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हरिद्वार में पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह सिसोदिया का अस्थि विसर्जन!

पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह सिसोदिया का नीलनदी धारा, रामेश्वर घाट हरिद्वार पर अस्थि विसर्जन!
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देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई हैं। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली हैं और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी हैं। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। गंगा नदी इतनी पवित्र हैं की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थियों को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में मोदी नगर से तीन बार पूर्व में विधायक नरेंद्र सिंह सिसोदिया का हृदय गति रुकने से देहवासन हो गया था।
आज अस्थि विसर्जन के लिए उनके पुत्र दुष्यंत सिसोदिया, भारत भूषण सिसोदिया द्वारा अस्थि विसर्जन नीलधारा नदी रामेश्वर घाट पर किया गया।
अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम श्री पंचनाम दस जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर संत रामशरण गिरी जी महाराज एवं हितेश्वर गिरी (ठाकुर जी) के सानिध्य में श्रीधर दुबे पुरोहित द्वारा घाट पर विधिवत पिंडदान कर शास्त्रोक्त विधि द्वारा अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया गया। बेहद मिलनसार नरेंद्र सिंह सिसोदिया मोदीनगर से लगातार तीन बार भारतीय जनता पार्टी से विधायक रह चुके थे। 70 वर्ष की उम्र में उनकी लोकप्रियता पूरे इलाके में मशहूर थी ।
अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री को छोड़कर 15 फरवरी 2020 को चले गए।
वर्तमान में सांसद जनरल वीके सिंह के प्रमुख सांसद प्रतिनिधि थे।
इस अवसर पर उनकी इच्छानुसार गंगा घाट पर एक पीपल का बृक्ष भी लगाया गया! मौके पर रवि त्यागी, विजय नागर ,कुलदीप, मुकेश, अजय सिंह चौहान, कौशल सिसोदिया सहित तमाम परिवारिक सदस्य उपस्थित थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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