ऋषिकेशधर्म-कर्मशहर में खासस्वास्थ्य

जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरी बाबा ने यज्ञ हवन कर ,विश्व को कोरोनावायरस से मुक्ति के उपाय अपने आश्रम में किया!

देवभूमि जे के न्यूज ऋषिकेश!

कोरोना वायरस से बचने के लिए विशेष औषधियों से बनाई हवन सामग्री का प्रयोग करके जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरी बाबा ने यज्ञ हवन कर विश्व को कोरोनावायरस से मुक्ति के उपाय अपने आश्रम में किया!
इस अवसर पर यज्ञ और हवन के विषय में बताते हुए कहा कि अगर, तगर, जटामांसी, नीम पत्ती अथवा छाल, तुलसी, गिलोय, कालमेघ, भूमि आंवला, जायफल, जावित्री, आज्ञाघास, कड़वी बछ, नागरमोथा, सुगध बाला, लौंग, कपूर, कपूर तुलसी, देवदारु, शीतल चीनी, सफेद चंदन, दारुहल्दी। उपरोक्त सब सामग्री को समान मात्रा में मिला कर उपयोग कर अपने अपने घर में हवन किया जा सकता है। उपरोक्त सूची में से अधिकतम सामग्री आसानी से उपलब्ध है जिसका औषधियुक्त हवन सामग्री बनाने में उपयोग किया जा सकता है।
औषधीय हवन सामग्री जिसमें कपूर, गौघृत अवश्य होना चाहिए! मंत्रों में गायत्री एवं महामृत्युंजय मंत्र की आहुति अवश्य दी जाय। जो कि बिलकुल आसानी से सबको याद रहता है। यदि यह सामग्री न भी मिले तो सामान्य हवन सामग्री का प्रयोग करके भी हवन किया जा सकता है। इससे घर में कोरोनावायरस जैसे विषाणु नष्ट होंगे। रोग प्रतिरोधक क्षमताएं बढ़ेंगी एवं सकारात्मकता बढे़गी।हिंदू धर्म में कई सारी परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक है, यज्ञ और हवन। रामायण और महाभारत में भी यज्ञ और हवन का उल्लेख किया गया है। अग्नि के माध्यम से ईश्वर की उपासना करने की प्रक्रिया को हवन या यज्ञ कहते हैं। माना जाता है कि यह हमारे जीवन में सकारात्मकता लेकर आता है।
धर्म ग्रंथों के के अनुसार, यज्ञ और हवन कराने की परंपरा सनातन काल से चली आ रही है। हवन को आज भी उतना ही शुभ फलदायी माना जाता है जितना कि पहले। माना जाता है कि हवन, यज्ञ के बिना कोई भी पूजा, मंत्र जप पूर्ण नहीं हो सकता। सनातन काल से यज्ञ और हवन की परंपरा चली आ रही है।
हवन को हिंदू धर्म में शुद्धिकरण का एक कर्मकांड माना गया है। हवन के जरिए आसपास की दुष्ट आत्माओं के प्रभाव को खत्म किया जाता है। हवन कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता को हवि ( भोजन ) पहुंचाने की प्रक्रिया है।
कहा जाता है कि वायु को शुद्ध करने के लिए हवन, यज्ञ किया जाता है। स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए भी हवन किया जाता है। अग्नि में जब औषधीय गुणों वाली लकड़ियां और शुद्ध गाय का घी डालते हैं तो उसका प्रभाव सुख पहुंचाता है।
माना जाता है कि हवन के धुएं का वातावरण पर असर लंबे समय तक बना रहता है और इस अवधि में जहरीले कीटाणु नहीं पनप पाते। घर के द्वार में अगर वास्तु दोष है तो सूर्य के मंत्र के साथ हवन करना शुभ माना जाता है। महामंडलेश्वर ने कहा कि यज्ञ ,हवन से निश्चित रूप से फायदा होगा और विश्व का कल्याण होगा! कोरोनावायरस से मुक्ति मिलेगी।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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