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*ऋषिकेश-श्री सच्चा वैदिक संस्थान (श्री सच्चा धाम) के पक्ष में कोर्ट ने फैसला सुनाया -पढ़ें पूरी खबर विस्तार से*

लक्ष्मण झूला तपोवन सराय स्थित श्री सच्चा वैदिक संस्थान सच्चा धाम द्वारा आज एक होटल में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
अनुराग गोयल, ओपी गुप्ता, महेंद्र कुमार ग्रोवर ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि लक्ष्मण झूला तपोवन में स्थित सच्चा धाम एक धार्मिक संस्था सच्चा वैदिक संस्थान से जुड़ी लंबी कानूनी कार्रवाई का आज निर्णय हमारे पक्ष में हुआ है। सच्चा धाम तपोवन में धार्मिक संस्था सच्चा वैदिक संस्थान को गुरु महाराज स्वामी हंसराज जी द्वारा अपने जीवन काल में संस्था के संरक्षक के रूप में स्थापित किया व संचालित किया जाता रहा है। उनके 23-10 -2011 को ब्रह्मलीन होने के बाद अचानक से एक व्यक्ति रविंद्र पुत्र कान सिंह द्वारा एक वसीयत पेश कर खुद को संस्था का अगला संरक्षक घोषित कर दिया। और महाराज जी के सानिध्य में कार्यरत पदाधिकारियों को डराया और धमकाया जिस से आहत होकर अध्यक्ष योगेश गर्ग द्वारा अपने पद से इस्तीफा दे दिया गया। आश्रम के सभी पदाधिकारियों द्वारा सुरेंद्र कुमार मित्तल को नवंबर 2011 को अध्यक्ष घोषित किया गया। अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल द्वारा तुरंत ही दिसंबर 2011 में रविंद्र पुत्र कान सिंह के खिलाफ माननीय अदालत में दो सिविल वाद दायर किए गए जिसमें से एक बाद रविंद्र द्वारा पेश की गई वसीयत को फर्जी एव शून्य घोषित करने का था व दूसरा वाद रविंद्र को संस्था की किसी कार्रवाई व संचालन में किसी भी तरह से दखल नहीं देने का था। सन् 2011 से शुरू हुई इस कानूनी कार्रवाई में पहली बार 30- 3- 2016 में फैसला आया जिसमें रविंद्र द्वारा पेश की गई वसीयत को न्यायालय द्वारा शून्य व फर्जी घोषित किया गया और उसे संस्था की किसी भी करवाई करवाई व संचालन में दखल न देने की घोषणा की गई। परंतु रविंद्र द्वारा जब माननीय जिला जज टिहरी के पास इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई तो माननीय जिला जज टिहरी द्वारा अपने निर्णय 14 फरवरी 2017 को दोनों बाद को कुछ बिंदुओं पर दोबारा सुनने के लिए वापस नीचे की अदालत में भेजा गया। जिसके बाद दोबारा चली लंबी कानूनी कार्रवाई के बाद 2 सितंबर 2021 को एक बार फिर माननीय न्यायालय नरेंद्र नगर द्वारा अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल द्वारा दायर किए गए दोनों बात को सही मानते हुए दोबारा रविंदर द्वारा पेश की गई वसीयत को फर्जी व शून्य घोषित कर दिया गया है। और इसके साथ ही संस्था की कार्रवाई व संचालन में दखल न देने की घोषणा भी की गई है। इससे पहले भी रविन्द्र पुत्र कान सिंह उसके परिवार व अन्य साथियों को 17 फरवरी 2008 को अनैतिक गतिविधियों में संलिप्तता होने के कारण महाराज द्वारा आश्रम सच्चा धाम से निष्कासित किया गया था, परंतु फिर भी रविंद्र व उसका परिवार अन्य साथी आज भी अनाधिकृत तौर पर आश्रम में आते जाते रहे।
रविंद्र पुत्र कान सिंह द्वारा लगातार पिछले 10 वर्षों से संस्था से जुड़े व्यक्तियों प्रशासनिक अधिकारियों व हंसराज जी को समर्पित रहने वाले आमजन को यह बताया जाता रहा है कि वह संस्था का संरक्षक व ब्रह्मचारी है। और सच्चा धाम आश्रम व संस्था से जुड़ी सभी संपत्तियों का संचालन कर रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि ना ही वह संरक्षक ना ही वह ब्रह्मचारी है। संस्था की सभी कार्यवाही व संस्था के जुड़ी संपत्तियों का संचालन लगातार अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। वह संस्था से जुड़ी संपत्ति या संस्था में निहित है और किसी व्यक्ति विशेष को इसे बेचने और खरीदने का कोई अधिकार नहीं है।
रविंद्र पुत्र कान सिंह व उनके अन्य साथियों पर स्वामी हंसराज जी की फर्जी वसीयत बनाने के संबंध में एक अपराधिक मामला 140 / 13 एफ आई आर नंबर 07/ 2012 अंतर्गत धारा 420, 467, 468, 471 ,120 बी व एक अन्य अपराधिक मामला 518/20 -एफ आइ आर नंबर 18/ 2019 अंतर्गत धारा 420 ,467, 468 471 सोसाइटी ऑफिस रजिस्टार चित फंड देहरादून में 2016 में संस्था वैदिक संस्थान का रिन्यूअल कराने के लिए फर्जी अकाउंट बैलेंस शीट ऑडिट रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज तैयार करने में दिए जाने के संबंध में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।हम आपको निर्णय की प्रति उपलब्ध करा है ताकि स्वामी हंसराज को समर्पित रहने वाले आमजन व प्रशासन को सच्चाई का पता चल सके।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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