धर्म-कर्म

*ऋषिकेश-काल भैरव की पूजा करने से अकाल मृत्यु के भय से मिलती है मुक्ति-कथा व्यास वैष्णवाचार्य पण्डित शिव स्वरूप नौटियाल*

देवभूमि जे के न्यूज 06/08/2020- ऋषिकेश-ग्राम सभा खदरी खड़क माफ में श्री शिव महापुराण की सप्तम दिवस की कथा में कथा व्यास वैष्णवाचार्य पण्डित शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि काल भैरव की पूजा करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।शिव महापुराण कथा श्रवण करने मात्र से ज्ञान और अध्यात्म की प्राप्ति होती है।श्रावण मास में महादेव की पूजा करने से प्रभु की सहज ही प्राप्ति होती है।इस लिए महादेव को भोले नाथ भी कहा जाता है।अपने प्रवचन मे शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन- सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में व्याख्या की। उन्होंने कहा भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है।अपने प्रवचन मे शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन- सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में व्याख्या की। उन्होंने कहा भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है।अपने प्रवचन मे शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन- सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में व्याख्या की। उन्होंने कहा भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है।अपने प्रवचन मे शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन- सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में व्याख्या की। उन्होंने कहा भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है।


कथा सुनने वालों में महन्त जगदीश प्रपन्नाचार्य महाराज,शूरवीर सिंह चौहान,सूबेदार विक्रम सिंह कण्डारी,प्रभु दयाल कोठियाल,कैलाश कोठियाल,पूर्व प्रधान सरोप सिंह पुण्डीर, महावीर उपाध्याय,लक्ष्मण सिंह चौहान,मानवेन्द्र कण्डारी,मुकेश धनाई, आचार्य गीता राम चमोली,प्रदीप नौटियाल,कृष्ण कान्त भट्ट,रोहित रावत,रेखा कण्डारी,अनिता रावत,शशि भट्ट,मीना कुलियाल,मधु चमोली,कौशल्या डोभाल,दुर्गा रतूड़ी, राजी भंडारी,भूमा चौहान,राजेश्वरी चौहान सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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