ऋषिकेश

*आवास विकास स्थित विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हुआ मातृसम्मेलन व तीज महोत्सव पर अनेकों प्रतियोगिताएं*

देवभूमि जे के न्यूज़, 30 जुलाई 2022

ऋषिकेश -आवास विकास विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की विवेकानंद योग सभागार में आज तीज महोत्सव व बच्चों के शिक्षण को लेकर उन में आने वाली समस्याओं को लेकर विचार-विमर्श हेतु मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पांडेय एवं राज्य महिला आयोग उत्तराखंड की अध्यक्षा कुसुम कंडवाल व एकता राव एवम डॉ.सोनम भदोरिया ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया ।
कार्यक्रम में इस अवसर पर मेंहदी प्रतियोगिता, गीत प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें मेहंदी प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में वंशिका प्रथम व अंशिका रावत दितीय तथा अनुष्का तृतीय रही, वही सीनियर वर्ग में पायल प्रथम ,मीनाक्षी दितीय, पलक तृतीय रही।
वही आचार्या लक्ष्मी चौहान ने मातृ सम्मेलन पर अपने विचारो को सबके समक्ष रखा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुसुम कंडवाल जी ने बताया कि बच्चे की प्रथम पाठशाला उसके घर से ही शुरू होती है इसलिए जो कुछ वह सर्वप्रथम सीखता है अपनी मां के द्वारा ही सीखता है इसलिए हम सभी माताओं को बच्चों में घरों से ही संस्कारवान शिक्षा घर से ही देनी प्रारंभ कर देनी चाहिए,और बाकी सामाजिक, नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा व अच्छी शिक्षा देने में विद्या मंदिर का विधालय परिवार आपके पालय के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा ही रहा है।
कार्यक्रम एकता राव ने बेटियों के प्रति सजग रहने को कहा आज का युग बेटियो के साथ मित्र बन कर रहने का है जिससे हम उनकी समस्याओं को समझ पायेंगे।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पांडे ने सभी मातृशक्ति का विद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया व सभी माताओं को अपने बच्चो के प्रति जागरूक रहने के लिए कहा।

इस अवसर पर कंचन बंसल, सुबोध पुरोहित,राधिका,हिमानी,आयुष लोधी,रीना गुप्ता,रजनी गर्ग,सुहानी सेमवाल,मनोरमा शर्मा, नरेन्द्र खुराना, रामगोपाल रतूड़ी, मीनाक्षी उनियाल, सतीश चौहान, कर्णपाल बिष्ट,संगीता जोशी व लग्भग 380 मातृ शक्ति उपस्थित थी।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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