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ऋषिकेश-नवनिर्वाचित वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन का जयराम आश्रम के प. पू. अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज ने किया स्वागत*

देवभूमि जे के न्यूज-

परम पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज द्वारा वरिष्ठों का सम्मान।

ऋषिकेश- ऋषिकेश स्थित जयराम आश्रम के अध्यक्ष परम पूज्य ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज द्वारा आज जयराम आश्रम में वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अंग वस्त्र एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया।

एक सादे समारोह में जयराम आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के सभी पदाधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर श्री ब्रह्मचारी जी महाराज ने कहा कि भारत की भूमि पर अपने वरिष्ठों से आशीर्वाद लेने की परम्परा है।हमारे समाज व देश के प्रति वरिष्ठ नागरिकों का योगदान अतुल्य हैं।
युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि वे बुजुर्गाें का मान-सम्मान करें और उनके अनुभव को जीवन में ढाले। बुजुर्गाें के पास अनुभवों को अनमोल खजाना है! हमें उनके अनुभव से सीख लेने की जरूरत है। आज हम अपने बुजुर्गों को भूलते जा रहे हैं, और नई पीढ़ी के बच्चे बुजुर्गों के अनुभव से वंचित हो रहे है, जिससे समाज में अव्यवस्था का माहौल बनता जा रहा है। हमें अपने घर के बड़े बुजुर्गों की कभी अवहेलना नहीं करनी चाहिए और सदैव उनका मान सम्मान करना चाहिए। आज आश्रम में मुझे वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के पदाधिकारियों का स्वागत करने का जो अनमोल अवसर मिला है इसकी मुझे बहुत खुशी है। भविष्य में वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन ऋषिकेश को किसी भी प्रकार की कोई मदद की जरूरत होगी तो निश्चित रूप से आश्रम परिवार आप लोगों के साथ है। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष ब्रह्म कुमार शर्मा ने महाराज जी को सम्मान और आशीर्वाद देने के लिए आभार प्रकट किया। महासचिव नरेश चंद्र भारद्वाज ने महाराज जी को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए बुजुर्गों के प्रति सम्मान देने के लिए धन्यवाद किया।

इस अवसर पर अध्यक्ष ब्रह्म कुमार शर्मा, महामंत्री नरेश चंद्र भारद्वाज, उपाध्यक्ष अजय गोयल, आईडी जोशी, पीडी अग्रवाल , कैप्टन डीडी तिवाड़ी, कमल सिंह राणा, दिनेश मुद्गल, शेखर गुप्ता, रमेश चंद जैन, प्रदीप कुमार जैन हरीश तोमर, नरेश चौहान, सत्य प्रकाश गुप्ता ,कृष्ण गोपाल सहित तमाम लोग उपस्थित थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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