धर्म-कर्मराशिफल

*आज आप का राशिफल एवं प्रेरक प्रसंग- सच्ची मित्रता*


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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज दिन की शुरुआत आलस्य प्रमाद से होगी ध्यान रहें कार्यो को लेकर टालमटोल की प्रवृति हानि करा सकती है। दोपहर के समय से स्थिति बेहतर होने लगेगी। उत्तरार्ध का समय आकस्मिक फायदे कराने वाला रहेगा। आज आप किसी से अधिक व्यवहार करना पसंद नहीं करेंगे इससे कई समस्याओं से भी बचे रहेंगे। सामाजिक क्षेत्र पर भी आज आपके योगदान की प्रशंसा होगी। वरिष्ठ जनो के साथ नविन संपर्क बनेंगे। स्त्री-पुत्र से लाभदायक समाचार मिल सकते है। विपरीत लिंगीय आकर्षण आज कम रहेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज आप मध्यान तक जितना परिश्रम करेंगे इसके बाद के समय उससे पूर्ण संतुष्ट रहेंगे धन लाभ भी होने के साथ भविष्य में आय के मार्ग भी बनेंगे। आज का दिन प्रेम-प्रसंगों में भी यादगार अनुभूति कराएगा। पर्यटक स्थल पर घूमने-फिरने की योजना बनाएंगे। आज फिजूल खर्च भी अधिक रहने वाला है जिस पर नियंत्रण की आवश्यकता है। कार्य व्यवसाय का दायित्व आज नौकरों अथवा सहकर्मियों के ऊपर छोड़ना पड़ेगा। परिजनों के साथ किसी सामाजिक कार्यक्रम में उपस्थित हो सकते है। महिलाये एवं बच्चे मनोकामना पूर्ति से उत्साहित होंगे।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन भी शुभ फलों की प्राप्ति कराएगा लेकिन आज चोटादि का भी भय है जोखिम ना लें वाहन से सतर्क रहें।
सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव बना रहेगा। पुराने लटके कार्यो में गति आएगी। नई योजनाएं अधिक फलीभूत होंगी। सामाजिक कारणों से भी आज अधिक व्यस्त रह सकते है। सरकारी कार्य आज मध्यान से पहले पूर्ण होंगे। संध्या के समय धन की आमद होने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। विरोधी आज शांत रहेंगे। महिलाये आज घरेलू कार्य मे ज्यादा व्यस्त रहेंगी। रिश्तेदारों के आने से चहल पहल बढ़ेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए मिला जुला रहेगा। दोपहर तक लगभग सभी कार्यो में विलंब होगा जो कार्य करेंगे उनके पूर्ण होने में भी संशय बना रहेगा लेकिन मध्यान बाद स्थिति में थोड़ा सुधार आने लगेगा। सामाजिक अथवा मांगलिक कार्यक्रमो के कारण व्यस्तता अधिक रहेगी। कार्य क्षेत्र से भी धन का आगमन होगा। फिजूल खर्च भी लगे रहेंगे जिन पर अंकुश रखे। विपरीत लिंगीय से आज आकस्मिक लाभ हो सकता है नजदीकियां भी बढ़ेंगी। उपहार सम्मान मिलेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए आनंद दायक रहेगा। आप आज प्रत्येक कार्य को देखभाल कर ही करेंगे जिससे सफलता का प्रतिशत अधिक रहेगा। नौकरी व्यवसाय में आज मध्यान तक किया परिश्रम का फल संध्या के समय सम्मान एव धन लाभ के रूप में मिल जाएगा। कार्य क्षेत्र पर आज प्रतिस्पर्धा भी अधिक रहेगी लेकिन आपके काम निकालने की कला लाभ दिलाएगी। आप किसी की भी मनोकामना पूर्ति करने में हिचकिचाएंगे नही। परिजनों से स्नेह की वर्षा होगी। संतानो का व्यवहार भी अनुकूल रहेगा। महिलाये घर की साज सज्जा पर खर्च करेंगी। सेहत सामान्य रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा मध्यान बाद तक प्रत्येक कार्यो में उदासीनता दिखाएंगे परन्तु धार्मिक कार्यो के प्रति आकर्षित रहेंगे। मध्यान पश्चात गाड़ी पटरी पर आने लगेगी। नौकरी व्यवसाय में आपके कार्य की प्रशंसा होगी। धन लाभ के कोई भी अवसर चूकेंगे नही। दाम्पत्य जीवन में सरसता बनी रहेगी। पत्नी संतान के साथ आज अच्छी पटेगी। स्वास्थ्य आज सर्दी जुखाम के कारण नरम रह सकता है फिर भी आपकी दिनचर्या पर इसका विशेष असर नहीं पड़ेगा। संध्या के बाद यात्रा की योजना बनेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज दिन के मध्यान तक का समय सामान्य बना रहेगा लेकिन इसके बाद कही से अशुभ समाचार मिलने से परेशान रहेंगे। इसके