ऋषिकेश

*ऋषिकेश-प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा राजयोग द्वारा स्वस्थ एवं सुखी समाज कार्यक्रम का हुआ आयोजन*

देवभूमि जे के न्यूज 21/06/2022-ऋषिकेश।

आठवें अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के उपलक्ष में आज 21 जून दिन मंगलवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय गीता नगर ऋषिकेश द्वारा राजयोग द्वारा स्वस्थ एवं सुखी समाज कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि भ्राता सरदार गुरविंदर सिंह पार्षद 20 बीघा, बापू ग्राम ऋषिकेश व वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति संगठन के अध्यक्ष बी0के0 ब्रह्मकुमार शर्मा एवं आश्रम की बहनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया
ऋषिकेश सेंटर की प्रमुख संचालिका राजयोगिनी बाल ब्रह्मचारिणी बीoकेo आरती दीदी ने बताया शारीरिक योगा की आवश्यकता शरीर को स्वस्थ रखने के लिए होती है, आज के मशीनी युग में जहां साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है, आज हर कायॅ मशीनों से होता है वहां मनुष्य मेहनत करना भूल ही गया है, आज मशीनों ने काम को आसान तो बना दिया है परंतु शरीर को बीमार और बेकार भी बना दिया है, इसीलिए वह आज बीमार ज्यादा रहने लगा है, 50 साल पहले यह मशीनें नहीं थी तो हम सब दैनिक कार्यों से ही अपने आप को स्वस्थ रखते थे, हमें योगा एवं जिम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी, क्योंकि दैनिक कार्य में ही बहुत मेहनत लगती थी, जैसे मसाला कूटना, खेती करना, कुएं से पानी भरना, परंतु जितना ज्यादा योग का प्रचार- प्रसार हो रहा है उतनी बीमारी भी बढ़ रही है आज शरीर व समाज को स्वस्थ बनाने के लिए सिर्फ शारीरिक योगा नहीं मन का मजबूत होना बहुत जरूरी है और मानसिक योगा सिर्फ राजयोग द्वारा ही संभव है* राजयोग दो शब्दों से मिलकर बनाया *राज-योग* राज अर्थात अपनी इंद्रियों को कंट्रोल में रखना योग अर्थात आत्मा का परमात्मा के साथ जुड़ाव, साथ ही बताया गया कि होली हंस बनकर गुण ग्राहक बनना है एवं किसी की बुराई ग्रहण नहीं करनी है। अर्थात दूसरे के कचरे (विकारों से) स्वयं को मैला नहीं करना है, साथ ही ●शांति ●धैर्यता● प्रेम●संतुष्टि ●खुशी की 5 गोलियां रोज नियम से खानी है, ताकि आत्मा शक्तिशाली बन सके। दो बातें ग्रहण करनी है, 1.. क्षमा लेना 2.. क्षमा देना अर्थात स्वयं से गलती हो जाए तो क्षमा मांग लेनी है और दूसरे की गलती हो उसे क्षमा कर देना है तभी हम स्वस्थ एवं खुश रह पाएंगे।

इस कार्यक्रम में 200 से अधिक बीo केo भाई बहनों ने हिस्सा लिया और बीoकेo अंजलि बहन द्वारा शारीरिक योगा भी कराया गया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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