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अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के पश्चात ‘राष्ट्रीय योग महोत्सव’ का आयोजन!

31 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 76 देश, भारत के 20 राज्य और 1551 योग जिज्ञासुओं की भागीदारी!

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!
परमार्थ में जलायी उपलों की होली
एक मन, नेक मन से होली खेलें!
होली आनन्द, उल्लास, उमंग और तरंग का पर्व
चार धाम यात्रा के अवसर पर किया जायेगा ‘राष्ट्रीय योग महोत्सव’ का आयोजन
31 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 76 देश, भारत के 20 राज्य और 1551 योग जिज्ञासुओं की भागीदारी31 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के सफलतापूर्वक समापन पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अधिकारियों, एम्स और अपोलो के चिकित्सक दल, पुलिस, प्रशासन और पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद दिया
ऋषिकेश, 9 मार्च। परमार्थ निकेतन में अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के सफलतापूर्वक समापन पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अधिकारियों, एम्स और अपोलो के चिकित्सक दल, पुलिस, प्रशासन और पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद दिया। इसी परिपेक्ष्य में परमार्थ निकेतन में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि प्रभु की कृपा और सभी के सहयोग से अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इसमें विश्व के 76 देशों के साथ भारत के 20 राज्यों के 1551 योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया। हमारा प्रयास है कि अक्टूबर और नवम्बर माह में चार धाम यात्रा के अवसर पर ‘राष्ट्रीय योग महोत्सव’ का आयोजन किया जाये जिसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभाशाली योगाचार्यों को अवसर प्राप्त होगा। साथ ही इससे उत्तराखंड के पर्यटन में भी वृद्धि होगी और सभी को चारों धामों के दर्शन होंगे, जिससे यहां का व्यापार, प्यार और संस्कार बढ़ेगा। योग प्रेमी योग की धरती से सहयोग करने का संकल्प लेकर जायेंगे।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के माध्यम से हमने सभी को महाकुम्भ हरिद्वार में पधारने हेतु आमंत्रित किया है। कुम्भ के प्रचार-प्रसार के लिये कुम्भ का स्टाल लगाया गया था जिसके माध्यम से लोगों को कुम्भ में सहभाग हेतु पेे्रेरित किया गया। 32 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव महाकुम्भ को समर्पित होगा।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 76 देशों से आये योग जिज्ञासु यहां के वातावरण, अध्यात्म और कक्षाओं से अत्यंत प्रभावित होकर अद्भुत अनुभव लेेकर जा रहे है। इस बार हमने योग और ध्यान की कक्षाओ के साथ अध्यात्म और आध्यात्मिक चर्चाओं को विशेष स्थान दिया था उसके सुखद परिणाम हमें प्राप्त हुये।
आगामी अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में ईको फ्रेंडली बैंग का उपयोग किया जायेगा ताकि लोगों को और पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। साथ ही हम आयुर्वेद, नाड़ी परिक्षण की कक्षाओं का भी आयोजन करेंगे। इस वर्ष भी हमने कुछ कक्षाओं का आयोजन किया था जिससें लोग बहुत प्रभावित हुये।
स्वामी जी ने कहा कि करोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि सुरक्षित उपाय करने की जरूरत है। गर्म पानी में उबालकर अद्रक, इलायची, दालचीनी, गिलोय, तुलसी और नीम की पत्तियों का पानी सुबह पीना, हाथ साफ करना और प्राणायाम बहुत जरूरी है।
स्वामी जी ने कहा कि हमे सांस चाहिये तो पेड़ लगाना और उनकी सुरक्षा करनी होगी, मास्क पहनने से काम नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल उत्तराखण्ड के साथ हमारी चर्चा हुई है कि जितने भी विश्वविद्यालय है वहां पर वृक्षारोपण किया जाये साथ ही जो भी पार्क खाली पड़े हंै वहां पर भी शहीदों और देशभक्तों की स्मृति में पौधे लगाने हेतु योजना बनायी जा रही है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियों को होली की शुभकामनायें देते हुये कहा कि सभी हमारे जवानों के लिये प्रार्थना करें की वे सुरक्षित रहंे और देश की सेवा करते रहें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियोें से आह्वान किया कि नशामुक्त होली मनायें तथा जातपात से मुक्त समाज बनाने में सहयोग प्रदान करें। होली के रंग यही संदेश देते हंै कि भेदभाव, जातिपाति, ऊँच-नीच, जातिवाद, नक्सलवाद, सम्प्रदायवाद, भेदभाव, भष्ट्राचार की दीवारों को तोड़ते हुये सभी देश प्रेम के रंगों में रंग जाये। रंग खेलते समय हम ऊँच-नीच और छोटे -बड़े का बन्धन तथा सारे मद्भेद भूल जाते हंैं। तोड़ देते है सारी नफरत की दीवारों को। ऐसे ही जीवन के रंग मंच पर भी हम सभी भेदभावों को भुलाकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जिसमें समरसता हो, सद्भाव हो, प्रेम हो, शान्ति हो, और बन्धुत्व हो, आत्मीयता हो। स्वामी जी महाराज ने कहा कि एक मन, नेक मन से होली खेलें। होली आनन्द, उल्लास, उमंग और तरंग का पर्व है। इसके मर्म को आत्मसात कर जीवन में आगे बढ़ेंगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने होली के अवसर पर जल संरक्षण और पौधांे के रोपण हेतु सभी को प्रेरित किया। उन्होने कहा कि होलिका दहन हेतु अनेक पेड़ों को काटा जाता है वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण इतना बढ़ रहा है। अतः होलिका दहन के लिये गोबर के उपलों का प्रयोग करें ताकि पेड़ों का संरक्षण हो और लकड़ियों के जलने से जो वृ़क्ष कटते हैं उससे काफी बड़ी क्षति होती है वो भी कम हो सकेगी।
सांयकाल परमार्थ निकेतन परिसर में गाय के गोबर से बने उपलों की होली का दहन किया गया। आज पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्वामी जी महाराज ने ध्यान कराया साथ ही विदेशी साधकों को होली का महत्व बताया।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि हमने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आयी सभी योग जिज्ञासुओं को हरिद्वार महाकुम्भ में सहभाग हेतु आमंत्रित किया है ताकि कुम्भ के माध्यम से लोग अध्यात्म के साथ स्वच्छता, पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण का संदेश लेकर जाये।
आज की गंगा आरती में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने नशामुक्त होली मनाने का संकल्प कराया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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