ऋषिकेशदेहरादूनशहर में खासस्वास्थ्य

यज्ञ- हवन करने से घर में आती हैं सुख -शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य-महामंडलेश्वर डॉक्टर रामेश्वरदास “वैष्णव”

कोरोनावायरस जैसी महामारी की खात्मे के लिए मायाकुंड में यज्ञ ,हवन का आयोजन!

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश!
इतिहास ,वेद -पुराण- धर्म ग्रंथ साक्षी है कि जब भी विश्व ,देश -समाज पर कोई संकट, कोई विपत्ति आई! तब तक देश समाज और विश्व की रक्षा के लिए संत समाज आगे आए और अपनी तपस्या, अपनी सिद्धि और अपने विवेक से उस विपत्ति के लिए उपाय किया।
आज करोनावायरस विश्वव्यापी महामारी का रूप ले चुका है! करोना वायरस से सारी दुनिया त्रस्त है। और इस समस्या से सारा विश्व समुदाय चिंतित है बड़े बड़े शक्तिशाली देश लाचार है! भारत के संतों द्वारा भी इस महामारी की समाप्ति के लिए अनेक उपाय किए जा रहे हैं, इसी परिपेक्ष्य में हनुमान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. रामेश्वरदास वैष्णव ने मायाकुंड स्थित अपने आश्रम में हवन -यज्ञ -तप पूजा-पाठ के द्वारा कोरोनावायरस जैसी महामारी के लिए यज्ञ -हवन किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर ने विस्तार से बताया की हवन एक ऐसी विद्या है, यज्ञ एक ऐसी विद्या है, जिससे किसी प्रकार की महामारी को रोका जा सकता है। विरक्त वैष्णव मंडल संत समिति आह्वान करती है कि सभी संतों, महंतों,को चाहिए कि अपने अपने स्तर से कोरोनावायरस रूपी राक्षस की समाप्ति के लिए वैदिक रीति से यज्ञ हवन करें! क्योंकि वैज्ञानिक भी आज के युग में इस बात को स्वीकार करते हैं कि हवन के धूएं में किटाणुओं को समाप्त करने की अद्भुत क्षमता है।
यज्ञ में जो आहुति डाली जाती है उनमें अनेकों औषधियां होती है और उनमें प्रमुख रूप से तिल, जौं, सफेद चन्दन का चूरा , अगर , तगर , गुग्गुल, जायफल, दालचीनी, पानड़ी , लौंग , बड़ी इलायची , गोला, छुहारे नागर मौथा , इन्द्र जौ , कपूर कचरी , आँवला ,गिलोय, तुलसी पत्र,जायफल, ब्राह्मी आदि होती है!
इसके साथ ही अग्नि प्रज्वलित करने के लिए आम लकड़ी आम की लकड़ी सर्वथा उपयोगी होता है गाय के उपले और आम की लकड़ी पर यदि इन औषधियों का विधिवत हवन किया जाए तो निश्चित रूप से महामारी से निजात मिलने की पूरी तरह से संभावना होती है।
यज्ञ हवन करने से घर में आती हैं सुख शांति, समृद्धि और मिलता हैं, उत्तम स्वास्थ्य घर का वातावतरण शुद्ध करने के साथ, हर मनोकामना पूरी करता है ।

हिन्दू धर्म में की जाने वाली पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है । जिस प्रकार नवरात्रों में नौ देवियों के पूजन को अनिवार्य माना गया है उसी प्रकार हवन यज्ञ को भी हर पूजा कार्य में अनिवार्य माना गया है । हवन जिससे आमतौर पर यज्ञ के नाम से भी जानते है, के बारे में शास्त्रों में कहा गया हैं कि घर परिवार और वातावरण की शुद्धिकरण करने के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण कर्मकांड है यज्ञ।हवन के दौरान कुंड में अग्नि के माध्यम से देवताओं को अपनी इच्छा और कामना बताई जाती है । कुंड में अग्नि के द्वारा देवता तक हवि पहुँचाने की प्रक्रिया को भी यज्ञ कहते है । हवि वह पदार्थ है जिसकी हवन के दौरान अग्नि में आहुति दी जाती है । मान्यता है की अगर घर में या आपके आस पास किसी तरह की नेगेटिव एनर्जी या बुरी आत्मा का साया होता है तो यज्ञ प्रभाव से दूर हो जाता है ।वेदों में कहा गया हैं कि घर की सुख शांति, स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना के लिए हवन करना हिन्दू धर्म में प्रमुख कर्म माना जाता हैं । लेकिन आज भी कुछ लोगों को इस धार्मिक कर्मकांड के फायदों के बारे में पता ही नहीं होता, इसलिए वें अपनी परेशानियों से जूझते रहते है
आस्था के साथ हमें वैज्ञानिक कारणों की भी जानकारी अवश्य होना चाहिए ।
हवन करने का एक वैज्ञानिक कारण भी हैं । एक रिसर्च में पता चला है की हवन में अधिकतर आम की लकड़ियों का ही प्रयोग किया जाता हैं, और जब आम की लकड़ियों को जलाया जाता है तो उनमें से एक लाभकारी गैस उत्पन्न होती है जिससे वातावरण में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणु खत्म हो जाते हैं । इसके साथ हीआसपास का वातावरण भी शुद्ध होता हैं, और अगर अग्नि में गुड़ को भी जलाया जाता हैं तो भी यह गैस उत्पन्न होती है ।
यदि आधे घंटे तक हवन में बैठा जाये और हवन के धुएं का शरीर से सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे जानलेवा रोग फैलाने वाले जीवाणु खत्म हो जाते है और शरीर शुद्ध हो जाता है ।
धार्मिक मान्यता के अनुसार घर में किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति होने पर हवन करने से घर में सकारात्मक शक्तियां आती है, और घर का वातावरण भी शुद्ध होता हैं ।
हवन में प्रयोग की जाने वाली सामग्रियों का बहुत अधिक महत्व होता है, जब उनकी आहुति दी जाती है तो वें सुक्ष्म से सुक्ष्म विषाणुओं का नाश करने के काम करती हैं ।
हवन के धुएं के सम्पर्क में रहने से व्यक्ति के मस्तिष्क, फेफड़ें और श्वास सम्बन्धी समस्याएं भी नष्ट हो जाती है, जिसकी मदद से श्वसन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करने लगता है । साथ ही हवन के धुएं और अग्नि के ताप से शरीर की थकान और मन की अशांति भी दूर हो जाती है!
नवग्रहों के लिए शास्त्रों में समिधा का वर्णन है!
सूर्य की समिधा मदार की, चन्द्रमा की पलाश की, मंगल की खैर की, बुध की चिड़चिडा की, बृहस्पति की पीपल की, शुक्र की गूलर की, शनि की शमी की, राहु दूर्वा की और केतु की कुशा की समिधा कही गई है।
मदार की समिधा रोग को नाश करती है, पलाश की लड़की सब कार्य सिद्ध करने वाली, पीपल की लकड़ी प्रजा (सन्तति) काम कराने वाली, गूलर की लकड़ी स्वर्ग देने वाली, शमी की लकड़ी पाप नाश करने वाली, दूर्वा की दीर्घायु देने वाली और कुशा की समिधा सभी मनोरथ को सिद्ध करने वाली होती है।
महामंडलेश्वर ने बताया कि अभी मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर आम जनमानस के लिए 31 मार्च तक बंद है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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