साहित्य सृजन।

*रजनीश तिवारी की एक कविता- “आकलन”*

शीर्षक:- आकलन

सोचता हूं , प्रियतमे,
तुम्हारे बारे में कुछ लिखूं।
पर तुम प्रभु की सबसे प्यारी कविता हो
मैं और क्या लिखूं?

कभी सोचूं क्या चित्र बनाकर तुम्हारा,
रंग मैं भरूंं?
पर तुममें जो सौंदर्य-शील के रंग हैं,
मैं और क्या भरूं?

क्या एक मूर्ति बना लूं तुम्हारी?
शिल्प-कला जाहिर करूं?
पर तुम हो आनंद की मूर्ति ,
मैं बस पूजा करूं।

पूर्ण उसे करते हैं
जो कहीं से रहे अपूर्ण
तुम में एक कण भी नहीं अपूर्ण
मैं क्या पूरा करूं?

रचनाकार -रजनीश तिवारी*

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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