बाद का समय श्रम साध्य रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज महत्त्वपूर्ण कार्य मध्यान के बाद करना लाभदायक रहेगा। घरेलु उत्पादों के क्रय-विक्रय सम्बंधित व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाएंगे। परिजन का ख़राब स्वास्थ्य भी चिंता का विषय बनेगा। धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आ जायेगी। पूजा पाठ में भाग लेंगे धार्मिक यात्रा के प्रसंग भी बन सकते है। महिलाये पारिवारिक स्थिति के कारण बेचैन रहेंगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आप दिन के आरंभिक भाग में अनुकूल परिस्थितियों का जमकर लाभ उठायेंगे। आज आपके स्वाभाव में नरमी रहने से परिजनों के साथ चल रहे मतभेद सामान्य होंगे। कला एवं संगीत में आज विशेष रूचि रहेगी। कार्य क्षेत्र पर आज किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति का सहयोग मिलने से रुके कार्य पूर्ण होंगे। संतानों के ऊपर खर्च बढेगा महिलाये अस्त-व्यस्त गृहस्थी को संभालने में अधिक व्यस्त रहेंगी। नजदीकी रिश्तेदारो से शुभ समाचार मिलेगा। धन लाभ कम परिश्रम से हो जाएगा। मध्यान पश्चात स्थिति प्रतिकूल होने लगेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज दिन के मध्यान तक आप सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। शारीरिक स्फूर्ति गायब रहेगी। अधिकांश कार्यो में देरी होगी। दोपहर बाद आकस्मिक लाभ के समाचार मिलने से उत्साह वृद्धि होगी। विरोधी आपकी प्रगति से ईर्ष्या करेंगे शेयर सट्टे में आज किया निवेश निकट भविष्य में लाभ कराएगा। अन्य व्यवसाय में भी आज मेहनत का फल थोड़े देर से परन्तु भरपूर मिलेगा। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपका योगदान प्रतिष्ठा बढ़ाएगा। महिलाये अपने कार्यो के प्रति निष्ठावान रहेंगी।परिवार के बुजुर्गो का सहयोग घरेलू कार्य के साथ व्यवसायिक कार्यो को सहज बनाएगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन पूर्वार्ध आपके लिए धन वृद्धि कारक रहेगा। कार्य क्षेत्र पर आज अधिकारियो का प्रोत्साहन मिलने से उन्नति के मार्ग खुलेंगे। व्यवसाय में लाभ पाने के लिए थोड़ा परिश्रम करना पड़ सकता है लेकिन इसका फल आश्चर्य में डालने वाला रहेगा। अनैतिक कार्यो में पड़ने से मान हानि के योग बनेंगे इससे दूर रहें। परिजनों से मधुर भावनात्मक सम्बन्ध रहेंगे घरेलू समस्याओ को महिलाये अपने बल पर सुलझा लेंगी। संध्या के समय शुभ समाचार मिलेंगे। उत्तम भोजन वाहन मनोरंजन पर्यटन से आनंद मिलेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज दोपहर तक अपने सभी कार्य पूर्ण करने का प्रयास करें इसके बाद परिस्थिति कलहकारी बनेगी जिसका भला करने का सोचेंगे उसी का व्यवहार आपको आहत करेगा। महिलाये भी आज मानसिक रूप से अशांत रहेंगी। सेहत भी असामान्य रहने से कार्य क्षेत्र पर बेहतर अनुभव नहीं करेंगे। फिर भी चाटुकारिता का सहारा लेकर खर्च योग्य आय बना ही लेंगे। धार्मिक स्थानों पर दान पुण्य के अवसर मिलेंगे। स्त्री मित्रो से संबंदो में कड़वाहट आ सकती है। दिनचर्या असंयमित रहेगी। संतानो के ऊपर नजर रखें।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी आपके लिए लाभदायी रहेगा बीते कल के अधूरे कार्य आज पूर्ण होने से धन की आमद होगी। नौकरी पेशा लोग भी अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित होंगे। दूर के व्यवसायों अथवा शेयर आधी के कार्यो में उछाल आने से अन्य आय के साधन बनेंगे। सरकारी कार्यो में आज ढील ना दे अन्यथा लंबे समय के लिये लटक सकते है। धार्मिक कार्यो में रुचि होने पर भी उपयुक्त समय नही निकाल पाएंगे। संध्या के बाद समय प्रतिकूल हो जाएगा आसपास का वातावरण क्रोध दिलाने वाला बनेगा ना चाहते हुए भी किसी से झगड़ा होने की संभावना है। महिलाओ की सेहत खराब होने की संभावना है।
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*🔹 आज का प्रेरक प्रसंग 🔹*

