इस महायज्ञ के विषय में अपने प्रेरणादायक उद्बोधन देते हुए महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज ने बताया कि इसमें निम्नलिखित प्रमुख आयाम सम्मिलित हैं—दिनांक 08 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक कुल 2000 ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन 60 लाख जप किया जा रहा है और उसी हिसाब से उसके दशांश हवन, तर्पण एवं मार्जन के साथ त्रिकालिक संध्यानिष्ठ गायत्री पुरश्चरण करने वाले विप्रों को भोजन प्रसाद भी करवाया जा रहा है। शास्त्रानुसार संकल्पित कुल 27 करोड़ गायत्री मंत्र जप यह संख्या केवल परिमाण नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना की पराकाष्ठा है। इतने व्यापकस्तर पर मंत्र जप का सुव्यवस्थित और अनुशासित आयोजन वैश्विक स्तर पर अत्यंत दुर्लभ है।

इस विषय पर गंभीरता से प्रकाश डालते हुए सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व मीमांसा विभाग के निवर्तमान अध्यक्ष श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने कहा कि 2000 से अधिक ऋत्विजों की सहभागिता के साथ प्रशिक्षित वैदिक विद्वानों द्वारा निरंतर यज्ञीय क्रियाओं का संचालन, इस आयोजन को शास्त्रीय प्रामाणिकता और अनुशासन प्रदान करता है। 200 यज्ञ कुंडों में सतत यज्ञ यह एक साथ 200 कुंडों में आयोजन, इसकी भव्यता और सामूहिक ऊर्जा का सजीव प्रमाण है। 43 दिनों तक निरंतर चलने वाला यह अनुष्ठान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक साधना- श्रृंखला है, जिसमें निरंतरता, अनुशासन और आध्यात्मिक समर्पण का अद्वितीय समन्वय है।

इस विषय में अपना विचार प्रकट करते हुए श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट के सचिव माता चिदानंदमयी ने बताया कि यह आयोजन राजस्थान के पवित्र तीर्थ पुष्कर में स्थित शत(100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ पीठ मणिवेदिकापीठ में एक ओर पहाड़ी पर माता सावित्री तथा दूसरी ओर पहाड़ पर माता गायत्री जी का भव्य स्वरूप विराजमान हो रहा है उन्हीं के मध्य भव्य प्रांगण में यह महायज्ञ हो रहा है। पुष्कर, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में एक अद्वितीय स्थान रखता है, जहाँ ब्रह्मा जी का एकमात्र प्राचीन मंदिर स्थित है और जहाँ अनादिकाल से यज्ञ, तप और साधना की परंपरा प्रवाहित होती रही है। ऐसे पवित्र स्थल पर इस स्तर का आयोजन, उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाता है। इस महायज्ञ का संचालन एक सुदृढ़ , आध्यात्मिक और प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत किया जा रहा है। आयोजक संस्था शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ समिति के अंतर्गत सहयोगी संस्थाएँ विप्र फाउंडेशन एवं श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट के सहयोग के साथ समस्त विप्रों के विशेष सहयोग से किया जा रहा है।
इसी क्रम में अपने भाव को प्रकट करते हुए श्री योगेश दास जी महाराज श्री अयोध्या धाम ने कहा कि इस महायज्ञ को वैश्विकस्तर पर सफल बनाने हेतु कई प्रकार के धर्मशास्त्रीय नियमों का कड़ायी से पालन करना पड़ रहा है जिसमें प्रथम तो यह की गायत्री पुरश्चरण जप केवल ब्राह्मणों के धन से ही होता है और यहां भी इसी विधि से हो रहा है।

इस महायज्ञ के मुख्य यजमान प्रतिनिधि एवं सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के व्याकरण विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने बताया कि यह महायज्ञ त्रिकालिका संध्या गायत्री तर्पण करने वाले विश्वभर में रहने वाले समस्त विप्रों के धन आदि विशेष सहयोग से हो रहा है। आज तक ब्राह्मण अपने तपोबल एवं तेज को बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयोग करते रहें हैं लेकिन समस्त विश्व के कल्याण के संकल्प से स्वामी जी महाराज द्वारा शत 100 गायत्रीपुरश्चरणमहायज्ञ का कलिकाल में जो अकल्पनीय संकल्प किया गया यह वास्तव में सराहनीय कार्य है। यह समन्वय सुनिश्चित करता है कि आयोजन शास्त्रसम्मत, अनुशासित और वैश्विकस्तर पर प्रस्तुत करने योग्य हो। इस महायज्ञ के मुख्य आचार्य पण्डित सुनील दीक्षित जी ने कहा कि यह महायज्ञ केवल व्यक्तिगत साधना का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापक वैश्विकदृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है- मानवता में आंतरिक शांति और मानसिक संतुलन की स्थापना- आतंकवाद, हिंसा और नैतिक पतन के विरुद्ध आध्यात्मिक प्रतिरोध-
पर्यावरणीय शुद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार- “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को व्यवहारिक स्वरूप देना, सनातन धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता और समझ को इस आयोजन के माध्यम से निम्नलिखित दीर्घकालिक प्रभाव अपेक्षित हैं—भारत की आध्यात्मिक नेतृत्व क्षमता का वैश्विक पुनर्स्थापन, वैदिक यज्ञ परंपरा का वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पुनरुत्थान
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन में योगदान है, वैश्विक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का प्रसार है। अन्त में सभी से निवेदन करते हुए सनातन वैदिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि उत्थान समिति संस्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास की कार्यालय मंत्री अनुष्का भट्ट ने सभी सनातन वैदिकधर्म, संस्कृति एवं परम्परा में विश्वास रखने वाले श्रद्धालु भक्तों से प्रार्थना के साथ निवेदन करते हुए बताया कि यह महायज्ञ कालिकाल का प्रथम अलौकिक याज्ञिक महाप्रयोग है इसका दर्शन और यज्ञमण्डप की परिक्रमा करके आप अपने जीवन में बहुत कुछ परिवर्तन कर सकते है। इसीलिए इस पावन पवित्र तीर्थ पुष्कर में आकर इस यज्ञ दर्शन का लाभ लेकर अपना जीवन धन्य बनायें ।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 2 Static 3 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *