अजब-गजब!

*सड़क हादसे में खो चुके दोस्त के परिवार के सहारा बने- ये 40 दोस्त,पेश की एक मिसाल*

झारखंड के गोड्डा में बचपन के 40 लोगों ने सच्ची दोस्ती की मिसाल कायम की है. डेढ़ साल पहले वीरेंद्र कुमार की सड़क हादसे में मौत हो जाने के बाद उनके बचपन के दोस्त परिवार का सहारा बने. बचपन के दोस्त की मौत की खबर मिलने पर एक-एक कर 40 दोस्त इकट्ठा हुए. दोस्त के परिवार यानी उसकी बूढ़ी मां, पत्नी और दो बच्चों को किसी चीज की दिक्कत न हो इसलिए आपस में पैसे जमा किए.

इन पैसों से पहले 7 लाख रुपए खर्च कर उनका घर बनवाया. इसके बाद हर महीने गुजर बसर के लिए 15 हजार रुपए की इंजाम किया. वीरेंद्र पेसे से फोटो और वीडियोग्राफर था. 22 दिसंबर 2019 को कारगिल चौक पर हाइवा से धक्का लगने पर उनकी मौत हो गई थी.

इसके बाद मां किरण देवी, पत्नी ऐश्वर्या औत तीन साल के बेटे आरंब को संभालने वाला कोई नहीं था. इस परिवार के लिए वीरेंद्र के दोस्त आशा की किरण बनकर आए.

सावन के पहले दिन किया गृह प्रवेश

घर बनने के बाद इस साल सावन के पहले दिन दोस्तों ने गृह प्रवेश कराया. वीरेंद्र का एक दोस्त कोस्तुभ पूजा पर बैठे. पूजा में वीरेंद्र के रिश्तेदारों और परिचितों को भी बुलाया गया था. आयोजन में किसी भी तरह की कोई कमी देखने को नहीं मिली. वीरेंद्र के परिवार को कोई परेशानी नहीं हो. इसलिए हर समय कोई न कोई दोस्त उनका हाल-चाल लेता रहता है.

दोस्तों के परिवार की समस्या में हमेशा खड़ा रहता था वीरेंद्र

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक वीरेंद्र के बचपन के दोस्त लाल बहादुर, फरहान खान, मालिक सिन्हा, कौस्तुभ कुमार, पवन कुमार सुमन कुमा, तन्नु, केडी, रोशन कुमार, दिवाकर कुमार, रघु कुमार, रोशन कुमार, राहुल कुमार, दिव्य कुमार समेत कई अन्य दोस्तों ने मिलकर उनके परिवार की जिम्मदारी ली है. कौस्तुभ कुमार ने बताया कि वीरेंद्र अपने दोस्तों के परिवार की किसी भी समस्या में हमेशा आगे खड़ा रहता था. वीरेंद्र किराए के मकान में रहता था. पहले हमने उसकी खाली पड़ी जमीन पर घर बनवाने के लिए पैसों का इंतजाम किया. इसके बाद किसी दोस्त ने सीमेंट तो किसी ने ईंट का प्रबंध किया. कुछ दोस्तों ने घर बनाने में खुद सिर पर ईंट और सीमेंट ढोकर मजदूरी भी की.

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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