व्यक्ति विशेषसाहित्य सृजन।

*कवियत्री- अरूणा वशिष्ठ (गंगा पुत्री ) की एक कविता-“मेंरी सम्पदा”*

ये मेंरी प्रकृति सम्पदा है 🌳
🌴🌹💐👈🏻
ये परमात्माँ नें हमें दी है 🙏 और कहा है 👍
अच्छे कर्म कर और बटोर ले
जो बटोरना है🌳🌴👈🏻
आकाश से पाताल तक तिल – तिल में दी है मैंनें सम्पदा तुझे👈🏻🙏💁‍♀️ अब ये तेरे ऊपर है कि
क्या बटोरेगा 💁‍♀️
और क्या देखेगा ?😳
देखनें को भी बहुत कुछ दिया है मैंनें👈🏻🙏
सूरज की गरमाहट
चाँद की शितलाहट 🙏
तारों की टिमटिमाहट
प्रकृति की जगमगाहट 👈🏻🌹
सम्पदा में कनकनाहट
बादलों में 🔱घड़घडाहट🔱बिजली की चिलमिलाहट
आकाश से मेंघाहट
धरती की हरहराहट🌳 🌳🌹🌴💐
नदीयों से प्यार की आहट
बागों में फूलों की🌹🌳
खिलखिलाहट🌳🌳🌴🌴
जंगलों में सरसराहाट🌹💐
सड़को में रोनकाहट👩‍👦👨‍👧👩‍🦰👩‍🎤👈🏻
ये मेंरी प्रकृति सम्पदा है
पर्वतो में देवासन्त्व 🔱🔱🌹🌹🙏 बटोर ले जो बटोरना है ।।
प्रकृति नें सम्पदा दी है हमें
कनकन में रोशनाहट
कर्म कर ले बटोर ले जो बटोरना है 👍 👈🏻
प्रकृति नें कर्मफल ले जानें का रास्ता दिया है हमें👍
मैनें जो सम्पदा दी है तुझे👈🏻
संसार में बाँटले जो बाँटना
है🙏
अब देखले😳
वहीं
मिलना है कर्म फल भी हमें🙏👈🏻🙏🌴🌳कर्म फल भी हमें 🙏

-कवियत्री- अरूणा वशिष्ठ (गंगा पुत्री )

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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