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क्या भारत बन पायेगा सोन चिरैया? कौन है रास्ते का रोड़ा!

सोनभद्र में तीन हजार टन मिले सोने पर जहरीले सांपों का पहरा!

देवभूमि जे के न्यूज़!
सोनभद्र (उत्तरप्रदेश)। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सोने की खदान मिली है। इस खदान में 3 हजार टन सोने का भंडार मिला है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) को सोनभद्र में सोन पहाड़ी और हरदी इलाकों में टीले के नीचे लगभग 3 हजार टन सोना मिला है। ये सोना भारत के पास मौजूदा स्वर्ण भंडार से करीब 5 गुना ज्यादा है। लेकिन अब इन पहाड़ियों को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है कि विंध्य की इन पहाड़ियों में दुनिया के बेहद जहरीले माने जाने वाले सांपों का डेरा है। यानि कहा जा सकता है कि ये जहरीले सांप ही अब तक सोने की इन खदानों की रक्षा करते रहे हैं।
सोनभद्र के सोन पहाड़ी क्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा सर्वेक्षण के दौरान पता चला कि इस पूरे इलाके जहरीले सांपों का डेरा। सोनभद्र जिले के जुगल थाना क्षेत्र के सोन पहाड़ी के साथी दक्षिणांचल के दुद्धी तहसील के महोली विंढमगंज चोपन ब्लाक में काफी संख्या में सांप मौजद हैं। इनमें रसेल वाइपर, कोबरा और करैत प्रजाति के सांपों के अलावा कई अन्य प्रजातियों के सांप शामिल हैं। ये सांप दुनिया में बेहद जहरीले माने जाते हैं। ये सांप इतने जहरीले हैं कि यदि ये किसी को काट ले तो उसका बचना संभव नहीं है।
यहां बड़ी संख्या में रसेल वाइपर की काफी ज्यादा है। पूरे प्रदेश में केवल इसी इलाके में ये जहरीले सांप मिलते हैं। इसके अलावा कोबरा और करैत प्रजाति के जहरीले सांप भी इसी इलाके में पहाड़ियों के आस-पास हैं। यहां बड़ी संख्या में इन सांपों का डेरा है। इसी कारण यहां कोई आता-जाता नहीं है। अब जब इन पहाड़ियों में सोने की खदान निकली है तो खनन अधिकारी-कर्मचारियों के लिए इन सांपों से निपटना बड़ी चुनौती होगी।
सांप विशेषज्ञों के मुताबिक रसेल वाइपर और कोबरा दुनिया के बेहद जहरीले सांपों में से हैं। रसेल वाइपर का जहर हीमोटॉक्सिन होता है जिससे प्रभावित का खून जम जाता है। जब ये सांप काटता है तो पूरी ताकत से सारा जहर दूसरे के शरीर में डाल देता है.. साथ ही अपने नुकीले दांतों से मनुष्य के शरीर में बड़ा घाव भी कर देता है। इससे मनुष्य की कुछ ही देर में मौत हो जाती है।
वहीं कोबरा और करैत के जहर न्यूरोटॉक्सिन होते हैं। इससे मनुष्य का स्नायु तंत्र शून्य हो जाता है। कोबरा के काटे स्थान पर सूजन हो जाती है और इसका जहर भी काफी तेजी से फैलता है। वहीं करैत का दंश काफी छोटा होता है। वो बेहद नुकीले दांतों से काटते हुए अपना जहर मनुष्य के शरीर में डालता है। कई बार तो इसके डसने का स्थान ठीक से दिखाई भी नहीं देता।
फिलहाल बता दें कि सोनभद्र में सोने के भंडार मिलने के बाद फिलहाल जियो टैगिंग का काम जारी है और जल्द ही ई टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। उधर वन्य जीव विहार क्षेत्र होने के कारण अब खनन की अनुमति देने का निर्णय केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय देगा।
ऑस्ट्रेलिया में एक बार वन्य जीव विहार क्षेत्र में कोयले की खदान मिली थी, लेकिन वहां दुर्लभ प्राजति के सांपों के अस्तित्व को देखते हुए खदान खनन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। तब माना गया कि खनन से यहां मौजूद दुर्लभ प्रजति के सापों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
बता दें कि सोने का भंडार होने के कारण सरकार तमाम जरूरी प्रक्रियाओं से गुजर रही है। खदानों को लीज पर देने से पहले भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा खदान वाले इलाके का हेलिकॉप्टर द्वारा हवाई सर्वेक्षण कराया जा रहा है।

सोनभद्र में सोने की खान!

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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