ऋषिकेशशहर में खासस्वास्थ्य

कोरोना वायरस से घबराए नहीं- डॉ डीके श्रीवास्तव!

स्वक्षता, सतर्कता ,संयम, सजगता एवं सुरक्षा से करें मुकाबला।

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!
वायरस को विषाणु का नाम दिया गया है। कारण यह मानव देह में प्रवेश करने के बाद यह किसी भी अन्य खतरनाक विष की तरह तीव्र गति से बढ़ता है, फैलता है , विकार और उपद्रव पैदा करता है। और कभी-कभी मृत्यु का कारण भी बनता है।
कोरोनावायरस होने पर रोगी को आमतौर पर बुखार, थकावट,
पूरे शरीर में दर्द, सिरदर्द जुकाम, नाक का बहना, गले में दर्द ,भूख में कमी, सुखी खासी, सांस लेने में कष्ट इत्यादि होती है। अत्यधिक गंभीर इन्फेक्शन होनेअथवा रोगी की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर तीव्र श्वासअवरोध, किडनी फैलियर या मृत्यु भी संभव है।
कोरोना वायरस नमी एवं ठंडे स्थानों पर अधिक सक्रिय हैं, इससे बचें। भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें। संक्रमित रोगियों से दूरी बनाएं,
बृद्ध, बीमार ,कमजोर एवं बच्चों सहित जिनको अन्य रोग हो उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
कोरोना वायरस(कोविड- 19)भूखे व्यक्तियों पर अधिक प्रभावी रहता है इसलिए पेट भर खाएं। जो भी खाएं अच्छी तरह साफ करके , धोकर और पका कर खाएं।
नींबू पानी जूस एवं तरल पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।
हाथों को अच्छी तरह से बार बार धोएं अच्छे मास्क n95 एवं अच्छे सैनिटाइजर का प्रयोग करें। यदि सैनिटाइजर की अनुप्लब्धिता होती है तो फिर फिटकरी सेंधा नमक के पानी से हाथ धोए, नहाए आवश्यकता पड़ने पर गारगिल करें।
तुलसी ,गिलोय ,पिपली काली मिर्च ,अदरक एवं बिल्वपत्र का अत्यधिक सेवन करें इस समय चवनप्राश जैसे रसायनों की उपयोगिता अति महत्वपूर्ण है।
आम की लकड़ी गूगल कपूर को गोघृत ,चंदन एवं अन्य जड़ी बूटियों से प्रतिदिन दो बार हवन करें। इससे वातावरण संक्रमित होने से बचा रहेगा, स्वक्षता भी आपकी सुरक्षा है।
बार बार नाक में छूने की आदत को बंद करना चाहिए तथा अन्य को भी मना करें।
संक्रमित व्यक्ति को 14 दिन के आइसोलेशन की अत्यंत आवश्यकता रहती है।
*बचाव व चिकित्सा-
प्रतिदिन दो बार नस्य करें (नाको में तेल डालें) इसके लिए अणु तेल, षडबिंदु तेल या सरसों का तेल प्रयोग कर सकते हैं।
पूरे शरीर पर अभ्यंग (तेल का मालिश) करें।
चिकित्सकीय उपक्रम में। गिलोय 8 इंच तना, तुलसी के 20 पत्र, जंगली जीरा 2 ग्राम, ज्वर रोध 2 ग्राम
सेहुड (स्नूहि)के पांच पत्ते , काली मिर्च दस दाने, हल्दी 2 ग्राम। सभी को कूटकर 200ml पानी में रात्रि में भिगो दें। प्रातः छानकर 2 घंटे के अंतराल में सेवन करें।
आयुर्वेद चिकित्सा में विषाणु संक्रमण कोरोना जैसे वायरस की सामान्य चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख में लेकर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस चिकित्सा के चार चरण होते हैं।

1.वायरस का नाश ,2.रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बलवान बनाना। 3.रोगी को होने वाली तकलीफ को दूर करना।
4. स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमण से बचाना।

इस प्रकार आप इस महामारी से अपना बचाव कर सकते हैं!

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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