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*हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) की केंद्रीय कार्यकारिणी की हुई घोषणा-पढे़ं पूरी खबर विस्तार से*

राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रख्यात साहित्यकार तथा पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ0 रवींद्र शुक्ल तथा देश के अनेक विद्वानों के सम्मिलित प्रयास से हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) की केंद्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गयी है।

हिंदी साहित्य भारती से अब तक अनेक पूर्व राज्यपाल, विविध विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों सहित कई नवोदित साहित्यकार तथा हिन्दीप्रेमी जुड़ चुके हैं।

हिंदी साहित्यभारती के प्रमुख उद्देश्यों में भारत के गौरवशाली साहित्य एवं सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठा दिलाना, भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाना, वैश्विक स्तर पर हिंदी तथा उसकी सहायक बोलियों की महत्ता स्थापित करने हेतु विविध कार्यक्रम आयोजित करना, आर्थिक रूप से कमज़ोर साहित्यकारों की उच्च स्तरीय कृतियों को प्रकाशित कराने की व्यवस्था करना आदि हैं।

हिंदी साहित्यभारती द्वारा उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु वर्तमान में निम्नलिखित कार्यक्रम गतिमान हैं-
1- “राष्ट्रवन्दन अतीत का अभिनंदन” कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे महान साहित्यकारों पर गोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं जिनके साहित्यिक कार्यों का उतना प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया जिसके वे अधिकारी थे।

2- “राष्ट्रवन्दन वर्तमान का अभिनंदन” कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे श्रेष्ठ साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व का विवेचन किया जाता है, जो वर्तमान समय में समाज और राष्ट्रहित में साहित्यसृजन कर रहे हैं।
3- भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाने के आग्रह के लिये महामहिम राष्ट्रपति जी के नाम ऑनलाईन तथा ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से पत्र लेखन अभियान गतिमान है।

हिंदी साहित्यभारती (अंतर्राष्ट्रीय) इस समय 32 देशों में अपना सांगठनिक स्वरूप तैयार करके सतत क्रियाशील है। जहाँ जगद्गुरु राजराजेश्वरानंद जी, कनखल (हरिद्वार), तथा पूज्य स्वामी डॉ0 शाश्वतानंद गिरी जी जैसे सन्त इसके मार्गदर्शक मण्डल की शोभा बढ़ा रहे हैं, वहीं डॉ0 रवींद्र शुक्ल, पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय अध्यक्ष, डॉ0 बुद्धिनाथ मिश्र वरिष्ठ साहित्यकार केंद्रीय उपाध्यक्ष तथा डॉ0 अनिल शर्मा प्रख्यात साहित्यकार, केंद्रीय महामंत्री के रूप में इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य की कार्यकारिणी में माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष व भारतीय जनता पार्टी के पॉलिसी रिसर्च विभाग के प्रभारी प्रख्यात साहित्यकार डॉ अनिल शर्मा हिंदी साहित्य भारती उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी,
ख्यातिलब्ध साहित्यकार

डॉ0 जयंती प्रसाद नौटियाल अध्यक्ष, देश-विदेश में प्रतिष्ठापित लेखिका तथा योग विशेषज्ञ डॉ0 कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ महामंत्री के रूप में अपना दायित्य निभा रही हैं। मीडिया संयोजक ठाकुर मोहित ने बताया कि कोविडकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र ही प्रदेश में प्रत्यक्ष रूप से बड़े आयोजन किए जाएंगे। वर्तमान में ऑनलाइन आयोजन विभिन्न जनपदों में गतिमान हैं।
जनपद देहरादून से अध्यक्ष प्रबोध उनियाल ,महामंत्री डॉ सुनील दत्त थपलियाल ,कुसुम पंत , मणि अग्रवाल, ममता जोशी , अनीता भट्ट , सत्यानंद बडोनी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

इसके साथ ही डॉ सविता मोहन का हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय) संस्था में केंद्रीय उपाध्यक्ष के लिए मनोनयन किया गया है।
प्रख्यात साहित्यकार व पूर्व शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश डॉ रविन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय ) की केंद्रीय कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए केंद्रीय उपाध्यक्ष के लिए डॉ सविता मोहन का मनोनयन किया है। बताते चलें कि डॉ सविता मोहन पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा उत्तराखंड भी रह चुकी हैं।
उनके मनोनयन पर हिंदी साहित्य भारती,देहरादून इकाई ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना है। साथ ही उत्तराखंड में भी अपनी भाषा ,बोली के संरक्षण व संवर्धन के लिए हिंदी साहित्य भारती प्रमुखता से कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत अमूल्य है जिसको सहेजने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
उनके मनोनयन पर अशोक क्रेजी,रामकृष्ण पोखरियाल,सुनील थपलियाल,धनेश कोठारी,महेश चिटकारिया,मनोज मलासी व धनीराम बिंजोला आदि ने हर्ष व्यक्त किया है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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