धर्म-कर्म

*ऋषिकेश – श्री मां कात्यायनी मंदिर शीशमझाडी़ में नवरात्रि के छठे दिन आज होंगे अनेकों धार्मिक आयोजन*

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश, 1 अक्टूबर 2022- शीशम झाड़ी स्थित ज्ञान करतार आश्रम में स्थित श्री मां कात्यानी मंदिर में पूरे नवरात्रि में अनेकों धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। आज माता कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन विशेष रुप से की जा रही है। श्री मां कात्यानी मंदिर ज्ञान करतार आश्रम ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष गुरविंदर सिंह सलूजा ने बताया कि आज श्री मां कात्यायनी मंदिर में सुबह मां का पूजा श्रृंगार हवन किया जाएगा। तत्पश्चात रात्रि में बिट्टू और पंकज के द्वारा रात 7:30 बजे से 10:30 बजे तक मां का गुणगान किया जाएगा। आपको बता दें कि शीशमझाड़ी स्थित श्री मां कात्यानी मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। पूरे शारदीय नवरात्रि में अनेकों धार्मिक आयोजन किया जा रहा है।

आज श्री मां कात्यानी के पूजा का विशेष महत्व है! मंदिर के संस्थापक गुरविंदर सिंह सलूजा ने बताया कि आज नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इनकी पूजा से व्यक्ति को अपनी सभी इंद्रियों को वश में करने की शक्ति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों की मानें तो ऋषि कात्यायन के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण ही माता का नाम कात्यायनी पड़ा। सच्चे मन से माता की पूजा करने से रोग, शोक और भय से छुटकारा मिलता है।

माता के इसी स्वरूप में महिषासुर दानव का वध किया था, इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। सच्चे मन से माता की पूजा-अर्चना करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। यह दिन खास तौर पर विवाह योग्य कन्याओं के लिए बेहद शुभ माना जाता है, माता की पूजा-अर्चना करने से मनोकामना की पूर्ति होती है।

श्री मां कात्यायनी का मंत्र –
कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां। स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते॥

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

मां कात्यायनी की स्तुति-
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी की कथा- पौराणिक कथाओं अनुसार, एक प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती जगदम्बा को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। कठिन तपस्या के पश्चात् महर्षि कात्यायन के यहां देवी जगदम्बा ने पुत्री रूप में जन्म लिया और वे मां कात्यायनी कहलाईं। इनका प्रमुख गुण खोज करना था। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। कहा जाता है कि नवरात्रि के दिन इनकी पूजा करने से साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

ज्ञान करतार आश्रम में स्थित मां कात्यायनी मंदिर में मां कात्यायनी की दर्शन के लिए आए लोगों को भंडारे का प्रसाद नित प्रति दिन दिया जाता है। आज आप सब सपरिवार रात्रि 7:30 बजे पहुंच कर माता की सुमधुर संगीतमय

ज्ञान करतार आश्रम शीशमझाडी़मे स्थित श्री मा कात्यायनी देवी।
भजनों का आनंद लेते हुए मां कात्यानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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