उत्तराखण्ड

*बड़ी खबर -उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन जारी- दो नाम सबसे आगे*

देहरादून /दिल्ली उत्तराखंड विधानसभा चुनाव सहित देश के 5 राज्यों में विधानसभा की चुनाव समाप्त हो गई है! उत्तर प्रदेश, मणिपुर और गोवा में भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री तय कर दिए हैं। वहीं 10 दिन बीत जाने के बाद भी उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के पद पर सहमति नहीं बन पाई है। बड़े-बड़े दिग्गज अपने-अपने मोहरों को मुख्यमंत्री के पद पर बिठाने के लिए प्रयासरत है, और दिन-रात बैठक और बातचीत का दौर जारी है। हालांकि उत्तराखंड के पर्यवेक्षक रक्षा मंत्री राजनाथ एवं विदेश मंत्री मीनाक्षी लेखी इस मुद्दे पर विधायकों से बैठक कर चुके हैं। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भी उत्तराखंड के दिग्गज नेताओं एवं विधायकों के साथ बैठक कर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है कि मुख्यमंत्री के लिए ज्यादा खींचातानी ठीक नहीं है। दिनभर की दिल्ली से देहरादून की भाग दौड़ नेताओं की लगी हुई है। उत्तराखंड के दिग्गज दिल्ली में जमे हुए हैं, रमेश पोखरियाल निशंक के घर पर भी बैठक हुई लेकिन अभी तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। मुख्यमंत्री की दौड़ में जो सबसे आगे नाम चल रहे हैं उसमें कार्यकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का नाम सबसे आगे चल रहा है। अंदर से जो खबरें मीडिया के माध्यम से आ रही है उनके अनुसार उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने बताया है कि सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाई जाएगी।उन्होंने बताया कि वह इसके लिए देहरादून रवाना हो रहे हैं।कौशिक ने संवाददाताओं को बताया कि सोमवार को विधानसभा में सभी नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण होगा और इसके बाद विधायक दल की बैठक होगी।

देहरादून में प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि भाजपा ने अपने नवनिर्वाचित विधायक दल की बैठक यहां राज्य मुख्यालय में सोमवार को चार बजे बुलाई है। इस बैठक में नए नेता का चयन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सह पर्यवेक्षक के रूप में विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी भी मौजूद रहेंगी।

ज्ञात हो कि उत्तराखंड में भाजपा ने शानदार बहुमत तो हासिल कर लिया लेकिन मुख्यमंत्री धामी को खटीमा से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इसे लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई और इसे दूर करने के लिए भाजपा में शीर्ष स्तर पर मंथन का दौर चालू हो गया जो लगातार जारी है।

सूत्रों के मुताबिक हार के बावजूद धामी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। शाह के आवास पर जारी बैठक में धामी की मौजूदगी भी इसका संकेत करती है।

बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि चार विधायकों सहित छह विधायकों ने धामी के लिए अपनी सीट खाली करने का प्रस्ताव दिया है।सूत्रों के अनुसार चौबट्टाखाले के विधायक सतपाल महाराज, श्रीनगर के विधायक धन सिंह रावत, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश में 14 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव के इस माह घोषित परिणामों में भाजपा 70 में से 47 सीटों पर जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार सत्तासीन होने जा रही है।

‘उत्तराखंड फिर मांगे, मोदी-धामी की सरकार’ के नारे के साथ विधानसभा चुनाव लड़ने वाली भाजपा को धामी के अपनी परंपरागत सीट खटीमा से हारने के बाद नेतृत्व को लेकर नए सिरे से निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा है।

भाजपा की उत्तराखंड इकाई के सूत्रों ने कहा कि धामी के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि वह न केवल युवा और ऊर्जावान हैं, बल्कि भाजपा ने पहाड़ी राज्य में उनके नाम पर चुनाव लड़ा था और शानदार जीत दर्ज की।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के धामी के नाम पर मुहर लगाने का फैसला करने की एक और बड़ी वजह यह हो सकती है कि उसे पिछले कार्यकाल में बेहद कम समय में दो मुख्यमंत्रियों को बदलने के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, अगर उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनी सीट गंवाने वाले केशव प्रसाद मौर्य को दोबारा उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है तो धामी को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया जा सकता है?

सूत्रों ने सूत्रों कि माने तो अगर पार्टी किसी नए चेहरे का चयन करने का फैसला लेती है तो क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बैठाना काफी अहम होगा।

चूंकि, कुमाऊं के एक ब्राह्मण नेता अजय भट्ट को पहले ही केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया जा चुका है, ऐसे में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बैठाने के लिए गढ़वाल के एक ठाकुर या राजपूत नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जा सकता है।

अगर ऐसा होता है तो सतपाल महाराज या धन सिंह रावत, जो गढ़वाल के प्रमुख ठाकुर नेता हैं, मुख्यमंत्री पद के लिए पसंदीदा चेहरा बनकर उभर सकते हैं।

कल किसके नाम पर मुहर लगती है यह तो समय बताएगा इस समय हम केवल कयास लगा सकते हैं, और आकलन ही कर सकते हैं।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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