ऋषिकेश

*ऋषिकेश- ब्रह्मपुरी में सात दिवसीय भागवत् कथा का हुआ समापन*

ऋषिकेश- श्री राम तपस्थली ब्रह्मपुरी में भागवत कथा का हुआ समापन इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें संतों ने प्रसाद ग्रहण किया इस अवसर पर दूरदराज से आए भक्तों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।

कथा व्यास पंडित राजेश शास्त्री।

इससे पूर्व वृंदावन से व्यास पीठ पर पंडित राजेश शास्त्री ने भागवत कथा की समाप्ति पर प्रवचन मे कहा कि भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराण में से एक है। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है। इस पुराण में भगवान श्रीकृष्ण को सभी देवों के देव के रूप में वर्णित किया गया है। इसके अतिरिक्त भागवत पुराण में भक्ति का निरूपण भी किया गया है। परंपरागत तौर पर भागवत पुराण के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। श्रीमद्भागवत या इस पुराण को “भागवतम” भी कहते हैं। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत महापुराण मोक्ष प्रदान करने वाली है। इसके स्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई, और कलयुग में आज भी हम सबको इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी की मुक्ति हो जाती है, और वह इस जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
भागवत पुराण में 12 स्कंद है। जिसमें 18000 श्लोक हैं। इस ग्रंथ में अध्यात्मिक विषयों पर वार्तालाप वर्णित है। इस पुराण में भक्ति, ज्ञान, तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है। भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान श्री कृष्ण के कथाओं के साथ साथ महाभारत काल से पूर्व के कई राजाओं, ऋषि मुनियों तथा असुरों की कथाएं भी भागवत पुराण में संकलित की गई है। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण का देह त्याग, द्वारिका नगरी का जलमग्न होना और यदुवंशियों का नाश किस प्रकार हुआ था? इन सभी विषयों का विस्तारित विवरण किया गया है। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से प्राणी के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। और उसके अंदर लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ प्राप्ति के लिए बहुत कठिन प्रयास किए जाते थे,वही कलयुग में अर्थात इस युग में श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पुराण की कथा श्रवण से प्राणी के अंदर सोया हुआ ज्ञान वैराग्य जागृत हो जाता है। श्रीमद् भागवत की कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए संसार के हर मनुष्य को अपने जीवन से समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए।
श्री राम पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर दया राम दास जी महाराज।

श्री राम पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर दयाराम दास जी महाराज ने सभी लोगों को इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया, और कहा कि मां गंगा के तट पर भागवत सुनने की विशेष महिमा है। यहां भागवत सुनने से यह इहलौकिक और परलौकिक दोनों ही लोक सुधर जाते हैं, इस जगह पर मां गंगा के तट पर कथा सुनने का विशेष महत्व है ऋषि-मुनियों ने सबसे पहले इस जगह पर कथा का रसपान कराया था। इसलिए यह जगह विशेष महत्व रखता है।

कथा के मुख्य जजमान श्रीमती द्रोपती, सीताराम पचौरी, उनके पुत्र वधू श्रीमती संध्या, पवन एवं उनके परिवार से अरविंद, प्रवीण, संजय, राजीव, कुलदीप, अमित, संदीप, प्रदुम्न, यस, लवेश, कान्हा, बॉबी, हितेंद्र पार्थ एवं समस्त पचोरी परिवार सहित श्रीमती निर्मला रामकिशोर, श्रीमती इंद्र मति अशोक, श्रीमती अनीता महेंद्र ,श्रीमती राखी चिरंजीव, वैभव, कुमारी अंकिता होंगे।
प्रमोद दास जी महाराज, सीताराम केशव प्रसाद, ज्वाला प्रसाद पवन कुमार पचौरी के आयोजन में इस कथा में ग्राम गढ़ी तहसील विजयपुर जिला श्पुयोपुर वर्तमान निवासी आनंद नगर ग्वालियर, केदार शास्त्री, पंडित केला लाल शास्त्री, पंडित लक्ष्मण प्रसाद शास्त्री, पंडित वासुदेव प्रसाद शास्त्री, अनिल शुक्ला, पंडित भरत मूदग्गल, कृष्ण कांत शर्मा, कोमल शास्त्री, राम नरेश शास्त्री, पंडित मुकेश शास्त्री, प्रमोद शास्त्री, मुन्नालाल, भारत शास्त्री शिवपुरी के भी भक्तगण इस भागवत सप्ताह में भाग लिया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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