ऋषिकेशशहर में खास

*हिंदी भाषा को आचार व्यवहार में अपनाने से ही इसकी समृद्धि संभव-प्रो. मनोज गुप्ता*

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में हिंदी सप्ताह कार्यक्रम मंगलवार का विधिवत शुरू हो गया। इस अवसर पर संस्थान के चिकित्सकों, संकाय सदस्यों और अन्य कर्मचारियों ने राजभाषा में अधिकाधिक कार्य करने की सामुहिक प्रतिज्ञा ली। संस्थान में आयोजित राजभाषा हिंदी सप्ताह के तहत 15 सितंबर से 23 सितंबर तक वि​​भिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राजभाषा सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर मुख्यअतिथि संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने संकाय अधिकारियों व कर्मचारियों से आह्वान किया कि वह अपना अधिकाधिक कार्य हिंदी में करें और बोलचाल में भी मातृभाषा को अपनाएं। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को आचार व्यवहार में अपनाने से ही इसकी समृद्धि हो सकती है, जिसके लिए सभी को संकल्पबद्ध प्रयास करने चाहिंए। संकायाध्यक्ष अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा जी ने सुझाव दिया कि हमें हिंदी भाषा में कार्य करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए, ऐसा करना हिंदी के विकास में हम सबका योगदान सुनिश्चित होगा। उन्होंने अपील की कि गैर हिंदी भाषी लोगों को भी हिंदी में कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। संस्थान के राजभाषा अधिकारी शशिकांत ने बताया ​कि राजभाषा हिंदी सप्ताह के अंतर्गत बुधवार को निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार बृहस्पतिवार को टिप्पण प्रतियोगिता, शुक्रवार को हिंदी टंकण, शनिवार को अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सप्ताह के तहत 20 सितंबर को वाद विवाद प्रतियोगिता तथा 23 सितंबर को स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता के साथ ही हिंदी सप्ताह का समापन समारोह होगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल आने वाले लोगों को प्रशस्तिपत्र व नकद धनराशि से पुरस्कृत किया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान के वित्तीय सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा, कुलसचिव राजीव चौधरी, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष संदीप सिंह,हिंदी अधिकारी नीरा तिवारी समेत कई संकाय अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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