व्यक्ति विशेषसाहित्य सृजन।

*जनकवि डॉ अतुल शर्मा की पुस्तक ” संस्मरणों की बैठक,” “पाठकों के लिए कोराना संकट से उबरने में बेहतरीन साबित होगी*


वैश्विक महामारी के संकट में जहां अनेक सामाजिक धार्मिक संस्थाएं लोगों की मदद कर रही है वही साहित्यकार भी अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में ऐसे कठिन समय के लिए सकारात्मक सवर्णों को लिखकर मनोबल को बढ़ाने का काम कर रहे हैं इसी संदर्भ में उत्तराखंड के महान साहित्यकार डॉक्टर अतुल शर्मा के द्वारा लॉक डाउन की समय में एक महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना की गई जिसका नाम ,” संस्मरणों की बैठक” जो निश्चित रूप से पाठकों में एक और आत्म सम्मान एवं आत्मबल को बढ़ाने का काम करेगी विशेषकर इस माहौल में सकारात्मक सोच को बढ़ाने में यह पुस्तक एक औषधि के रूप में काम करेगी ।
प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महान साहित्यकार श्रीराम शर्मा प्रेम जी के सुपुत्र डॉक्टर अतुल शर्मा अनेक दशकों से साहित्य की सेवा में संलग्न है उत्तराखंड आंदोलन से लेकर अनेक प्रकार की आपदाओं में अपने लेखों के माध्यम से प्रसिद्ध रहे हैं समाज में निरंतर लेखकों को प्रोत्साहन देने वाले अतुल शर्मा की प्रमुख पुस्तक संस्मरणों की बैठक पाठकों के लिए बेहतरीन साबित होगी ।

जनकवि डाअतुल शर्मा की नयी पुस्तक प्रकाशित है ।लाकडाउन के इस समय मे यह एक रचनात्मक उपलब्धि है ।
किताब का नाम है “संस्मरणो की बैठक “लेखक डाअतुल शर्मा ।पिछले पचास वर्षों से साहित्य सृजन करते हुए वे महान साहित्यकारो के पारिवारिक सदस्य की तरह रहे ।वही रोचक संस्मरण इसमे लिखे गये हैं ।यह एक साहित्यिक उपलब्धि है ।
इसमे महान साहित्यकार महापंडित राहुल सांक्रित्यायन राष्ट्रीय कवि सोहन लाल द्विवेदी महाकवि त्रिलोचन शास्त्री जनकवि बाबा नागार्जुन गीतकार सोम ठाकुर वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु प्रभाकर शशिप्रभा शास्त्री धन्जय सिह कवि देवराज दिनेश कालिका प्रसाद काला (आकाशवाणी ) कवि शेरजंग गर्ग के साथ संस्मरण शामिल हैं।

इनमे लगभग सभी के साथ फोटो महत्वपूर्ण पत्र दिये गये हैं । महान शैलीकार पन्डित कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर जी के साथ आत्यीय पल लिखे गये हैं ।
डाअतुल शर्मा का रचना संसार बहुत विस्तार लिये हुए है ।
पुस्तक रमा प्रकाशन से छपी है ।
साहित्य जगत मे इस पुस्तक का स्वागत किया गया है ।
अनेक पुस्तकालयों वाचनालयों में पुस्तक की बेहतरीन मांग की गई है ।

– डॉक्टर सुनील दत्त थपलियाल

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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