अपराध

*बलात्कार करने की कोशिश के आरोपी को मिली अनोखी सजा-छह महीने तक गांव की सभी महिलाओं के कपड़े धोने और आयरन करेगा आरोपी*

प्रतिकात्मक तस्वीर।

दुष्कर्म करने की कोशिश के आरोपी को मिली
मधूबनी जिले के झंझारपुर न्यायालय ने दुष्कर्म करने की कोशिश करनेवाले आरोपी को एक ऐसी अनोखी सजा सुनाई है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। कोर्ट ने आरोपी की जमानत पर सुनवाई करते कहा है कि वह अपने गांव के सभी महिलाओं के कपड़े साफ करेगा और आयरन कर उन्हें वापस लौटाएगा। यह कार्य लगातार छह महीने तक मुफ्त में करना है। उक्त आदेश एडीजे अविनाश कुमार ने सुनाया।
घटना 17 अप्रैल के रात की है। जब लौकहा थाना क्षेत्र के मझौरा गांव से जुड़ा है। जहां पेशे से धोबी का काम करनेवाले 20 वर्षीय ललन कुमार साफी पर गांव की एक महिला ने अभद्र व्यवहार करने और दुष्कर्म करने की कोशिश का आरोप लगाया था। मामले में शिकायत के आधार पर घटना के दो दिन बाद पुलिस ने ललन को गिरफ्तार कर लिया। तब से ही वह जेल में था और जमानत की सारी कोशिश नाकाम हो चुकी थी।
दोनों पक्ष समझौते को तैयार-

मंगलवार को मामले में झंझारपुर कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि उनका मुवक्किल मात्र 20 वर्ष का है। पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है। चार्ज शीट जमा किया जा चुका है और दोनों पक्षों के बीच समझौता पिटिशन भी दे दिया गया है। जिसके अनुसार उक्त महिला अब आगे के केस को प्रोसीड नहीं करना चाहती है।

कोर्ट ने सुनाई छह माह तक महिलाओं के कपड़े साफ करने की सजा-

सुनवाई के दौरान ललन के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल धोबी है और अपने पेशे से समाज की सेवा करना चाहता है। जिस पर एडीजे ने अपने फैसले में महिला के अपमान से जुड़े मामला को देखते हुए गांव के सभी महिलाओं के वस्त्र को साफ कर आयरन करने की शर्त पर रेगुलर बेल दी है। जिसमें 10 हजार के दो जमानतदार के अलावा उक्त शर्त को पूरा करते हुए अपने गांव के मुखिया या सरपंच अथवा किसी भी सम्मानित सरकारी कर्मी से 6 महीना तक मुफ्त सेवा करने का प्रमाण पत्र लेकर कोर्ट में समर्पित करने का निर्देश दिया है।

मुखिया रखेंगे नजर-
कोर्ट ने जमानत की कॉपी गांव के सरपंच और मुखिया को भी भेजे जाने की बात कही है। ताकि जमानत पर रिहा होने वाले युवक गांव में फ्री सेवा दे रहे हैं या नहीं इस पर नजर रखेंगे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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