ऋषिकेशधर्म-कर्म

योग हमारी जीवन शैली है -स्वामी विजयानंद सरस्वती!

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!
“एक भारत श्रेष्ठ भारत” के अंतर्गत कर्नाटक पुलिस की 15 सदस्यों का समूह उत्तराखंड में उत्तराखंड की पुलिस की कार्यप्रणाली का अवलोकन करने एवं उनके काम करने के ढंग को समझने के लिए 15 दिनों के प्रशिक्षण पर उत्तराखंड पहुंची।
इसी कड़ी में वेद निकेतन धाम में समूह के सदस्यों द्वारा स्वामी विजयानंद सरस्वती से योग प्राणायाम ध्यान और गंगा की महत्ता के विषय में विस्तार से जाना इस अवसर पर स्वामी ने योग प्राणायाम ध्यान के विषय में विस्तार से बताया और उन्हें कई आसनों का प्रशिक्षण भी दिया इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी विजयानंद सरस्वती ने कहा कि योग हजारों साल से भारतीयों की जीवन−शैली का हिस्सा रहा है। ये भारत की धरोहर है। योग में पूरी मानव जाति को एकजुट करने की शक्ति है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का आदर्श मिश्रण है। दुनिया भर के अनगिनत लोगों ने योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाया है। योग और प्राणायाम भारतीय संस्कृति और जीवन शैली के प्राण हैं। योग और प्राणायाम हमारे ऋषि मुनियों की संसार को देन है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग को वरदान माना गया है। योग साधना के आठ अंग हैं। इनमें क्रमशः यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। इन अष्ठांग योग में प्रथम पांच अंग बहिरंग और शेष तीन अंग ,अंतरंग के नाम से जाने और पहचाने जाते हैं। आठ अंगों में प्रथम अंग नियम में शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधाम शामिल हैं। दूसरे अंग आसन में योगासनों द्वारा शारीरिक नियंत्रण, तीसरे प्राणयाम में श्वास लेने सम्बन्धी तकनीकों द्वारा प्राण पर नियंत्रण, चौथे प्रत्याहार में इन्द्रियों को वश में करना, पांचवें में एकाग्र चित्त होकर अपने मन को नियंत्रित करना, छठे अंग ध्यान में निरन्तर ध्यान मग्न होना, सातवें समाधि में आत्मा से जुड़ना है। इसके अतिरिक्त यम अंग में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का पालन करना है।
योग का शाब्दिक अर्थ तन और मन को प्रसन्न रखना है। योग हमारे देश में कोई नई प्रणाली नहीं है। इसे हमने अपनी जीवन शैली के रूप में अपनाया है।
स्वामी विजयानंद ने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम करता है। योग से कर्मो में कुशलता आती है। पुलिसकर्मियों के लिए योग का बड़ा महत्व है। पुलिस को अक्सर मानसिक दबाव में काम करना पड़ता है। नित्य योग का अभ्यास करके पुलिस कर्मचारी तनाव से मुक्ति पा सकते हैं। योग से शरीर तो स्वस्थ रहता ही है साथ ही मन एकाग्रता होता और व्यक्ति हर कार्य को अपनी क्षमता के अनुसार कर पाता है।
पुलिस इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने के नेतृत्व में समूह के सदस्यों ने योग, ध्यान, प्रणायाम का प्रशिक्षण लेकर विदा हुए!

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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21 Comments

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