ऋषिकेशधर्म-कर्मशहर में खास

राजस्थानी मिष्ठान भंडार एवं भोजनालय द्वारा 300जरुरतमंदो को भोजन दिया गया!

आगे भी भोजन प्रसाद की व्यवस्था जारी रहेगा!

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!
कोरोनावायरस पूरे विश्व में महामारी का रूप ले चुका है।
दुनिया के अनेकों देश इस महामारी से प्रभावित होकर अपने-अपने देशों में लॉकडाउन और कर्फ्यू लगा रखी है।
इस महामारी से भारत भी अछूता नहीं है, भारत में लगभग सभी राज्यों में लॉकडाउन लगा हुआ है , कुछ राज्यों में कर्फ्यु भी लगाया गया है। ऐसे में गरीब तबके के लोग ,दिहाड़ी मजदूर रोज कमाने खाने वालों को खाने-पीने की दिक्कत हो रही है। हालांकि सरकार ने व्यवस्था कर रखी है, लेकिन फिर भी कहीं कहीं खाने पीने की दिक्कत हो रही है। शासन प्रशासन प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था करने में लगा हुआ है इसके साथ ही सामाजिक सेवा में लगे लोग भी आगे आकर भूखे एवं जरूरतमंदों की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।

ऋषिकेश में राजस्थानी मिष्ठान भंडार एवं भोजनालय द्वारा भी प्रत्येक दिन लगभग 300 लोगों को भोजन की व्यवस्था विगत 1 सप्ताह से किया जा रहा है। लोगों को लॉकडाउन का पालन करते हुए एक निश्चित दूरी बना कर उन्हें खड़ा कर सभी को भोजन प्रदान किया जा रहा है।

क्योंकि अन्नदान सबसे बड़ा दान है, हमारे शास्त्रों के अनुसार दुनिया का सबसे बड़ा दान अगर कुछ है तो वह है अन्नदान। यह संसार अन्न से ही बना है और अन्न की सहायता से ही इसकी शरीर की रचनाओं का पालन हो रहा है। अन्न एकमात्र ऐसी वस्तु है जिससे शरीर के साथ-साथ आत्मा भी तृप्त होती है।
एक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव, ब्राह्मण का रूप धारण कर पृथ्वी पर विचरण कर रहे थे। उन्होंने एक वृद्ध विधवा स्त्री से अन्नदान मांग की,लेकिन उसने कहा कि वह अभी दान नहीं दे सकती, क्योंकि वह अभी उपले बना रही है। जब उस ब्राह्मण ने हठ किया तो उस स्त्री ने गोबर उठाकर ब्राह्मण को उनके भिक्षापात्र में डाल दिया। जब वह स्त्री परलोक पहुंची तो भोजन मांगने पर उसे खाने के लिए गोबर ही मिला। जब उसने पूछा कि गोबर क्यों दिया गया है तो जवाब में उसे यही सुनने को मिला कि उसने भी यही दान में दिया था। इस तरह से अन्नदान के महत्व को समझा जा सकता है और यह जाना जा सकता है कि यह अन्न किस तरह जीवन और मृत्यु पर्यंत हमारी आत्मा की संतुष्टि के लिए आवश्यक है। आज के परिप्रेक्ष्य में हमसभी को चाहिए कि इस चूनौतीपूर्ण समय में जिससे जितना बन पड़े जरूरतमंदों को अन्नदाता के रूप में आकार भोजन प्रदान कर उनकी भूख को मिटाने का प्रयास कर इस महामारी को निपटने में अपना योगदान प्रदान करें!
आज भोजन प्रसाद बांटने वालों में राजस्थानी भोजनालय एवं मिष्टान भंडार की टीम में राजेन्द्र कुमार शर्मा, पुरोहितजी, शंकर लाल, रामसिंह ने सहयोग किया!

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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