धर्म-कर्मराशिफल

*आज आप का राशिफल एवं प्रेरक प्रसंग- दवाई की शीशी*

〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
*आज का राशिफल*
*19 जून 2022 , रविवार*

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दूसरों के कार्य में दखल न दें। आपकी योजना फलीभूत होगी। कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। यात्रा की योजना बन सकती है। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नए उपक्रम प्रारंभ करने का मन बन सकता है। पार्टनरों तथा भाइयों से सहयोग मिलेगा। लाभ होगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी , वु , वे, वो)
तीर्थाटन तथा संत दर्शन का लाभ मिल सकता है। अध्यात्म में रुचि रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। वरिष्ठ जन का मार्गदर्शन तथा सहयोग प्राप्त होगा। किसी बड़ी चिंता से मुक्ति मिलेगी। घर-परिवार में प्रसन्नता रहेगी। जोखिम न लें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में लापरवाही न करें। पुरानी व्याधि बाधा का कारण बन सकती है। कार्य में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। धनहानि के योग हैं। वरिष्ठजनों की सलाह मानें तथा विवेक से कार्य करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आर्थिक उन्नति के लिए बनाई गई योजना फलीभूत होगी। मान-सम्मान मिलेगा। नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। कार्यस्थल पर मनोनुकूल परिवर्तन संभव है। आय बनी रहेगी। रुके कार्य पूर्ण होंगे। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। चिंता रह सकती है। जोखिम न उठाएं।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
सत्संग का लाभ मिलेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा। तीर्थाटन का मन बनेगा। राजकीय बाधा दूर होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। सौभाग्य वृद्धि होगी। यात्रा में सावधानी आवश्यक है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। परिवार में कोई शुभ कार्य हो सकता है। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। अकारण क्रोध रहेगा। जोखिम व जमानत के का कार्य टालें। अपेक्षित कार्यों में विलंब से चिड़चिड़ापन रहेगा। व्यवसाय में ध्यान दें। लाभ होगा। जल्दबाजी से बचें।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
राजभय रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। यात्रा लाभदायक रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। व्यस्तता रहेगी। संपत्ति के बड़े सौदे हो सकते हैं। बड़ा लाभ होगा। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। पार्टनरों से मनोनुकूल सहयोग मिलेगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
पार्टी व पिकनिक की योजना बनेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। थकान महसूस होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विरोधियों का पराभव होगा। नए लोगों से मिलना होगा। कार्य आसानी से संपन्न होंगे।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
कोई सूचना प्राप्त हो सकती है। पुराना रोग उभर सकता है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। किसी अपने का व्यवहार दिल को ठेस पहुंचा सकता है। नकारात्मकता से दूर रहें। सहयोग होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। शांति बनाए रखें।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
थोड़े प्रयास से ही कार्यसिद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। उत्साह में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। थकान महसूस होगी। परिवारजनों का सहयोग मिलेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। लापरवाही से हानि होगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
घर में अतिथियों का आगमन होगा। उन पर व्यय होगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। कार्य में निरंतरता बनी रहेगी। परिवार में प्रसन्नता रहेगी। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। बाहर जाने का कार्यक्रम बनेगा। विवाद न करें।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
कार्य की बेहतरी रहेगी। कोई बड़ा कार्य मनोनुकूल बनेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति के योग हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कुसंगति से बचें। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। समय अनुकूल है। लाभ में वृद्धि होगी।

🔅 *_कृपया ध्यान दें👉_*
यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए हम उत्तरदायी नहीं हैं।

〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
आज का प्रेरक प्रसंग -दवाई की शीशी

राजस्थान में भगवान श्री कृष्ण के एक दयालु भक्त थे, नाम था रमेश चंद्र। उनकी दवाइयों की दुकान थी। उनकी दुकान में भगवान श्री कृष्ण की एक छोटी सी तस्वीर एक कोने में लगी थी। वे जब दुकान खोलते, साफ सफाई के उपरांत हाथ धोकर नित्य भगवान की तस्वीर को साफ करते और बड़ी श्रद्धा से धूप इत्यादि दिखाते। उनका एक पुत्र भी था राकेश, जो अपनी पढ़ाई पूरी करके उनके ही साथ दुकान पर बैठा करता था। वह भी अपने पिता को ये सब करते हुए देखता, चूँकि वह नए ज़माने का पढ़ा लिखा नव युवक था, लिहाजा अपने पिता को समझाता, भगवान वगैरह कुछ नहीं होते, सब मन का वहम है।
शास्त्र कहते हैं कि सूर्य अपने रथ पर ब्रह्मांड का चक्कर लगाता है जबकि विज्ञान ने सिद्ध कर दिया कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है, इस तरह से रोज विज्ञान के नए नए उदाहरण देता यह बताने के लिए कि ईश्वर नहीं हैं!!

