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*ऋ‌षिकेश-अनन्त विभूषित सद्गुरु स्वतन्त्रदेव जी महाराज का 75वाँ अमृतजन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।*

देवभूमि जे के न्यूज 08/08/2022-सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग अंतरराष्ट्रीय केंद्र ऋषिकेश आश्रम में अखण्ड स्वर्वेद पाठ और वैदिक मंत्रोच्चारण से अनन्त श्री विभूषित सद्गुरु स्वतन्त्रदेव जी महाराज का 75वाँ अमृतजन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।*

सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान के आचार्य सद्गुरु श्री स्वतन्त्रदेव जी महाराज जी का पावन अवतरण 28 जुलाई 1947 ईसवी को बलिया पावन तीर्थ वृतिकूट धाम पर हुआ। बाल्यकाल से ही पितामह सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज और पिता श्री आचार्य सद्गुरु श्री धर्मचन्द्र देव जी महाराज के संरक्षण में रहकर अनन्त श्री विभूषित सद्गुरु स्वतन्त्रदेव जी महाराज जी का लालन-पालन हुआ। जब वर्तमान सद्गुरु देव का अवतरण 28 जुलाई 1947 को हुआ तब अमर हिमालय योगी सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज जी ने कहा इनका अवतरण हो गया है अब हमारा प्यारा देश भारत स्वतंत्र हो जाएगा। महान योगी का नाम स्वतन्त्रदेव रहेगा।15 अगस्त 1947 को हम सबका देश भारतवर्ष स्वतंत्र हुआ। सद्गुरु श्री स्वतन्त्रदेव जी महाराज जी के संरक्षण में विशुद्ध चेतन पथ विहंगम योग का ज्ञान 60 देशों में दस्तक दे चुका है। सम्पूर्ण मानवजाति के कल्याण के निमित्त सद्गुरु देव का आध्यात्मिक ज्ञान हजारों कर्मयोगियों के माध्यम से शहर-शहर और गाँव-गाँव सुख-शान्ति का सन्देश लेकर द्वार-द्वार भ्रमण करते हैं। सद्गुरु देव के संरक्षण और कृपा से वाराणशी में स्वर्वेद महामंदिर धाम का निर्माण कार्य बहुत तीव्र गति से हो रहा है जिसमें एक साथ एक समय में 20,000 से अधिक साधक बैठकर साधना का अभ्यास करेंगे।
महान अवतारी पुरुष अनन्त श्री विभूषित सदगुरू स्वतन्त्रदेव जी महाराज जी का पावन 75वाँ अमृतजन्मोत्सव आज सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग अंतरराष्ट्रीय केंद्र ऋषिकेश आश्रम में अखण्ड स्वर्वेद का पाठ , आसन-प्रणायाम , ध्यान-साधना शिविर और विश्वशान्ति वैदिक महायज्ञ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हर्षोल्लास और श्रद्धापूर्वक मनाया गया।

उत्तराखण्ड राज्य सन्त समाज के अध्यक्ष रणजीत कुमार ठाकुर ने कहा कि सद्गुरु देव अपना पूरा जीवन हम सबके कल्याण के लिए ही समर्पित कर चुके हैं। महान सद्गुरु सत्ता पल-पल सबके कल्याण के निमित्त प्रचारार्थ भ्रमण करते रहते हैं। हम सबका परम् सौभाग्य है कि सारशब्द ज्ञाता ब्रह्मनिष्ठ सन्त-सद्गुरु का संरक्षण हम सभी विहंगम योग के पथिकों को प्राप्त है। हम सभी अधिकारियों-पदाधिकारियों-उपदेष्टाओं और प्रभारियों को चाहिए कि हम सब सदैव सद्गुरु के सिद्धांत और आदेश-निर्देश का अक्षरशः पालन करें। सेवक सबसे बड़ा होता है। ऋषिकेश आश्रम व्यवस्थापक डॉ शुभनारायन ठाकुर ने कहा कि हमारा ऋषिकेश आश्रम दिन-दुःखियों की सेवा और स्वास्थ्य सबका उत्तम रहे एवं मानसिक शांति रहे इस पर हम सबका विशेष ध्यान है।

संस्थान के अनेकों सदस्यगण ऋषि गुप्ता उपदेष्टा , भूपेंद्र यादव उपदेष्टा , अनामिका ठाकुर,अनीशा देवी , श्रद्धा, पुरोहित महावीर , दिनेश , गणेश, ज्ञानेश ठाकुर , शिव अग्रवाल , मंजय विश्वकर्मा आदि सेवादाता मौजूद थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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