*!! सच्ची मित्रता !!*
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वह एक छोटी-सी झोपड़ी थी। एक छोटा-सा दिया झोपड़ी के एक कोने में रखा अपने प्रकाश को दूर-दूर तक फैलाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन एक कोने तक ही उसकी रोशनी सीमित होकर रह गयी थी। इस कारण झोपड़ी का अधिकतर भाग अंधकार में डूबा था। फिर भी उसकी यह कोशिश जारी थी, कि वह झोपड़ी को अंधकार रहित कर दे।

झोपड़ी के कोने में टाट पर दो आकृतियां बैठी कुछ फुसफुस कर रही थी। वे दोनों आकृतियां एक पति-पत्नी थे।

पत्नी ने कहा– “स्वामी ! घर का अन्न जल पूर्ण रूप से समाप्त है, केवल यही भुने चने हैं।”

पति का स्वर उभरा– “हे भगवान ! यह कैसी महिमा है तेरी, क्या अच्छाई का यही परिणाम होता है।”

“हूं” पत्नी सोच में पड़ गयी। पति भी सोचनीय अवस्था में पड़ गया।

काफी देर तक दोनों सोचते रहे। अंत में पत्नी ने कहा– “स्वामी ! घर में भी खाने को कुछ नहीं है। निर्धनता ने हमें चारों ओर से घेर लिया है। आपके मित्र कृष्ण अब तो मथुरा के राजा बन गये हैं, आप जाकर उन्हीं से कुछ सहायता मांगो।”

पत्नी की बात सुनकर पति ने पहले तो कुछ संकोच किया। पर फिर पत्नी के बार-बार कहने पर वह द्वारका की ओर रवाना होने पर सहमत हो गया।

सुदामा नामक उस गरीब आदमी के पास धन के नाम पर फूटी कौड़ी भी ना थी, और ना ही पैरों में जूतियां।

मात्र एक धोती थी, जो आधी शरीर पर और आधी गले में लिपटी थी। धूल और कांटो से भरे मार्ग को पार कर सुदामा द्वारका जा पहुंचा।

जब वह कृष्ण के राजभवन के द्वार पर पहुंचा, तो द्वारपाल ने उसे रोक लिया।

सुदामा ने कहा– “मुझे कृष्ण से मिलना है।”

द्वारपाल क्रूद्र होकर बोला– “दुष्ट महाराज कृष्ण कहो।”

सुदामा ने कहा– “कृष्ण ! मेरा मित्र है।”

यह सुनते ही द्वारपाल ने उसे सिर से पांव तक घुरा और अगले ही क्षण वह हंस पड़ा।

“तुम हंस क्यों रहे हो” सुदामा ने कहा।

“जाओ कहीं और जाओ, महाराज ऐसे मित्रों से नहीं मिलते” द्वारपाल ने कहा और उसकी ओर से ध्यान हटा दिया।

