धर्म-कर्महरिद्वार

हरिद्वार- कोरोना गाइडलाईन का पालन करते हुए मनाई शनि जयंती

(अविनाश गुप्ता) हरिद्वार। अमावस्या का सनातन धर्म में बहुत बड़ा महत्व है। लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस तिथि को न्याय के देवता शनिदेव का जन्म हुआ था। आमतौर पर लोग शनिदेव का नाम सुनते ही भयभीत हो जाते हैं। न्याय के देवता शनिदेव सूर्यदेव एवं माता छाया के पुत्र है,भगवान शनिदेव की दृष्टि ने सूर्यदेव को ही रोगी बना दिया था, जिसे उन्होंने भोलेनाथ की तपस्या कर के दूर किया था। अमावस्या के दिन अपने पितरों को अर्पित किया गया भोग और तर्पण हमारे बहुत से संकटों को समाप्त कर जीवन पथ पर विकास का मार्ग उपलब्ध कराता है। आज हरिद्वार के टीबडी फाटक पर स्थित सिद्ध शिव शनि मनोकामना मंदिर में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए कार्यकर्म का आयोजन किया गया। जिसमे शनिभक्त मोतीराम ने कहा कि पिछले वर्ष व इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण हम जागरण व भंडारे का अयोजन नहीं कर पाए। लेकीन शनि महाराज का अभिषेक जरूर किया गया। और जैसे हमने पिछले वर्ष जागरण व भंडारा ना करके गरीब, जरूरतमंदो को राशन किट दी थी, उसी तरह इस बार हम कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए, भोग प्रसाद वितरण करेंगे। शनिभक्त मोतीराम ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि महाराज की विधि-विधान से पूजा की जाती है। शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। शनि दोष से मुक्ति और शनि की शांति के लिए यह बेहद ही शुभ दिन माना जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा करने से जातकों पर शनि की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती है और शनि दोष से छुटकारा मिलता है। शनि देव को कर्म फलदाता भी कहा जाता है, जो लोगों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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