पिता उस को स्नेह भरी दृष्टि से देखते और मुस्कुरा कर रह जाते। वो इस विषय पर तर्क वितर्क नही करना चाहते थे।

समय बीतता गया पिता बूढ़े हो गए थे। शायद वे जान गए थे कि अब उनका अंत समय निकट ही आ गया है…

अतः एक दिन अपने बेटे से कहा, “बेटा तुम ईश्वर को मानो या मत मानो, मेरे लिए ये ही बहुत है कि तुम एक मेहनती, दयालु और सच्चे इंसान हो ”
“क्या तुम मेरा एक कहना मानोगे?”
बेटे ने कहा, “कहिये ना पिताजी, जरुर मानूँगा।”

पिता ने कहा, “बेटा मेरे जाने के बाद एक तो तुम दुकान में रोज भगवान की इस तस्वीर को साफ करना और दूसरा यदि कभी किसी परेशानी में फँस जाओ तो हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से अपनी समस्या कह देना। बस मेरा इतना कहना मान लेना “।
बेटे ने स्वीकृति दे दी।
कुछ ही दिनों के बाद पिता का देहांत हो गया, समय गुजरता रहा…

एक दिन बहुत तेज बारिश पड़ रही थी। राकेश दुकान में दिनभर बैठा रहा और ग्राहकी भी कम हुई। ऊपर से बिजली भी बहुत परेशान कर रही थी। तभी अचानक एक लड़का भीगता हुआ तेजी से आया और बोला, “भईया ये दवाई चाहिए। मेरी माँ बहुत बीमार है। डॉक्टर ने कहा ये दवा तुरंत ही चार चम्मच यदि पिला दी जाये तो ही माँ बच पायेगी, क्या ये दवाई आपके पास है?”

राकेश ने पर्चा देखकर तुरंत कहा, “हाँ ये है।” लड़का बहुत खुश हुआ…और कुछ ही समय के लेन देन के उपरांत दवा लेकर चला गया। परन्तु ये क्यालड़के के जाने के थोड़ी ही देर बाद राकेश ने जैसे ही काउंटर पर निगाह मारी तो…पसीने के मारे बुरा हाल था क्योंकि अभी थोड़ी देर पहले ही एक ग्राहक चूहे मारने की दवाई की शीशी वापस करके गया था राकेश ने शीशी काउंटर पर ही रखी रहने दी कि लाईट आने पर वापस सही जगह पर रख देगा। पर जो लड़का दवाई लेने आया था, वह अपनी शीशी की जगह चूहे मारने की दवाई ले गया और लड़का पढ़ा लिखा भी नहीं था!!!

“हे भगवान!” अनायास ही राकेश के मुँह से निकला, “ये तो अनर्थ हो गया!!” तभी उसे अपने पिता की बात याद आई और वह तुरंत हाथ जोड़कर भगवान कृष्ण की तस्वीर के आगे दुःखी मन से प्रार्थना करने लगा कि, “हे प्रभु! पिताजी कहते थे कि आप है।आप सचमुच है तो आज ये अनहोनी होने से बचा लो। एक माँ को उसके बेटे द्वारा जहर मत पीने दो, प्रभु मत पीने दो!!!”

“भईया!पीछे से आवाज आई.. कीचड़ की वजह से मैं फिसल गया, दवा की शीशी भी फूट गई! कृपया आप एक दूसरी शीशी दे दीजिये..।” भगवान की मनमोहक मुस्कान से भरी तस्वीर को देखकर राकेश की आँखों से झर झर आँसू बह निकले !!!
उसके भीतर एक विश्वास जाग गया था कि कोई है जो सृष्टि चला रहा है, जिसे कोई खुदा कहता है, तो कोई परमात्मा!

प्रेम और भक्ति से भरे हृदय से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

Related Articles

error: Content is protected !!
Close