ऋषिकेशधर्म-कर्मसाधना

*ऋषिकेश -स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने पंचाग्नि साधना का किया शुभारंभ*

ऋषिकेश /लक्ष्मण झूला- लक्ष्मण झूला में तपोवन (घुगतानी गांव) स्थित समर्पणानंद आश्रम में इन दिनों स्वामी समर्पणानंद सरस्वती द्वारा पंचाग्नि साधना का आयोजन किया जा रहा है। पंचाग्नि साधना विगत 06 वर्षों से स्वामी जी द्वारा किया जा रहा है। स्वामी जी ने पंचाग्नि साधना की शुरुआत विधि-विधान पूर्वक दिनांक 14 जनवरी 2022 से शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि पंचाग्नि अत्यंत कठिन साधना है। पंचाग्नि साधना में महात्यागी संत अपने चारों तरफ गौ माता के गोबर के कंडे का गोला बनाकर अग्नि प्रज्वलित करते हैं। खुले आसमान में सूर्य की तपती धूप में घंटों बैठकर साधना करते हैं। यह साधना मकर संक्रांति से प्रारंभ होकर गंगा दशहरा तक चलती है। जो महात्मा पंचाग्नि तपस्या का संकल्प लेता है, उसे यह तपस्या 18 वर्षों तक लगातार करनी होती है।

सूर्य को स्वर्ग की अग्नि माना गया है। अग्नि का दूसरा स्वरूप पर्जन्य कहलाता है। पर्जन्य का मतलब होता है जल या वर्षा। संसार को तीसरी अग्नि कहा गया है। पुरुष को चौथी अग्नि कहा गया है और अंत में स्त्री को पांचवीं अग्नि कहा गया है। इन सब को सम्मिलित रूप से पंचाग्नि कहते हैं।

तपस्यारत स्वामीजी।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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