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कोरोनावायरस चालीसा*!

*कोरोनावायरस* *चालीसा!
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निश्चित होकर अपने घर में, विराजिए श्रीमान !
अपना व परिवार का, सुरक्षित कीजिए प्रान!
कोरोनावायरस ,है महामारी,
त्राहि-त्राहि करे दुनियां सारी
चीन देश के, बुहान से आया!
धरती के कोने कोने में , समाया!
कोरोनावायरस है, जानलेवा!
घर पर रहकर, करें राष्ट्र की सेवा!
बड़े-बड़े देशों में मचाया, कोहराम ।।
हेलो हाय छोड़ ,सब कर रहें है प्रणाम ।।
एक सौ एकतालिस देशों में समाया ।।
बहुत लोगों को, इस ने खाया।।
नेता, मंत्री, नायक, खलनायक।।
बच्चें, बूढ़े, जवान और गायक।।
पशु, पक्षी, सब जीव, बेहाल।।
चीन ने चली ऐसी , कुटील चाल।।
कोरोनावायरस ने मचाया ऐसा हाहाकार।।
सारा विश्व हुआ , है लाचार।।
हमें बचा लो हे! त्रिपुरारी।।
सिर झुकाते हैं हम नर -नारी ।।
स्पेन, अमेरिका, इटली, भारत ,नेपाल।।
सब देशों का है ,बुरा हाल।।
ब्रिटेन, फ्रांस, हंगरी और ईरान।।
सब के सब है, देश परेशान।।
कोरोनावायरस कि नहीं दवाई ।।
बचना है तो, घर पर रहो मेरे भाई।।
समाजिक दूरी का करो तुम पालन।।
बार-बार कहे, शासन – प्रशासन ।।
कहे पुलिस सुनो भारत के लाल।।
निकले बाहर तो कर देंगे बेहाल।।
विश्वपर ये कैसा संकट गहराया।।
कौन जाने किसकी है माया।।
विदेशी रास्ते से भारत में आया।।
जग के कोने-कोने में आफत है मचाया।।
चीन ने किया मानवता से विश्वासघात।।
सब मिल मारो उसको लात।।
बुहान को बनाया, उसने अत्याचारी।।
पृथ्वी पर फैलाया भयंकर बीमारी।।
घर बैठे ये आफत आई।।
सभी दिशा में आग लगाई।।
देश बचाने के लिए मोदी जी ने किया लॉकडाउन।।
गली- मोहल्ला गांव और टाउन।।
घर पर रहो मानो तुम कहना, बंद करो तुम मोटरकार।।
बार-बार कहती है, भारत सरकार ।।
डॉक्टर, नर्स, मीडिया, सेवक, स्वच्छकार ।।
सब की सेवा में लगे हैं, जो है लाचार।।
देश में दुश्मनों की है, भरमार।।
देश का करना को करना चाहते हैं बीमार।।
अपने गृह में रह, करो सबकी रक्षा।।
कोरोना से बचने का तरीका अच्छा।।
अपने आप करो, रखवारी।।
चुक जरा -सी पड़ेगी भारी।।
घर से निकलो ना तुम
बना कर टोली।।
जानलेवा बीमारी है,करो ना तुम हंसी ठिठोली।।
हे हनुमान संजीवनी लाओ।।
कोरोनावायरस से, हमें बचाओ।।
फूकों करोना की तुम लंका।।
स्वास्थ्य- समृद्धि का बजे, भारत में डंका।।
जय रघुनंदन, जय घनश्याम।।
विपदा आन पड़ी, हे सीताराम।।
धनुष -बाण हे राम उठाओ।।
कोरोनावायरस का नाम, मिटाओ।।
चक्र उठाओ, हे गिरधारी।।
त्रस्त है विश्व की, जनता सारी।।
हरो पीड़ा , मिटाओ संताप।।
कोरोनावायरस का, मिटाओ ताप।।
जब -जब धरा पर संकट आई ।।
सब की रक्षा किये रघुराई।।
जय दुर्गा ,जय हे महारानी।।
जय महाकाली, हे जगजननी।।
रक्तबीज राक्षस का जैसे किया संहार।।
वैसे ही कोरोनावायरस को हे! माता तुम दो मार।।
दिन -रात हम तुम्हें गोहरावत।।
पूर्व की भांति रहे जग यथावत ।।
हंसी- खुशी तुम करो बहाल।।
फिर से सुंदर हो सब का हाल।।
कहे “जय” हाथ जोड़ करें विनती बारंबार।।
कोरोनावायरस रूपी राक्षस से शीघ्र हो मुक्त संसार।।
– जयकुमार तिवारी की कलम से*!

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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