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*ऋषिकेश- आठवें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव पर योगगुरु स्वामी समर्पणनंद ने कराया योगासन*

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश लक्ष्मण झूला 21 जून 2022-

लक्ष्मण झूला तपोवन घूघतानि गांव स्थित स्वामी समर्पणनंद आश्रम में योगगुरु स्वामी समर्पणनंद जी द्वारा आठवें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अवसर पर आश्रम परिसर में भव्य योगासन का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर विश्व के कोने-कोने में स्वामी जी के भक्तों ने ऑनलाइन से जुड़ कर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर योग के विषय में बताते हुए योगगुरु स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने कहा कि योग क्या है? सामान्य भाव में योग का अर्थ है जुड़ना। यानी दो तत्वों का मिलन योग कहलाता है। योग की पूर्णता इसी में है कि जीव भाव में पड़ा मनुष्य परमात्मा से जुड़कर अपने निजी आत्म स्वरूप में स्थापित हो जाए। योग करना मतलब एकजुट करना या एकत्रित करना। योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से हम मन, श्वास और शरीर के विभिन्न अंगों में सामंजस्य बनाना सीखते है।यदि आपको लगता है की योग का मतलब है अपने शरीर को अंतरंग तरीके से मोड़ना, तो फिर समय आ गया है की आप अपनी सोच पर एक बार गहनता से पूर्ण विचार करें। योग सिर्फ़ आसनों तक सीमित नहीं है बल्कि इससे कई अधिक है। सीधे- सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह अपने मन, शरीर और श्वास की देखभाल करना है।योग सबसे पहले बाहरी शरीर को लाभ पहुँचाता है, जो ज़्यादातर लोगों के लिए एक व्यावहारिक और परिचित शुरुआत जगह है। जब इस स्तर पर असंतुलन का अनुभव होता है, तो अंग, मांसपेशियाँ और नसें सद्भाव में कम नही करते है, बल्कि वे एक- दूसरे के विरोध में कार्य करते है। पिछले 2 वर्ष में कोरोनावायरस महामारी में योग ने लाखों लोगों की जिंदगियों को बचाया। जिन्होंने अपने जीवन में योग को अपनाया उन्हें कोरोनावायरस महामारी छू नहीं पाई और वह पूर्ण स्वस्थ रहे। इसलिए अपने जीवन में यदि स्वस्थ रहना है तो योग को अवश्य अपनाएं और बीमारियों से दूर रहें।

मौके पर किरण देवी, दिनेश सिंह, लकी भंडारी।स्वामी कैलाशानंद ,स्वामी विश्वरूपा,साध्वी गायत्री, शीतल योगिनी, पूर्णिमा, हिमानी, लाई (Brazil) माथे ( ब्रिटिश ), शिव पूजा ने भाग लिया ।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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