ऋषिकेश

*महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर अग्रवाल सभा डोईवाला द्वारा आयोजित दीपोत्वस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ने की शिरकत*

डोईवाला 12 अक्टूबर –


महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर अग्रवाल सभा डोईवाला द्वारा आयोजित दीपोत्वस कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन भारतीय इतिहास के महानतम सम्राटों में से एक थे। वे अपने दयालु स्वभाव, वीरता और न्यायप्रियता के साथ अपनी दूरदर्शिता के कारण ख्याति प्राप्त थे l
श्री अग्रवाल ने कहा है कि महाराजा अग्रसेन ने कल्याणकारी कार्यों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की समृद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया। महाराजा अग्रसेन सामाजिक समानता में दृढ़ विश्वास रखते थे। वे मानते थे कि प्रजा की प्रसन्नता में राजा की प्रसन्नता है, प्रजा के कल्याण में राज्य का कल्याण है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने कल्याणकारी राज्य की आधारशिला रखी और राज्य के निवासियों को सुशासन और सुरक्षा के साथ, व्यापार और वाणिज्य की उन्नति के लिए भी उपयुक्त माहौल उपलब्ध कराया था।
उन्होंने कहा कि महाराज अग्रसेन समाजवाद और सामूहिक प्रयासों से सभी की भलाई के प्रबल समर्थक थे। अपने राज्य के नए नागरिकों के लिए उन्होंने “एक ईंट और एक सिक्का” की नीति निर्धारित की इसी विश्वविख्यात नीतियों का परिणाम था कि उनकी राजधानी “अग्रोहा” अपने समय में सबसे समृद्ध और ख़ुशहाल राजधानी के रूप में जानी जाती थी। इस प्रकार उनका यह विचार अन्त्योदय का प्राम्भिक चरण माना जाएगा।
श्री अग्रवाल ने कहा कि हमे सामाजिक दायित्व निभाते हुए मानव कल्याण, जन कल्याण की प्रतिबद्धता से हमें सामूहिकता से काम करना है।
इस अवसर पर अग्रवाल सभा के संगठन मंत्री रोशनलाल अग्रवाल, ईश्वर चंद्र अग्रवाल, विनय जिंदल, राजन गोयल, विनय मित्तल, गोपीचंद मित्तल, प्रवीण गर्ग ,आशीष सिंघल, मनोज गुप्ता, महेश चंद्र गुप्ता, रामनिवास अग्रवाल, सुबोध जिंदल, महेंद्र अग्रवाल आदि सहित अनेक लोग उपस्थित थे l कार्यक्रम का संचालन अश्वनी गुप्ता ने किया l

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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