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*हरिद्वार – मां अमृतानंदमयी मठ की अधिष्ठात्री अम्मा द्वारा अभिमंत्रित शिलाखंड को केरला से लाकर आज इंटर कॉलेज का विधिवत हुआ शुभारंभ*

देवभूमि जे के न्यूज-14/04/2022-
हरिद्वार/ ऋषिकेश मां अमृतानंदमयी मठ द्वारा आज हरिद्वार में अमृता विद्यालयम स्कूल कैंपस का भूमि/आधारशीला पूजन किया गया।

इस अवसर पर हरिद्वार लक्सर रोड पर राधिका एनक्लेव मिस्सरपुर हरिद्वार में आज मां अमृतानंदमयी मठ की अधिष्ठात्री अम्मा द्वारा अभिमंत्रित शिलाखंड को केरला से लाकर इंटर कॉलेज का विधिवत शुभारंभ हुआ।

स्वामी प्रेमानंद जी महाराज कि अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित किया गया। उसके बाद विधि-विधान से वैदिक मंत्रोचार द्वारा अमृता विद्यालयम स्कूल कैंपस का भूमि पूजन एवं बुनियाद रखी गई। इस अवसर पर राजनीति, धार्मिक, अध्यात्मिक एवं समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े हुए अनेकों गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

आपको बता दें कि माता अमृतानंदमयी एक प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक गुरू हैं। इनके अनुयायी इन्हें अम्मा या अमाची (मां) के नाम में संबोधित करते है। अमृतानंदमयी की गले लगाने की आदत के कारण उन्हें ‘हगिंग संतֹ’ के नाम से भी जाना जाता है।

माता अमृतानंदमयी के अनुयायियों के अनुसार, जब ये एक बच्ची थीं तभी से इनमें दिव्य अनुभव थे। माता अमृतानंदमयी ने माता अमृतानंदमयी मिशन ट्रस्ट, एक विश्वव्यापी संगठन, जो पूरे विश्व में धर्मार्थ कार्य करने वाला संगठन है, की स्थापना की। माता अमृतानंदमयी ने ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ को संबोधित किया।

स्वामी अमृतस्वरूपानंद उनके पहले शिष्य थे। उन्होंने एक आश्रम स्थापित किया, जिसे अमृतपुरी के नाम से जाना जाता है। अमृतपुरी आश्रम नियमित रूप से एक आध्यात्मिक मासिक पत्रिका मात्रवाणी प्रकाशित करता है। जन कौनेन ने एक पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता ने भारत की इस ‘हगिंग संत’ के जीवन पर फिल्म ‘दर्शन-द एम्ब्रेस’ बनाई। फिल्म को 2005 में कान फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए आधिकारिक तौर पर चुना गया था।
माता अमृतानंदमयी कहती हैं कि एक मानव के जीवन में कार्य, ज्ञान और भक्ति सभी महत्वपूर्ण हैं। वह यह भी कहती है कि सभी धर्मों के पूजा-पाठ और प्रार्थनाएं मन को शुद्ध करने के विभिन्न तरीके हैं। अमृतानंदमयी ध्यान पर बहुत बल देती है और लोगों को निःस्वार्थ सेवा का चयन करने की सलाह देती थीं। अमृतानंदमयी यह भी कहती थीं कि हर किसी को अपने अंदर धैर्य, करुणा, क्षमा, आत्म-नियंत्रण आदि जैसे दैवीय गुणों को विकसित करना चाहिए और इन सभी गुणों को मृत्यु के बाद नहीं, बल्कि जीवित अवस्था में प्राप्त कर लेना चाहिए जो लोग इन सब का अभ्यास करते हैं, उनकी आत्मा अनंत के साथ विलय हो जाती है।

अम्मा द्वारा उत्तराखंड में किए जा रहे समस्त सेवा कार्यों के सूत्रधार स्वामी प्रमोद कृष्णन जी ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा, चिकित्सा, यात्रियों की सुविधा के लिए आश्रय और बेघर लोगों के लिए घर बनाकर उन्हें देने का काम मठ द्वारा किया जा रहा है। अपने देश भारत में शिक्षा के लिए काम करने की बेहद आवश्यकता है। इसी कड़ी में आज हरिद्वार में यह विद्यालय की नींव रखी गई है जो इस क्षेत्र के लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस विद्यालय में जरूरतमंदों के लिए एक आदर्श विद्यालय बनाया जाएगा जिसमें लोगों को अत्याधुनिक शिक्षा दी जाएगी और निश्चित रूप से इस क्षेत्र के चौमुखी विकास में यह विद्यालय काम करेगा। आज हमें खुशी हो रही है कि मां के आशीर्वाद से बुनियाद रखी गई है , शीघ्र ही इसका निर्माण होगा और इसमें पठन-पाठन की शुरुआत की जाएगी।

संपूर्ण कार्यक्रम में अतिथि के रूप में हरिद्वार जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय की सहभागिता रही।
आज भूमि एवं बुनियाद पूजन के अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतिश्वरानंद जी महाराज,स्वामी केशवानंद, मुजेंद्र शर्मा, विजेंद्र शर्मा,
स्वामी रमेश जी महाराज, उमेशानंद जी महाराज लाल बाबा, प्रकाश, स्वामी कृष्णा व्यास भागवत धाम, , स्वामी अमृतानंद जी महाराज, स्वामी सदानंद जी महाराज, स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, स्वामी अच्युतानंद जी महाराज, स्वामी आत्मानंद जी, महाराज हरिदास, डॉक्टर राममहेश सिंह, डॉक्टर अशोक बद्री, प्रवीण बिष्ट आईटीआई प्रमुख, नितिन, चंद्रशेखरानंद, बीनू हरिनारायण हिंदू महामंडल जनरल सेक्रेट्री केरला, निर्मल, प्रदीश, स्वामी हंसानंद जी, स्वामी कृष्णानंद जी, इशानंद जी, श्रीराम चैतन्य, रविंद्र राजौरा सदस्य पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश, नितिन गौतम, अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद हरिद्वार, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, डॉ साधना डिमरी, साध्वी रिद्धि जी बडोदा,रजत जी,कृष्णांगी जी, ब्रह्मचारी माधव जी, अंजू जी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद सभी लोगों के जलपान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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