ऋषिकेश

*ऋषिकेश- वेदांत कुटीर में धूमधाम से मनाया गया 46 वां वार्षिकोत्सव*

देवभूमि जे के न्यूज़ 11 जून 2022 –
आज चंद्रेश्वर नगर स्थित वेदांत कुटीर में 46 वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। वार्षिक उत्सव के अवसर पर अनेकों धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें प्रमुख रुप से भागवत सप्ताह, रामायण पाठ, संतों के प्रवचन एवं संत भंडारे का आयोजन किया गया।

दिवंगत 94 वर्षीय वेदांत केसरी स्वामी स्वतंत्र मुनि द्वारा स्थापित विधानसभा कुटीर में आज दूरदराज से आए संतों ने स्वामी स्वतंत्र मुनि की भूरी भूरी प्रशंसा की। संतों ने स्वामी स्वतंत्र मुनि को एक उच्च कोटि का संत बताया और कहा कि संतों के लिए स्वामी जी का जीवन समर्पित रहा, किसी का भी दुख उनसे देखा नहीं जाता था और वह अपने प्रयास से चाहे वह सामाजिक व्यक्ति हो चाहे संत हो उसका दूर दुख दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।
स्वामी जी देश की कोने कोने में भागवत, रामायण, एवं गीता का प्रचार-प्रसार किया। उनका तीनों ही ग्रंथों से बहुत ही अच्छी पकड़ थी। धारा प्रवाह उपरोक्त तीनों ग्रंथों के विषय में लोगों के बीच प्रवचन करते थे।

पिछले वर्ष कोरोना काल में उनकी असामयिक मृत्यु कोरोना के कारण हुई जो कि एक अपूरणीय क्षति है। लेकिन उनके द्वारा स्थापित आश्रम और उनके कृपा पात्र शिष्य महंत महेश मुनि द्वारा आश्रम का संचालन बड़े ही अच्छे ढंग से किया जा रहा है, जो की खुशी की बात है। स्वामी स्वतंत्र मुनि के बताए हुए पद चिन्हों पर चलते हुए महंत महेश मुनि द्वारा आश्रम का संचालन निर्बाध गति से किया जा रहा है। आज संतों के प्रवचन के बाद विराट संत भंडारे का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महंत बलवीर सिंह, स्वामी धर्मानंद जी महाराज, स्वामी कृष्णानंद जी, महंत विनय सारस्वत, रविंद्र चेतन्य, शिव चैतन्य, ब्रह्मानंद जी महाराज, कृष्णानंद जी राधा कृष्ण मंदिर, उग्रसेन जी, सरोज बाला ,संजय गुप्ता, वसंत, प्रभा, दीपांशु, भानुप्रिया ,सुख दयाल ,रामदयाल ,नरेंद्र, विमला, सहित समस्त उत्तराखंड एवं पंजाब बिहार एवं उत्तर प्रदेश से आए भक्तों ने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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