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*क्या आप उत्तराखंड आ रहे हैं? तो इन बातों का रखें खास ख्याल, वरना बॉर्डर से वापस लौटना पड़ेगा*

कोरोना की दूसरी लहर के तेजी बढ़ने के साथ ही प्रवासियों के पहाड़ लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। हर दिन हजारों की तादाद में प्रवासी उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, लेकिन इनमें से हजारों ऐसे भी हैं, जिन्हें बॉर्डर से ही वापस लौटा दिया गया। दरअसल ये लोग बिना आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट के उत्तराखंड आए थे। अब तक पुलिस प्रशासन बिना रिपोर्ट आने वाले ऐसे 45 हजार प्रवासियों को वापस लौटा चुका है। आप भी उत्तराखंड आ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट साथ जरूर लेकर आएं। रिपोर्ट नेगेटिव होगी, तभी प्रदेश में प्रवेश मिलेगी। उत्तराखंड में इस वक्त कोरोना का क्या हाल है, आप सभी जानते ही होंगे। हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है। बाहर से आ रहे प्रवासियों की चेकिंग के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 40 जांच चौकी स्थापित की गई हैं। जिनमें 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। बॉर्डर पर वाहनों और दस्तावेजों की जांच हो रही है। 26 अप्रैल से अभी तक 376645 लोग सड़क मार्ग से राज्य में पहुंचे हैं। जिनमें से 9321 वाहनों से आए 45297 लोगों को पुलिस ने वापस लौटा दिया। आगे पढ़िए

दरअसल इन लोगों ने स्मार्ट सिटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। यही नहीं ये लोग आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट भी साथ नहीं लाए थे। अगर आप उत्तराखंड आने वाले हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। असुविधा से बचने के लिए आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाएं। स्मार्ट सिटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी जरूर कराएं। प्रवासियों के बिना जांच कराए उत्तराखंड में आने की वजह से मैदानों के साथ पहाड़ में भी कोरोना संक्रमण के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि एहतियात के तौर पर बॉर्डर पर पूरी सख्ती बरती जा रही है। पुलिस ने अभी तक बिना आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आने वाले 45 हजार से अधिक यात्रियों को राज्य की सीमा से लौटाया है। सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन में ये साफ लिखा है कि राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों को 72 घंटे पहले तक की अवधि की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट साथ लानी होगी। उन्हें स्मार्ट सिटी, देहरादून के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। 26 अप्रैल के बाद से ये व्यवस्था पूरी सख्ती के साथ लागू की गई है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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