उत्तराखण्डऋषिकेश

*ऋषिकेश- विहंगम योग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित हुआ योग-ध्यान एवं साधना*

देवभूमि जे के न्यूज, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2022 के पावन अवसर पर अमर हिमालय योगी सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग अंतरराष्ट्रीय केंद्र , ऋषिकेश आश्रम परिसर में योगासन-ध्यान साधना शिविर दिव्यता के साथ सम्पन्न।

भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयास से सम्पूर्ण विश्व से प्रमाणित 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार करना यह महान उपलब्धि है। भारतवर्ष के महान ऋषि-महर्षियों के तपस्या का फल आज सम्पूर्ण मानवजाति प्राप्त कर रहे हैं। सम्पूर्ण विश्व को योग के महत्व को बतलाने का श्रेय अपना प्यारा भारतवर्ष को ही है। इसी अदभुत कड़ी में विहंगम योग के प्रणेता अमर हिमालय योगी सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज ने 17 वर्षों तक कठोर तपस्या करके लुप्तप्राय आध्यात्मिक ज्ञान को जनमानस के कल्याण के लिए प्रकट किया, जिसका संबंध हमारी आत्मा से है। शरीर स्वस्थ रहे! निरोग रहे! आवश्यक है आसन-प्राणयाम। प्रारंभिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए अमर हिमालय योगी सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग अंतरराष्ट्रीय केंद्र , ऋषिकेश आश्रम परिसर में आसन-प्राणयाम-ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया।

योगाचार्य डॉ शुभनारायण ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि “स्वर्वेद” में हमें सद्गुरु देव सन्देश देते हैं , उनकी अमृतवाणी है-
योग योग सब कोई कहे , योग न जाना कोय।
अर्ध धार ऊरध चले , योग कहावे सोय।।

विश्व में सारे कार्य जिसके द्वारा सम्भव-सुगम-सरलता से सिद्ध हो जाते हैं , वह साधन योग है।
(सद्गुरु श्री धर्मचंद्र देव जी महाराज)

हर्षोल्लास के साथ ऋषिकेश आश्रम परिसर में *अध्यक्ष एवं उपदेष्टा उत्तराखण्ड रणजीत कुमार ठाकुर की उपस्थिति में एवं आश्रम व्यवस्थापक डॉ शुभनारायण ठाकुर के मार्गदर्शन में कुशल-नेतृत्व के साथ मंगल दीपप्रज्वलन के साथ सभी को योग का अभ्यास करवाया गया। जिसमें भूपेंद्र यादव उपदेष्टा , चंदन गुप्ता उपदेष्टा , ज्ञानेश ठाकुर ,मंजय विश्वकर्मा, प्रमोद,दिनेश,आरती, माला, त्रिवेणी देवी ,ऋषिका, वंशिका,सौरभ,गौरब,जयजय , वीणा यादव अन्य गणमान्य अतिथि एवं बच्चे भी मौजूद रहे। सफल योगासन शिविर के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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