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*हरिद्वार -भव्यता एवं दिव्यता के साथ मनाया गया श्री जयराम अन्नक्षेत्र ट्रस्ट के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज का जन्म दिवस*

हरिद्वार /ऋषिकेश- श्री जयराम अन्नक्षेत्र ट्रस्ट ऋषिकेश हरिद्वार कुरुक्षेत्र के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज का जन्म दिवस दिव्यता और भव्यता के साथ मनाई गई।

ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर धर्म, अध्यात्म, सेवा संस्कार एवं भारतीय सनातन संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण के प्रति पूर्णता, निष्ठावान संत महापुरुषों के अनुभव से अभिसिंचित एवं सदगुरु महाराज की मंगलमय कृपा से मंगलवार को हरिद्वार भीमगोड़ा स्थित आश्रम में भक्तों द्वारा श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।

इस अवसर पर मंगल मूर्ति मारुति नंदन हनुमान जी महाराज की कृपा प्राप्ति हेतु संगीतमय सुंदरकांड पाठ का अनुपम आयोजन किया गया। सुंदरकांड का पाठ सुप्रसिद्ध भजन गायक अजय याग्निक द्वारा प्रस्तुत की गई। रात्रि मैं सभी भक्तों, संतो के लिए भोजन प्रसाद का भी आयोजन किया गया। जिसमें दूरदराज एवं देश के कोने-कोने से आए भक्तों संतों महंतों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

जन्मोत्सव कार्यक्रम के अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर डाक्टर उमाकांतानंद जी महाराज ने बोलते हुए कहा कि मन वचन और कर्म से आम जनमानस को बहुत कुछ महाराज जी द्वारा दिया गया है। आज हम लंबी आयु के लिए, स्वस्थ आयु के लिए प्रार्थना करते हैं कि आप इसी प्रकार दीर्घायु हो कर देश समाज और संतों के लिए काम करते रहे। समय बहुत बड़ा है इसलिए समय को सद्कर्म करने में लगाएं। “जिया नहीं जो अपने लिए वही संत है।” इस उक्ति को चरितार्थ करते हुए ब्रह्मचारी जी ने जो एक अलग स्थान प्राप्त किया है उसके लिए हम साधुवाद देते हैं! अपने लिए तो सभी जीते हैं परंतु आपने जनमानस के लिए आपने जो किया है वह वह सदैव याद रखा जाएगा।

आचार्य महामंडलेश्वर जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि चाहे अन्न क्षेत्र हो, चाहे शिक्षा के क्षेत्र हो, चाहे संतों की सेवा की बात हो आपके द्वारा जो सेवा की जा रही है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। ऋषिकेश, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार में बचाव राहत, गौ सेवा, चिकित्सा के क्षेत्र में आपके द्वारा किए गए कार्य निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। 70000 गोवंश एक गौशाला में रखना और उनकी सेवा करना कोई दिव्य महापुरुष ही कर सकता है। आप व्यवहार कुशल है और उस पर भी जो अपनत्व का भाव आपके अंदर दिखता है। व्यक्ति स्वत: ही आपका हो जाता है! आज आपके जन्म दिवस के अवसर पर हमारी तरफ से एवं समस्त जूना अखाड़े की तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सत् कर्मों का सुवाष जब चहुंओर फैलता है तो व्यक्ति व्यक्ति नहीं एक संस्था बन जाता है। लंबे समय तक आप जिएं, और इसी प्रकार समाज उत्थान के लिए कार्य करते रहें।

ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी जी ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारे जन्मदिवस पर इतनी भारी संख्या में देश के कोने-कोने से आए सभी संतो भक्तों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं तो एक सेवक हूं, आज जन्मदिन पर आप सभी ने इतनी भव्यता, दिव्यता दिया है आप सब बधाई और आप सब आशीर्वाद के पात्र हैं। आज जन्मदिन का आयोजन तो एक बहाना है, आप सभी के दर्शन हेतु यह आयोजन किया गया। आप सभी के आशीर्वाद सहयोग से यह संभव हुआ है। अपने परम पूज्य संत का साक्षात दर्शन हुआ सभी भक्तों सभी बच्चों बड़ों का साक्षात्कार हुआ आप सभी संतों का आशीर्वाद मुझे शक्ति एवं आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। सेवा करने का भाव तीव्र गति से जागृत होता है। मैं और ऊर्जावान बनकर सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ कर और सेवा करूंगा। मेरे सामने यदि कोई दुखी व्यक्ति आता है तो मैं अपना दुख समझ कर उसकी सेवा के लिए तत्पर रहता हूं। जो सेवा का आशीर्वाद आप सभी ने आज मुझे दिया है उसके लिए आप सभी का मैं आभारी हूं। आपके आगमन से प्रेरणा लेकर संत और समाज की सेवा के लिए कृत संकल्पित हूं और समर्पित रहूंगा। मुझे खुशी होती है सभी का सेवा करके जो सुख मिलता है वह और किसी भी कार्य से नहीं मिलता है। आज संत मुनि जनों महंतों के बताए रास्ते पर चलकर जीवन में और अच्छा करने का मैं संकल्प लेता हूं। एक पुनः बार आप सभी का धन्यवाद।

इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के संत, महंत, महात्मा हजारों की संख्या में उपस्थित थे। जिसमें मुख्य रुप से महामंडलेश्वर डॉक्टर उमाकांतानंद जी महाराज, आचार्य जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज, दीप शर्मा, प्रदीप शर्मा, अशोक रस्तोगी, पिंकी शर्मा, बाबूराम अग्रवाल, विवेक तिवारी, संदीप गुप्ता, संजय शास्त्री, रवि शास्त्री, विनय उनियाल, विनय सारस्वत, जयकुमार तिवारी, महावीर सिंह सहित तमाम लोग उपस्थित थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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