किंतु सुदामा अपनी बात पर अड़े रहे।

द्वारपाल परेशान होकर श्री कृष्ण के पास आया और उन्हें आने वाले की व्यथा सुनाने लगा।

सुदामा का नाम सुनकर कृष्ण नंगे पैर ही द्वार की ओर दौड़ पड़े।

द्वार पर बचपन के मित्र को देखते ही वे फूले न समाये। उन्होंने सुदामा को अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें दरबार में ले आये।

उन्होंने सुदामा को अपनी राजगद्दी पर बिठाया। उनके पैरों से काटे निकाले पैर धोये।

सुदामा मित्रता का यह रूप प्रथम बार देख रहे थे। खुशी के कारण उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

और फिर कृष्ण ने उनके कपड़े बदलवाये। इसी बीच उनकी धोती में बंधे भुने चनों की पोटली निकल कर गिर पड़ी। कृष्ण चनो की पोटली खोलकर चने खाने लगे।

द्वारका में सुदामा को बहुत सम्मान मिला, किंतु सुदामा फिर भी आशंकाओं में घिरे रहे। क्योंकि कृष्ण ने एक बार भी उनके आने का कारण नहीं पूछा था। कई दिन तक वे वहा रहे।

और फिर चलते समय भी ना तो सुदामा उन्हें अपनी व्यथा सुना सके और ना ही कृष्ण ने कुछ पूछा।

वह रास्ते भर मित्रता के दिखावे की बात सोचते रहे।

सोचते सोचते हुए वे अपनी नगरी में प्रवेश कर गये। अंत तक भी उनका क्रोध शांत न हुआ।

किंतु उस समय उन्हें हेरानी का तेज झटका लगा। जब उन्हें अपनी झोपड़ी भी अपने स्थान पर न मिली।

झोपड़ी के स्थान पर एक भव्य इमारत बनी हुयी थी। यह देखकर वे परेशान हो उठे। उनकी समझ में नहीं आया, कि यह सब कैसे हो गया। उनकी पत्नी कहां चली गयी।

सोचते-सोचते वे उस इमारत के सामने जा खड़े हुये। द्वारपाल ने उन्हें देखते ही सलाम ठोका और कहा– “आइये मालिक।”

यह सुनते ही सुदामा का दिमाग चकरा गया।

“यह क्या कह रहा है” उन्होंने सोचा।

तभी द्वारपाल पुन: बोला – “क्या सोच रहे हैं, मालिक आइये न।”

“यह मकान किसका है” सुदामा ने अचकचाकर पूछा।

“क्या कह रहे हैं मालिक, आप ही का तो है।”

तभी सुदामा की दृष्टि अनायांस ही ऊपर की ओर उठती चली गयी। ऊपर देखते ही वह और अधिक हैरान हो उठे। ऊपर उनकी पत्नी एक अन्य औरत से बात कर रही थी।

उन्होंने आवाज दी–

अपना नाम सुनते ही ऊपर खड़ी सुदामा की पत्नी ने नीचे देखा और पति को देखते ही वह प्रसन्नचित्त होकर बोली–
“आ जाइये, स्वामी! यह आपका ही घर है।”

यह सुनकर सुदामा अंदर प्रवेश कर गये।

पत्नी नीचे उतर आयी तो सुदामा ने पूछा– “यह सब क्या है।”

पत्नी ने कहा– “कृष्ण! कृपा है, स्वामी।”

“क्या” सुदामा के मुंह से निकला। अगले ही पल वे सब समझ गये। फिर मन ही मन मुस्कुराकर बोले– “छलिया कहीं का।”

*शिक्षा:-*
दोस्तों, मित्र वही है जो मित्र के काम आये। असली मित्रता वह मित्रता होती है जिसमें बगैर बताये, बिना एहसान जताये, मित्र की सहायता इस रूप में कर दी जाये कि, मित्र को भी पता ना चले। जैसा उपकार श्री कृष्ण ने अपने बाल सखा सुदामा के साथ किया।”

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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