ऋषिकेशधर्म-कर्मशहर में खास

*ऋषिकेश- श्रीराम तपस्थली में भागवत कथा सप्ताह का हुआ शुभारंभ*


ऋषिकेश /लक्ष्मण झूला क्षेत्र में स्थित श्रीराम तपस्थली में ग्वालियर टैटोन से आए श्रीवास्तव परिवार द्वारा ब्रह्मपुरी में भव्य भागवत कथा का आयोजन आज से किया गया।

बैंड बाजे एवं ढोल के साथ सभी भक्तजन महामंडलेश्वर श्रीराम पीठाधीश्वर दयाराम दास जी की अध्यक्षता में एवं कथा व्यास सतीश कौशिक शास्त्री जी महाराज वृंदावन वाले के सानिध्य में आयोजित आज कथा के शुभारंभ पर गंगा किनारे सैकड़ों भक्तों द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई।

कथा सुनने वाले यजमान भक्तों में राजेश श्रीवास्तव, मीना श्रीवास्तव, सुरेश श्रीवास्तव, सुमन श्रीवास्तव, विद्या राम श्रीवास्तव, शैलेश श्रीवास्तव, रेखा श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, रश्मि श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, पुष्पा देवी, राखी देवी, गौरव श्रीवास्तव, राहुल श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, निधि श्रीवास्तव, आरती देवी, जय प्रकाश श्रीवास्तव, बलवीर सिंह सीकर वाले, शैलेश श्रीवास्तव, श्याम स्वरूप श्रीवास्तव, ठाकुर त्रिलोकी सिंह तोमर सहित तमाम लोग उपस्थित थे।

आश्रम के महंत महावीर दास जी एवं मंत्री प्रमोद दासजी ने बताया कि यह कथा 2 अक्टूबर से दिन के 12:00 बजे से 5:00 बजे तक चलेगी और 7 दिन बाद इसका समापन होगा।


आज पहले दिन कलश यात्रा के बाद कथा का रसपान कराते हुए कथा व्यास सतीश कौशिक शास्त्री जी महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को पुण्य उदय से ही कथा श्रवण का अवसर प्राप्त होता है। प्रथम दिवस की कथा में भागवत के महत्व व्यास जी द्वारा भागवत की रचना, शुक्रदेव की जन्म और नारद जी के पूर्व जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया। भक्ति ज्ञान वैराग्य की कथा सुनाते हुए शास्त्री जी ने बताया कि एक बार नारद जी कलयुग में पृथ्वी पर भ्रमण करते हुए वृंदावन में गये तो वहा उन्होंने एक अजीब दृश्य देखा कि एक युवा स्त्री की गोद में दो बुजुर्ग व्यक्ति पड़े हुए हैं। जब नारद जी ने उस स्त्री से पूछा कि दो बुजुर्ग कौन हैं औरर तुम्हारा नाम क्या है तब उस युवती ने बताया कि मेरा नाम भक्ति है और ये दोनो बुजुर्ग मेरे पुत्र ज्ञान ओर वैराग्य है। मैं युवा और मेरे पुत्र बुजुर्ग हैं। गुरुदेव ऐसे उपाय करो की मेरे पुत्र भी युवा हो जाए। तब नारद जी ने सारे वैदो के मंत्र सुनाए, गीता सुनाई फिर भी जवान नहीं हुए तब नारद ने सनकादिक के कहने पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सुनाई और कथा सुनते ही भक्ति के पुत्र ज्ञान वैराग्य युवा होकर नृत्य करने लगे।

कथा के बीच बीच में भक्तिमय में गानों पर भक्तों ने नृत्य कर कथा का रसपान किया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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