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डॉ0 कविता भट्ट का लेखन कत्थक-काव्य हेतु उत्कृष्ट: सुप्रतिष्ठित कत्थक नृत्यांगना उर्वि सुकि


(कत्थक नृत्यांगना- उर्वि सुकि)
कत्थक नृत्य प्रस्तुति के लिए यदि शास्त्रीय भाषा और साररूप में विषयवस्तु मिल जाए तो बहुत आनन्द मिलता है। वास्तव में डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री‘ का सरस, शास्त्रीय, मनोहारी एवं सारगर्भित काव्य कथक विधा के साथ अद्भुत लयबद्धता रखता है; इसीलिए कथककाव्य हेतु मैंने उनके काव्य को चुना और उस पर कथक प्रस्तुति दी जिसे लहजा फाउन्डेशन के पटल पर सैकड़ों दर्शकों द्वारा देखा और सराहा गया। यह बात महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना कुमारी उर्वि सुकि ने कही। इस कत्थक काव्य में संगीत है प्रसिद्ध बाँसुरीवादक और शिव-हरि जोड़ी के लोकप्रिय संगीतकार पं0 हरिप्रसाद चौरसिया का। उर्वि एक सुप्रतिष्ठित लोकप्रिय कथक नृत्यांगना होने के साथ ही महाराष्ट्र की निवासी हैं और पश्चिमी रेलवे में इंस्पैक्टर के पद पर सेवारत हैं। उर्वि अनेक अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं। साथ ही अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हैं। उर्वि ने कहा कि कत्थक काव्य में डॉ कविता के हाइकु पर नृत्य करने का उनका अनुभव नया एवं रोमांचक रहा। वे शैलपुत्री के नाम जानी जाने वाली सुप्रतिष्ठित लेखिका डॉ कविता भट्ट के प्रति कृतज्ञ हैं कि अपने द्वारा रचित हाइकु को इस प्रकार प्रस्तुत करने की अनुमति उन्होंने दी।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उन्हें नदी विषय पर कथक की प्रस्तुति करनी थी। जब वे अपनी कथक प्रस्तुति के लिए विभिन्न विषयों पर इन्टरनेट पर शास्त्रीय काव्य खोज रही थी उस समय नदी विषय पर ‘हाइकु‘ विधा में उन्हें डॉ कविता भट्ट के हाइकु की भाषा शास्त्रीय और उत्कृष्ट लगी। पढ़ते-पढ़ते उन्होंने अपने कथक काव्य के मंचन हेतु डॉ कविता के नदी विषय पर लिखे गये ‘शैल-मुदित….‘ इत्यादि अनेक हाइकु चुने और इनके शब्दों को कथक नृत्य में प्रस्तुत करने से उन्हें आनन्द मिला। उर्वि ने बताया कि डॉ कविता को पढ़कर उन्हें पता चला कि हाइकु तीन पंक्तियों की एक जापानी काव्य विधा है जिसमें पहली पंक्ति में 5, दूसरी पंक्ति में 7 और तीसरी-अंतिम पंक्ति में 5 वर्ण होते हैं। इस प्रकार यह एक लघु काव्य विधा है; जिसमें कि किसी भी विषय का पूरा शब्द चित्रण होता है। यह शब्द चित्र इतना सुन्दर और मनोहारी होता है कि एक हाइकु स्वयं में परिपूर्ण होता है। हाइकु संक्षेप में बड़ी से बड़ी बात कह सकता है। नृत्यांगना उर्वि ने बताया कि डॉ कविता हाइकु विधा में सिद्धहस्त हैं। इनके द्वारा हिन्दी में हाइकु लेखन और अनुवाद कार्य किए गए हैं। हाल ही इन्होंने पांच देशों के 43 हाइकुकारों द्वारा रचित 468 हिन्दी हाइकु को अपनी मातृभाषा गढ़वाली में अनूदित किया है। इस हाइकु-संग्रह का नाम ‘पहाड़ी पर चन्दा (काँठा माँ जून) है; जो हाइकु के क्षेत्र में हिन्दी से गढ़वाली में अनुवाद की दृष्टि से पहला ऐतिहासिक कार्य है। इसके अतिरिक्त डॉ कविता लगभग 20 पुस्तके लिख चुकी हैं और वे एक गंभीर लेखिका, कवयित्री, वक्ता और सम्पादक हैं । अनेक वैदेशिक पटलों के अतिरिक्त डॉ भट्ट साहित्य अकादमियों, विभिन्न मंत्रालयों, दूरदर्शन, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास और आकाशवाणी इत्यादि द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में आमंत्रित की जाती रही हैं। साथ ही उनकी रचनाओं का संस्कृत, अंग्रेजी, बंगाली, गुजराती, हरियाणवी और गढ़वाली इत्यादि भाषाओं में अनुवाद हो चुका है । भविष्य में उर्वी अन्य रचनाओं को भी नृत्य में ढालेंगी ।

डॉक्टर कविता भट्ट”शैल पुत्री”

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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